ट्रंप की इकोनॉमिक पॉलिसी अमेरिका की ही निकाल देगी जान, पूर्व RBI गवर्नर का बड़ा दावा

Trump Tariff Policies: अमेरिकी टैरिफ पॉलिसी ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है और वैश्विक उद्योग जगत पर इसका असर साफ दिखाई दे रहा है. इस बीच, आरबीआई के पूर्व गवर्नर सी रंगराजन का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप की आर्थिक नीतियां न सिर्फ वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि खुद अमेरिका के लिए भी आत्मघाती साबित हो सकती हैं.

रंगराजन ने शुक्रवार को ‘ICFAI फाउंडेशन फॉर हायर एजुकेशन’ के 15वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि ट्रंप की कुछ नीतियों ने ग्लोबल ट्रेड के रुझानों को ठप कर दिया है. उन्होंने ‘BRICS’ का नाम लिए बिना कहा कि स्वतंत्र व्यापार वाले अलग-अलग गुटों का उभरना अपरिहार्य है, लेकिन अंतिम लक्ष्य एक ऐसा विश्व होना चाहिए जिसमें व्यापार अधिक खुला हो. उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिका के नीति निर्धारक समझदारी से काम लेंगे और आत्मघाती नीतियों को बदलेंगे.

अमेरिका के लिए जानलेवा ट्रंप की पॉलिसी

उन्होंने कहा कि भारत इस स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है. भारत की वृद्धि असमान है, क्योंकि महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, गुजरात और पश्चिम बंगाल का राष्ट्रीय आय में 52 प्रतिशत योगदान है, जबकि शेष राज्यों का योगदान 48 प्रतिशत है. रंगराजन ने उदाहरण देते हुए बताया कि गोवा की प्रति व्यक्ति आय बिहार की तुलना में 10 गुना अधिक है.

पूर्व आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए प्रति व्यक्ति आय को 18,000 अमेरिकी डॉलर तक ले जाना होगा. इसके लिए प्रमुख राज्यों को अपेक्षाकृत तेज़ वृद्धि दर हासिल करनी होगी. उदाहरण के लिए तमिलनाडु के लिए 8.71 प्रतिशत, गुजरात के लिए 9.63 प्रतिशत, कर्नाटक के लिए 8.77 प्रतिशत और महाराष्ट्र के लिए 9.53 प्रतिशत की वृद्धि दर अपेक्षित है. वहीं बिहार के लिए 17.4 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश के लिए 14.5 प्रतिशत वृद्धि दर की जरूरत होगी.

सबसे ज्यादा प्रभावित भारत 

उन्होंने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना केवल सांख्यिकीय लक्ष्य न होकर एक व्यापक परिवर्तन की यात्रा है, जिसके लिए सरकार और समाज दोनों का सामूहिक प्रयास जरूरी है. इसके लिए पांच केंद्रित क्षेत्रों पर ध्यान देना होगा — निवेश दर में दो प्रतिशत की वृद्धि, नई प्रौद्योगिकियों को अपनाना, श्रम-प्रधान क्षेत्रों को प्रोत्साहित करना, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे सामाजिक बुनियादी ढांचे का विस्तार करना और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता एवं प्रभावशीलता को मजबूत करना.

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