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Tips and Tricks: दीवाल लगातार भीगे रहने के कराण इस पर काई पड़ जाती है. इसका दाग काफी जिद्दी होने के कारण लंबे समय रह जाता है और पेंट करने के बाद भी नहीं जाता है. ऐसे में कुछ उपाय करके आप इस समस्या से निजात पा सकते हैं.
जब दीवार लंबे समय तक नमी के संपर्क में रहती है या उस पर पानी रिसता है, तो फफूंदी वहां पनपने लगती हैं. यही धीरे-धीरे काई के रूप में फैल जाती हैं. बाहर की दीवारों से शुरू होकर यह दीवार के अंदर तक पहुंच जाता है. ये दीवार को कमजोर भी करता है और ये दीवार को भद्दा भी बना देता है.

काई का असर सिर्फ दीवार की ऊपरी सतह तक सीमित नहीं रहता. यह दीवार की परतों में गहराई तक चला जाता है. जब उस पर पेंट किया जाता है, तो दाग कुछ समय के लिए छिप जाते हैं लेकिन नमी दोबारा आने पर फिर उभर आते हैं. यही वजह है कि कई बार नया पेंट लगाने के बाद भी दीवार पर पुराने दाग दिखते ही रहता है.

अगर दीवार पर हल्की काई जमी हो, तो सबसे पहले सूखी ब्रश से उसे हटा दें. इसके बाद पानी में सिरका या ब्लीच मिलाकर दीवार को साफ करें. एक लीटर पानी में आधा कप सिरका या दो चम्मच ब्लीच डालें और ब्रश से धीरे-धीरे रगड़ें. यह तरीका काई को जड़ से खत्म कर देता है. साफ करने के बाद दीवार को पूरी तरह सूखने दें ताकि दोबारा नमी न बने.

अगर दीवार पर काई का दाग गहरा है, तो पेंट करने से पहले आप उसपर एंटी-फंगल प्राइमर का इस्तेमाल कर सकते हैं. यह प्राइमर दीवार की गहराई तक जाकर फफूंदी और काई को खत्म करता है. उसके बाद ही रंग करें. कुछ लोग सीधे पेंट कर देते हैं, जिससे दाग दोबारा उभर आते हैं. बाजार में ऐसे पेंट भी उपलब्ध हैं जिनमें एंटी-मॉस और एंटी-मॉइश्चर फॉर्मूला होता है.

दीवारों को हमेशा सूखा रखने की कोशिश करें. अगर पानी का रिसाव कहीं से हो रहा है, तो तुरंत मरम्मत करवाएं. घर में वेंटिलेशन अच्छा रखें ताकि हवा और धूप दीवारों तक पहुंचे. साथ ही, हर साल मानसून से पहले दीवारों पर वॉटरप्रूफ कोटिंग करवाना फायदेमंद होता है.
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