ट्रंप ने पैरासिटामॉल को बताया खतरा, क्या सच में ये उतनी खराब है जितनी बताई गई?

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पैरासिटामोल पर ट्रंप के बयान ने नई बहस को जन्म दे दिया है, दरअसल भारत में सबसे ज्यादा पैरासिटामोल का प्रयोग किया जाता है. यहीं पर सबसे ज्यादा इसका उत्पादन भी होता है.

ट्रंप ने अब पैरासिटामोल को लेकर बयान दिया है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पैरासिटामोल पर बयान देकर हंगामा मचा दिया है. उन्होंने अमेरिका में गर्भवती महिलाओं को इससे दूर रहने की सलाह दी है, अमेरिका में इस दवा को टायलेनॉल कहते हैं. ट्रंप का दावा है कि इस दवा से बच्चों में ऑटिज्म का खतरा बढ़ सकता है. ट्रंप ने कहा कि गर्भावस्था में इस दवा का इस्तेमाल सिर्फ बहुत तेज बुखार के मामले में ही करें, वरना इससे बचें.

ट्रंप के इस बयान पर हड़कंप इसलिए हैं, क्योंकि पैरासिटामोल दुनिया भर में दर्द और बुखार की सबसे आम दवा है. खासकर भारत में तो यह दवा हर घर में उपलब्ध है. ऐसे में एक बार फिर इस दवा के सुरक्षित इस्तेमाल पर एक बहस शुरू हो गई है. आखिर क्या हैं ट्रंप के बयान के मायने, भारत में कितना है पैरासिटामोल का कारोबार और क्या कहती हैं रिसर्च, आसान भाषा में समझते हैं.

भारत में आम है पैरासिटामोल का प्रयोग

भारत में पैरासिटामोल का इस्तेमाल बेहद आम है. यह दर्द, बुखार और सिरदर्द जैसी छोटी-मोटी परेशानियों के लिए सबसे पहले दी जाने वाली दवा है. देशभर में करोड़ लोग रोजाना इस दवा का सेवन करते हैं, एक रिसर्च के मुताबिक बच्चों को बुखार होने पर 85 प्रतिशत से ज्यादा माता पिता पैरासिटामोल ही देते हैं, डॉक्टर भी यही दवा देने की सलाह देते हैं. 2020 में आई दुनिया की सबसे बड़ी महामारी के समय भी पैरासिटामोल का बड़े पैमाने पर सेवन किया गया था. भारत में किसी भी मेडिकल स्टोर पर यह दवा बिना प्रिस्क्रिप्शन के उपलब्ध है.

भारत में कितना बड़ा है बाजार?

पैरासिटामोल का भारत में बहुत बड़ा बाजार है, 2024 में इसकी वैल्यू करीब 1.36 अरब डॉलर (लगभग 11,400 करोड़ रुपये) थी. बाजार विशेषज्ञों की मानें तो 2030 तक इसके 1.75 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. खास बात ये है कि इसकी डिमांड दुनियाभर में हैं, हालांकि भारत इस दवा का सबसे बड़ा उत्पादक देश है. यह सिरदर्द, जोड़ों के दर्द, मौसमी बीमारियां, सबमें काम आता है. फार्मा इंडस्ट्री रिपोर्ट्स बताती हैं कि केवल पैरासिटामॉल से ही सालाना अरबों की कमाई होती है. इसकी कीमत कम और असर तेज होने के कारण यह मार्केट में हमेशा टॉप सेलिंग प्रोडक्ट्स में शामिल रहती है. कोविड-19 महामारी के समय इसकी डिमांड कई गुना बढ़ गई थी. भारत की दवा इंडस्ट्री के लिए पैरासिटामॉल एक मजबूत कड़ी है.

भारत से ही पैरासिटामोल खरीदता है अमेरिका

भारत पैरासिटामोल का सबसे बड़ा निर्यातक है. यह दवा अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका जैसे देशों को भेजी जाती है. 2020 में महामारी के दौरान भारत ने 31 देशों को 1.9 मिलियन टैबलेट्स और अन्य फॉर्म में पैरासिटामोल एक्सपोर्ट किया था. अमेरिका को जेनेरिक दवाओं का 40% भारत से मिलता है, जिसमें पैरासिटामोल का बड़ा हिस्सा है. अमेरिका के अलावा भारत ब्रिटेन, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया समेत तकरीबन 175 देशों को यह दवा निर्यात करता है. पैरासिटामोल के अलावा भारत कई तरह की एंटीबायोटिक्स दवाएं भी एक्सपोर्ट करता है.

क्या पैरासिटामोल सुरक्षित है?

पैरासिटामोल को लेकर कई तरह की रिसर्च हुईं, लेकिन सभी पैरासिटामोल को सुरक्षित मानती हैं, हालांकि कुछ रिसर्च में गर्भावस्था के दौरान इसका ज्यादा प्रयोग हानिकारक माना गया है. इसी साल माउंट सिनाई स्टडी में बताया गया है कि अगर गर्भावस्था में पैरासिटामोल का सेवन ज्यादा किया जाए तो यह प्लेसेंटा को पार करके ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा कर सकता है.

जामा जर्नल के एक रिसर्च पेपर में पैरासिटामोल के अत्यधिक प्रयोग से न्यूरोडेवलपमेंटल रिस्क की बात है. लेकिन एफडीए और अन्य एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यह रिसर्च गलत है, क्योंकि भारत में 60% प्रेग्ट महिलाएं पैरासिटामोल का ही इस्तेमाल करती हैं. प्रेग्नेंसी में इसे ही सबसे ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. डॉक्टर जिस दवा से सबसे ज्यादा बचने की सलाह देते हैं वह नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (एनएसएआईडी) होती हैं, जैसे आईबुप्रोफेन, क्योंकि इससे गर्भपात या समय से पहले प्रसव का खतरा बढ़ जाता है.

WHO की जरूरी दवाओं की लिस्ट में

पैरासिटामोल भारत नहीं बल्कि सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली दवा है, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसेEssential Medicine” यानी जरूरी दवाओं की लिस्ट में शामिल किया है. इसका मतलब है कि दुनिया के हर देश में यह दवा उपलब्ध रहनी चाहिए. अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और एशियाहर जगह लोग इसे बुखार और दर्द में सबसे पहले चुनते हैं. आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में अरबों टैबलेट्स हर साल बिकती है. WHO भी कहता है कि कुल खुराक 4 ग्राम से ज्यादा हो तो यह जानलेवा हो सकती है. भारत में पैरासिटामॉल ओवर-द-काउंटर आसानी से मिल जाती है, जबकि कुछ देशों में इसे खरीदने पर पाबंदियां हैं. डॉक्टरों का कहना है कि पैरासिटामॉल को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है.

IMA क्या कहता है?

भारत में पैरासिटामोल की खपत सबसे ज्यादा है, यहां लोग इस दवा को हर मर्ज की दवा के तौर पर ही लेते हैं. डॉक्टरों की ओर से साफ तौर पर कहा गया है कि इस दवा को सीमित मात्रा में ही लेना बेहतर है. भारतीय डॉक्टर और हेल्थ बॉडीज इसके सशर्त इस्तेमाल को सुरक्षित मानते हैं. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) कहता है कि गर्भावस्था में 500 मिलीग्राम की डोज हर 4-6 घंटे में ली जा सकती है, हालांकि यह कुल 4 ग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.

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