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Success Story: आज हम आपको एक ऐसी बेटी की कहानी बताने जा रहे हैं जो आदिवासी समुदाय से आती हैं. लेकिन इन्होंने अपने हुनर से वेटर से मैनेजर तक सफर पूरा किया. आज इसी हुनर से वह खुद का रेस्टोरेंट भी चला रही हैं. जिससे उन्हें अच्छा खासा मुनाफा हो रहा है.
छतरपुरः मध्य प्रदेश के डिंडोरी के पाटनगढ़ की रहने वाली मधु मरावी जो गोंड समुदाय से आती हैं. ये सालों से गोंड समुदाय का भोजन बना रही हैं. साथ ही खुद का रेस्टोरेंट भी चलाती हैं. यह गोण्ड समुदाय का भोजन बनाने के लिए भी जानी जाती हैं और अब इन्हें मध्य प्रदेश के बड़े-बड़े शहरों में भी बुलाया जाता है. जिससे इनको अच्छी खासी कमाई हो जाती है. इन्हें बचपन से ही भोजन बनाने में दिलचस्पी थी. जब से मम्मी-पापा के साथ बड़ी हुईं तभी से गोंड समुदाय का भोजन बना रही हैं.
वेटर से मैनेजर तक किया सफर
मधु बताती हैं कि उनके घर में राई की सूखी भाजी से लेकर चकोड़ा भाजी, भुट्टे की कढ़ी , कुटकी खीर, कोदो के चावल बनाए जाते थे. साथ ही मक्का और चावल की रोटी भी बनाई जाती थी. इसलिए उन्होंने सबसे पहले अपना पारंपरिक भोजन बनाना सीखा. इसके बाद उन्होंने चायनीज से लेकर इंडियन फूड बनाना सीखा. आज इसी हुनर के बदौलत वह रेस्टोरेंट की मैनेजर बनीं और अब महीने का 25 हजार रुपए आसानी से कमा लेती हैं.
मधु बताती हैं कि पहले वह पाटनगढ़ के मिड वे में काम करती थीं. वहां वेटर का काम करती रहीं. धीरे-धीरे उन्होंने चायनीज फूड से लेकर इंडियन फूड भी बनाना सीख लिया. अपनी मेहनत और हुनर से वह वेटर से मैनेजर पद पर पहुंची और आज खुद ही रेस्टोरेंट खोल लिया और अब मैनेजर बनकर रेस्टोरेंट संभाल रही हैं.
गोंड समुदाय का पारंपरिक भोजन बना सबकी पसंद
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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