Tips Ad Tricks: फेंकने से पहले संभाल लें नारियल का छिलका! बनाएं सस्ता और इको-फ्रेंडली बर्तन स्क्रबर

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Eco Friendly Kitchen Cleaning Tips: रसोई में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक स्क्रबर जल्दी खराब हो जाते हैं और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाते हैं. ऐसे में नारियल का छिलका एक बेहतरीन और इको-फ्रेंडली विकल्प साबित हो सकता है. नारियल के कठोर रेशेदार छिलके को छोटे टुकड़ों में काटकर या आकार देकर आसानी से बर्तन साफ करने के लिए उपयोग किया जा सकता है. यह जिद्दी दाग हटाने में कारगर होता है और लंबे समय तक चलता है.

भीलवाड़ा- रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाला बर्तन धोने का स्क्रबर आमतौर पर प्लास्टिक या सिंथेटिक फाइबर से बना होता है, जो कुछ समय बाद खराब होकर कचरे में बदल जाता है. ऐसे में अगर घर पर ही नारियल के छिलके से स्क्रबर तैयार किया जाए तो यह न केवल सस्ता बल्कि पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित विकल्प साबित हो सकता है. खास बात यह है कि यह पूरी तरह प्राकृतिक होता है और इसे बनाने में किसी रसायन की जरूरत नहीं पड़ती. घर में इस्तेमाल होने वाले सूखे नारियल के छिलके को फेंकने की बजाय उपयोग में लाकर हम कचरा भी कम कर सकते हैं और एक टिकाऊ घरेलू उत्पाद भी तैयार कर सकते हैं.

नारियल के छिलके से स्क्रबर बनाने की प्रक्रिया बेहद आसान है. सबसे पहले सूखे नारियल के कठोर छिलके को अलग कर लें और उसके रेशेदार हिस्से को निकाल लें. इन रेशों को अच्छी तरह पानी से धोकर धूप में सुखा लें ताकि इनमें नमी न रहे. इसके बाद इन रेशों को गोल या हथेली के आकार में मोड़कर धागे या पतली सूती रस्सी से कसकर बांध दें. चाहें तो इसे सिलाई कर मजबूत आकार भी दिया जा सकता है. तैयार स्क्रबर को दोबारा धूप में सुखा लें ताकि यह पूरी तरह सख्त और उपयोग के लिए तैयार हो जाए.

इस स्क्रबर का इस्तेमाल स्टील, पीतल, तांबा और लोहे के बर्तनों को साफ करने में किया जा सकता है. नारियल के रेशे मजबूत होते हैं, जिससे जमी हुई चिकनाई और जले हुए दाग आसानी से हट जाते हैं. साथ ही यह बर्तनों की सतह को नुकसान नहीं पहुंचाता, जैसा कि कई बार कठोर प्लास्टिक स्क्रबर कर देते हैं. गैस चूल्हे की जाली, कढ़ाई और तवे को साफ करने में भी यह बेहद कारगर साबित होता है. उपयोग के बाद इसे धोकर धूप में सुखा देने से यह लंबे समय तक चल सकता है और इसमें बदबू भी नहीं आती.

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अगर बाजार में मिलने वाले स्क्रबर की बात करें तो एक प्लास्टिक स्क्रबर की कीमत 15 से 30 रुपये तक होती है और वह कुछ ही हफ्तों में खराब हो जाता है. वहीं नारियल का छिलका अक्सर घर में मुफ्त में उपलब्ध होता है या बाजार में बेहद कम कीमत पर मिल जाता है. एक नारियल से दो से तीन स्क्रबर तैयार किए जा सकते हैं, जो कई महीनों तक चल सकते हैं. इस तरह देखा जाए तो यह बाजार के उत्पाद की तुलना में काफी सस्ता और किफायती है.

एनवायरनमेंट के हिसाब से देखे तो नारियल के छिलके का स्क्रबर बेहतर विकल्प है. प्लास्टिक स्क्रबर माइक्रोप्लास्टिक छोड़ते हैं, जो पानी के साथ बहकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं. इसके विपरीत नारियल का रेशा पूरी तरह जैविक और बायोडिग्रेडेबल होता है. इस्तेमाल के बाद इसे मिट्टी में दबा दिया जाए तो यह प्राकृतिक रूप से गलकर खाद में बदल सकता है. इससे कचरे की मात्रा कम होती है और प्लास्टिक प्रदूषण पर भी रोक लगती है.

आज जब लोग इको फ्रेंडली और टिकाऊ जीवनशैली की ओर बढ़ रहे हैं, तब नारियल के छिलके से बना स्क्रबर एक सरल और प्रभावी विकल्प बनकर सामने आया है. यह घरेलू जुगाड़ न केवल पारंपरिक ज्ञान को बढ़ावा देता है, बल्कि आत्मनिर्भरता की भावना को भी मजबूत करता है.  कम खर्च, बेहतर सफाई और पर्यावरण सुरक्षा इन तीनों फायदे के कारण नारियल स्क्रबर आधुनिक रसोई के लिए एक समझदारी भरा विकल्प साबित हो रहा है.

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