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Gaming Addiction Dangers: ऑनलाइन गेम की लत ने गाजियाबाद में 3 सगी बहनों की जान ले ली. गाजियाबाद में 12, 14 और 16 साल की तीन बहनों ने 9वीं मंजिल से छलांग लगा दी, जिससे उनकी मौत हो गई. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो ऑनलाइन गेमिंग और वर्चुअल टास्क बच्चों की मानसिक सेहत पर बहुत गहरा असर डाल सकते हैं. इन गेम्स की लत बच्चों के सोचने-समझने की क्षमता खत्म कर देती है और वे जानलेवा कदम उठाने से भी नहीं कतराते हैं.
ऑनलाइन गेमिंग की लत बच्चों की मेंटल हेल्थ बिगाड़ देती है.
Ghaziabad Sisters Death News: आजकल ऑनलाइन गेमिंग का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है. बड़ी संख्या में बच्चे और टीनएजर्स रोज घंटों ऑनलाइन गेम खेलते हैं, जिससे धीरे-धीरे उन्हें इसकी लत लग जाती है. इन गेम्स की लत जानलेवा भी हो सकती है. यूपी के गाजियाबाद से हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां 3 सगी बहनों ने 9वीं मंजिल से छलांग लगाकर जान दे दी. तीनों बहनों को कोरियन लवर टास्क बेस्ड गेम खेलने की लत लग गई थी. पैरेंट्स ने जब उन्हें डांटा, तो उन्होंने सुसाइड कर ली. तीनों लड़कियों को ऑनलाइन गेम की आदत इस कदर लग चुकी थी कि वे नहाने, खाने, स्कूल जाने और सोने जैसे सभी काम एक साथ किया करती थीं. इसी तरह तीनों ने एक साथ कूदकर आत्महत्या भी कर ली. मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो ऑनलाइन गेमिंग की लत बच्चों की मानसिक सेहत को खराब कर सकती है और वे खौफनाक कदम भी उठा सकते हैं.
दिल्ली के जाने-माने साइकेट्रिस्ट दीपक रहेजा ने News18 को बताया कि आज के बच्चे और टीनएजर्स वर्चुअल दुनिया में ज्यादा समय बिता रहे हैं. कई बार ऑनलाइन गेम्स और चैलेंज उन्हें मानसिक दबाव, डर और अकेलेपन की भावना की ओर धकेल देते हैं. जब बच्चे अपनी बात किसी से शेयर नहीं कर पाते, तो वे अंदर ही अंदर तनाव झेलते रहते हैं. यही स्थिति सबसे खतरनाक बन जाती है. गाजियाबाद में जिस तरह तीन बहनों ने अपनी जान गंवाई, उससे यह साफ संकेत मिलता है कि बच्चों पर मानसिक और भावनात्मक दबाव कितना गहरा हो सकता है. ऑनलाइन गेमिंग के चक्कर में जान गंवाने के कई मामले सामने आ चुके हैं.
एक्सपर्ट के मुताबिक ऐसे मामलों के पीछे कई कारण हो सकते हैं. बच्चों को भावनात्मक सहारा न मिलना, माता-पिता और बच्चों के बीच बातचीत की कमी, जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम और ऑनलाइन कंटेंट का गलत या असंतुलित प्रभाव. अगर कोई बच्चा ऑनलाइन गेम के चक्कर में फंस जाए, तो उसे वक्त रहते उससे बाहर निकालना बहुत जरूरी होता है. ऐसे में पैरेंट्स को सलाह दी जाती है कि वे अपने बच्चों से खुलकर बात करें, उनके ऑनलाइन व्यवहार पर नजर रखें और उन्हें यह भरोसा दिलाएं कि किसी भी परेशानी में वे अकेले नहीं हैं. बच्चा परेशान दिखे, तो उसके साथ प्यार से बातचीत करें.
मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कई बार बच्चे किसी ऑनलाइन टास्क या चैलेंज को सच मान लेते हैं और उसके परिणामों को समझ नहीं पाते हैं. इसके चलते खौफनाक कदम उठा लेते हैं. तकनीक के इस दौर में जागरुकता केवल बच्चों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज की है. अगर कोई बच्चा या किशोर मानसिक तनाव, डर या असामान्य व्यवहार के संकेत दिखा रहा है, तो उसे नजरअंदाज न करें. समय रहते काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद लेना बेहद जरूरी है. सही समय पर दिया गया सहारा न सिर्फ एक जीवन, बल्कि पूरे परिवार को टूटने से बचा सकता है.
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अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें