आज देवी सरस्वती का प्रकट उत्सव (माघ शुक्ल पंचमी यानी वसंत पंचमी) है। वसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है, अबूझ मुहूर्त यानी इस दिन सभी मांगलिक कर्म मुहूर्त देखे बिना किए जा सकते हैं। हालांकि इस साल वसंत पंचमी पर शुक्र तारा अस्त है, इसलिए विवाह जैसे मांगलिक शुभ कामों के लिए कोई मुहूर्त नहीं है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, शुक्र और गुरु तारा अस्त होने से विवाह जैसे मांगलिक कामों के लिए मुहूर्त नहीं रहते हैं। मांगलिक कामों के लिए इन दोनों ग्रहों का शुभ स्थिति में होना जरूरी है, इनकी स्थिति अच्छी न हो तो वैवाहिक जीवन की सुख-शांति खत्म हो जाती है। इस साल शुक्र तारा अस्त है, इसलिए वसंत पंचमी पर विवाह का मुहूर्त नहीं है। ब्रह्मा जी ने प्रकट किया था देवी सरस्वती को वसंत पंचमी पर सरसों के खेतों में दिखाई देने लगते हैं पीले फूल वसंत पंचमी का सीधा संबंध मौसम से भी है। अभी शीत ऋतु के खत्म होने का और वसंत ऋतु की शुरुआत का समय है। इस समय सरसों के खेत में पीले फूल दिखाई देने लगते हैं। इन्हीं पीले फूलों की वजह से वसंत पंचमी पर पीले रंग का इतना अधिक महत्व है। ये पर्व किसानों के लिए महापर्व की तरह है। इस पर्व के बाद से ही गेहूं, चना की फसल पकना शुरू हो जाती है। आज करें नई विद्या सीखने की शुरुआत देवी सरस्वती विद्या, बुद्धि, संगीत और कला की देवी हैं। इस दिन विद्यार्थी, कलाकार, लेखक, संत-महात्मा और विद्वान लोग सरस्वती का विशेष पूजन करते हैं। नई विद्या सीखने की शुरुआत भी इस दिन से कर सकते हैं। मान्यता है ऐसा करने से विद्या में जल्दी पारंगत होते हैं और यह विद्या जीवनभर साथ देती है। पीला रंग है उत्साह का प्रतीक वसंत पंचमी पर पीले रंग का विशेष महत्व है। माना जाता है कि यह रंग सरस्वती को विशेष प्रिय है। इस समय सरसों के पीले फूल खिल जाते हैं, जिनकी वजह से खेत पीले दिखाई देने लगते हैं। पीला रंग उत्साह, उत्सव और आशावादिता का प्रतीक माना जाता है। वसंत पंचमी पर पीले कपड़े पहनकर नए काम की शुरुआत करने का संदेश ये है कि हमें हर स्थिति में उत्साह और आशावादिता बनाए रखनी चाहिए, तभी सफलता मिलती है। कलर साइकोलॉजी के मुताबिक, पीला रंग दिमाग को नई बातें सीखने के लिए प्रेरित करता है। वसंत पंचमी पढ़ाई या नया सीखने के लिए खास क्यों है? वसंत पंचमी का धार्मिक के साथ ही वैज्ञानिक महत्व भी है। ये पर्व नया सीखने और शिक्षा की शुरुआत करने के लिए शुभ माना जाता है, क्योंकि ये ऋतु परिवर्तन का समय है। अभी शीत ऋतु खत्म हो रही है और कुछ दिनों के बाद वसंत ऋतु शुरू होगी। शीत ऋतु और वसंत ऋतु का संधिकाल हर काम की शुरुआत के लिए अनुकूल है। जब मौसम अनुकूल होता है तो हमारा दिमाग और शरीर ज्यादा सक्रिय रहते हैं। हमारी कार्यक्षमता बढ़ जाती है। नई बातें सीखने की क्षमता भी बढ़ती है, मन एकाग्र रहता है और इस समय पढ़ा हुआ लंबे समय तक याद रहता है। विद्या से स्वभाव में आती है विनम्रता देवी सरस्वती विद्या की देवी है और विद्या से हमारे स्वभाव में विनम्रता आती है। विनम्रता से ही सभी तरह की सुख-सुविधा और धन-संपत्ति, मान-सम्मान प्राप्त किया जा सकता है। जिस व्यक्ति पर देवी सरस्वती प्रसन्न होती हैं, उसे महालक्ष्मी की भी कृपा मिल जाती है। महालक्ष्मी के साथ ही देवी सरस्वती की पूजा करने की परंपरा है, क्योंकि सरस्वती के बिना लक्ष्मी की कृपा नहीं मिल सकती है। विद्या का उपयोग करके सही रास्ते से जो धन कमाया जाता है, वह सुख-शांति और समृद्धि प्रदान करता है। .