ट्रंप खेलते रह गए टैरिफ-टैरिफ, भारत ने बदल लिया अपना रास्ता; बना लिए एक से बढ़कर एक धाकड़ दोस्त

Trump Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा होने वाला है. ट्रंप जब से दूसरी बार अमेरिका की सत्ता पर काबिज हुए, वह लगातार हर दूसरे दिन किसी न किसी देश के खिलाफ टैरिफ का ऐलान करते नजर आ रहे हैं. इस क्रम में ट्रंप ने भारत जैसे अपने बड़े ट्रेडिंग पार्टनर को भी बख्शा है.

भारत पर 575 परसेंट टैरिफ लगने का डर

फिलहाल भारत पर 50 परसेंट टैरिफ लगा हुआ है, लेकिन अगर भारत ने रूस के साथ तेल की खरीद जारी रखता है, तो इसे बढ़ाकर 500 परसेंट तक किया जा सकता है. इसी तरह से अगर भारत ने ईरान के साथ कारोबारी रिश्ता बनाए रखा, तो अलग से 25 परसेंट का टैरिफ और लग सकता है. यानी कि फिलहाल भारत पर 575 परसेंट टैरिफ का खतरा मंडरा रहा है.

ट्रंप के इन्हीं नए-नए फरमानों से दोनों देशों के बीच व्यापार और कूटनीतिक संबंध बिगड़ गए हैं. हालांकि, इसी बदलाव ने भारत को अपनी व्यापार रणनीति को फिर से बनाने, निर्यात बाजारों में विविधता लाने, अमेरिका से परे संबंधों को मजबूत बनाने और अपनी इकोनॉमी को एकतरफा व्यापार झटकों से बचाने के लिए मजबूर किया.   

भारत ने पकड़ी दूसरी राह

भारत के लेटेस्ट ट्रेड डेटा से पता चलता है कि देश की इकोनॉमी उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन कर रही है. दिसंबर के ट्रेड आंकड़ों में एक्सपोर्ट में मजबूती दिखी. ट्रंप के टैरिफ लगाने के बाद भारत ने पश्चिम एशिया, अफ्रीका, यूरोप और चीन जैसे नॉन-US मार्केट में मौके तलाशने शुरू कर दिए.  इसी का नतीजा है कि दिसंबर में चीन के लिए एक्सपोर्ट 67 परसेंट बढ़कर 2 बिलियन डॉलर हो गया, जबकि भारत के सबसे बड़े एक्सपोर्ट मार्केट अमेरिका को भेजे गए सामान में 1.8 परसेंट की गिरावट आई और यह 6.8 बिलियन डॉलर रहा.

भारत ने पलट दिया गेम 

यह अमेरिका के ही दबाव का नतीजा है कि भारत ने दूसरे देशों के साथ ट्रेड रिलेशन को मजबूत करने पर जोर दिया. भारत ने UAE, ऑस्ट्रेलिया, ओमान, UK जैसे दूसरे देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और आर्थिक पार्टनरशिप साइन की हैं. यूरोपियन यूनियन के साथ भी लंबे समय से अटकी ट्रेड डील भी अब फाइनल होने के करीब है. इस ट्रेड डील के चलते भारत के 99 परसेंट प्रोडक्ट्स को UK के बाजारों में फ्री एक्सेस मिलेगा. वहीं, भारत में मामूली 3 परसेंट की टैरिफ के साथ यूके के 99 परसेंट सामानों को आयात किया जा सकेगा.

भारत ने लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के साथ भी जुड़ाव बढ़ाया है और ग्लोबल सप्लाई चेन में बदलाव के बीच खुद को एक वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग और सोर्सिंग हब के तौर पर पेश किया है.

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