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हल्दी, कॉफी और एलोवेरा से बनी यह डाई पूरी तरह रसायन-मुक्त होती है और बालों को प्राकृतिक पोषण देती है। यह डाई सफेद बालों को काला करने के साथ-साथ बालों को मुलायम और मजबूत भी बनाती है। इस डाई को बनाने की प्रक्रिया बहुत सरल है, जिसमें हल्दी को तवे पर भूनकर, उसमें कॉफी पाउडर, एलोवेरा जेल और नारियल तेल मिलाया जाता है। यह प्राकृतिक मिश्रण बालों को जड़ों से मजबूत करने के साथ-साथ सुंदरता भी बनाए रखता है.
नागौर ही नहीं बल्कि प्रदेश के हर ग्रामीण क्षेत्रों में हल्दी, कॉफी और एलोवेरा से बनी देसी डाई लोकप्रिय है. यह डाई पूरी तरह रसायन-मुक्त है और बालों को प्राकृतिक पोषण देती है. स्थानीय लोग इसे न सिर्फ सफेद बालों को काला करने के लिए बल्कि मुलायम और मजबूत बनाने के लिए भी उपयोग करते हैं.

इस प्राकृतिक डाई का उपयोग करने वाली शारदा कुमारी ने बताया कि इस देसी डाई को बनाने की प्रक्रिया बेहद आसान है. इसमें रसोई की साधारण सामग्री का उपयोग होता है, यह डाई पीढ़ियों से इस्तेमाल हो रही पारंपरिक विधि का हिस्सा है और आज भी लोगों द्वारा इसका उपयोग किया जा रहा है.

शारदा कुमारी ने बताया कि डाई बनाने की विधि में सबसे पहले लोहे के तवे पर हल्दी को धीमी आंच पर भूना जाता है. फिर इसमें कॉफी पाउडर मिलाया जाता है, इसके बाद जब मिश्रण गहरे काले रंग का हो जाए, तब इसमें एलोवेरा जेल और नारियल तेल डालकर प्राकृतिक डाई तैयार कर ली जाती है.

उन्होंने बताया कि एलोवेरा और नारियल तेल का मिश्रण बालों को पोषण देता है. हल्दी और कॉफी से बने इस पेस्ट को जब बालों पर लगाया जाता है, तो यह न सिर्फ सफेद बालों को ढकता है, बल्कि बालों को जड़ों से मजबूत भी करता है. ग्रामीण क्षेत्रों में यह तरीका अब फिर से लोकप्रिय हो रहा है.

रासायनिक उत्पादों के बढ़ते दुष्प्रभावों से परेशान लोग अब प्राकृतिक उपायों की ओर लौट रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इस पारंपरिक नुस्खे को फिर से अपना रहे हैं. देसी डाई का यह प्रयोग बालों की सुंदरता और सेहत दोनों को बरकरार रखने का सस्ता नुस्खा बनता जा रहा है.

शारदा कुमारी ने बताया कि यह देसी डाई नुस्खा आधुनिक रसायनयुक्त उत्पादों का बेहतर विकल्प है. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व बालों की जड़ों को पोषण देते हैं और लंबे समय तक काला रंग बनाए रखते हैं. स्थानीय लोग इसे आज भी कारगर मानते हैं और अपने परिवारों में नियमित रूप से उपयोग करते हैं. हल्दी, कॉफी और एलोवेरा से बनी यह डाई सिर्फ सुंदरता का साधन नहीं, बल्कि परंपरा से जुड़ा एक विश्वास भी है. ग्रामीण इलाकों में यह नुस्खा पीढ़ियों से चला आ रहा है और अब शहरी लोग भी इसे अपनाने लगे हैं.
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