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Plant For Man Problems: अक्सर घरों के आसपास एक पौधा दिखता है जिसके गुणों के बारे में ना जानने के कारण लोग उस पर ध्यान नहीं देते. आयुर्वेदाचार्य का कहना है कि इसके इस्तेमाल से पुरुषों में नपुंसकता खत्म होती है और 30 दिनों में असर दिखने लगता है.
पश्चिम चम्पारण. प्रकृति में एक ऐसा पौधा भी पाया जाता है, जिसका उपयोग आयुर्वेद में शक्तिवर्धक दवाइयों के रूप में खूब किया जाता है. मज़े की बात यह है कि स्वास्थ्य से जुड़े अनगिनत दुर्लभ गुणों से भरपूर होने के बावजूद भी ग्रामीण क्षेत्रों में इसे घर के आसपास बड़ी आसानी से देखा जा सकता है. पीले फूलों से लदे और नुकीली कांटेदार बनावट की वजह से इस पौधे को पहचानना बहुत आसान होता है. शरीर की दुर्बलता सहित अन्य कई गंभीर समस्याओं को दूर करने वाले इस पौधे का नाम कुछ और नहीं, बल्कि सत्यानाशी है.
नपुंसकता और शारीरिक कमजोरी जैसी समस्याओं का काल
करीब 45 वर्षों से आयुर्वेदाचार्य के रूप में कार्यरत और वर्तमान में पतंजलि में सेवा दे रहे आयुर्वेदाचार्य भुवनेश पांडे बताते हैं कि नपुंसकता, शरीर की दुर्बलता और यौन से जुड़ी किसी भी समस्या के इलाज के लिए सत्यानाशी वरदान के समान है. इसका अर्क निकालकर सही मात्रा में सेवन करने से पुरुषों में नपुंसकता और शारीरिक कमजोरी जैसी समस्याएं खत्म होती हैं. इसके लिए इसके पत्तों और तनों से रस निकाला जाता है और उसे रोजाना सुबह खाली पेट लिया जाता है.
यौन समस्याओं के लिए नेचुरल टॉनिक
आयुर्वेदाचार्य के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति लगातार एक महीने तक सत्यानाशी के अर्क का सेवन करता है, तो यौन क्षमता में अच्छा सुधार देखने को मिलता है और शरीर की कमजोरी दूर हो जाती है. अलग-अलग प्रकार की यौन समस्याओं में इस पौधे को नेचुरल टॉनिक के रूप में उपयोग किया जाता है.
बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करता है
करीब तीन दशक से वैद्य के रूप में कार्य कर रहे जिले के वैद्याचार्य वासुदेव बताते हैं कि सत्यानाशी की पत्तियों या तनों से सुनहरे रंग का तरल निकलता है, जिसका उपयोग त्वचा पर होने वाली दाद, खुजली, फोड़े-फुंसी और घावों में राहत के लिए कारगर माना जाता है. इसके औषधीय गुण संक्रमण को कम करने में मदद करते हैं.
सत्यानाशी का अर्क त्वचा को जवान रखने और बढ़ती उम्र के असर को हल्का करने में सहायक होता है. हालांकि इसका सेवन आयुर्वेदाचार्य की देखरेख में ही करें और कोई गंभीर मेडिकल समस्या हो तो पहले अपने डॉक्टर से बात कर लें.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.