Tips and Tricks: किचन वेस्ट से बनाएं स्वस्थ और हरा-भरा गार्डन, अपनाएं यह ट्रिक्स

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Tips and Tricks: किचन वेस्ट को सही तरीके से इस्तेमाल करके घर पर जैविक खाद बनाई जा सकती है जिससे पौधों को प्राकृतिक पोषण मिलता है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है.

हम रोजमर्रा की जिंदगी में किचन के कई ऐसे कचरे को नजरअंदाज कर देते हैं जो वास्तव में हमारे बगीचे के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकते हैं. केला, संतरा, आलू, प्याज, टमाटर जैसे फलों और सब्जियों के छिलकों में भरपूर पोषक तत्व होते हैं जिन्हें यदि सूखा कर पाउडर बनाया जाए या सीधे मिट्टी में दबाया जाए तो वे जैविक खाद का काम करते हैं और पौधों को जरूरी पोषण प्रदान करते हैं.

इसे ठंडा करके पोधों में डालना चाहिए

कुछ सरल तरीके अपनाकर हम किचन से निकलने वाले कचरे को जैविक खाद में बदल सकते हैं. जैसे चावल या दाल उबालने के बाद बचा पानी जिसमें स्टार्च और मिनरल्स होते हैं पौधों की मिट्टी के लिए उपयुक्त होता है. इसे ठंडा करने के बाद पौधों में डालना फायदेमंद रहता है.

यह पोधों में कीट लगने से बचाता है

प्याज और लहसुन के छिलकों को पानी में भिगोकर छान लें और इस पानी को पौधों पर छिड़कना चाहिए. यह एक प्राकृतिक कीटनाशक की तरह काम करता है जो कीड़े-मकोड़ों को दूर बिना किसी नुकसान के दूर भगाता है. इसके साथ ही गीली चायपत्ती भी पौधों के लिए जैविक खाद का स्रोत है जो मिट्टी की गुणवत्ता और पौधों की पत्तियों को स्वस्थ बनाता है.

इसे धोकर सुखाना चाहिए और फिर इसका पाउण्डर बनाकर इस्तेमाल करना चाहिए

अंडे के छिलकों में कैल्शियम होता है जो पौधों की जड़ों को मजबूत करता है. इन्हें धोकर सुखाकर पाउडर बना लें और इसे मिट्टी में मिलाएं. इससे मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि होती है और कीटों से भी पौधों की रक्षा होती है.

यह खाद पूरी तरह प्राकृतिक होती है

किचन वेस्ट से बनी खाद मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है जिससे पौधे बेहतर विकास करते हैं और जमीन की नमी बरकरार रहती है. अन्य पारंपरिक रासायनिक खाद की तुलना में यह खाद पूरी तरह प्राकृतिक होती है और इससे पौधों में कोई भी हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता है

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