एमपी में पाकिस्तानी ड्रोन से RDX-सायनाइड बम रखने की धमकियां: पुलिस अफसरों, अस्पतालों को उड़ाने वाले 12 ई-मेल, क्यों पता नहीं कर पा रही पुलिस – Madhya Pradesh News


19 फरवरी 2026। भोपाल के पीपुल्स कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस के डीन अपने दफ्तर में बैठे हुए थे। सुबह के करीब साढ़े नौ बजे थे। स्टूडेंट्स की काउंसलिंग चल रही थी। लेक्चर शुरू होने वाले थे। पांच मंजिला बिल्डिंग में 1 हजार छात्र और फैकल्टी समेत पूरा स्टाफ मौजूद था। करीब 9.50 मिनट पर डीन को एक मेल आया। इस मेल में जो लिखा था उसे पढ़कर डीन के होश उड़ गए। ईमेल में कॉलेज को साइनाइड पॉइजन बम से उड़ाने की धमकी दी थी। इसके बाद कॉलेज में अफरातफरी मची और पुलिस ने 11 बजे तक पूरा कैंपस खाली करा लिया। मार्च के शुरुआती 20 दिनों में ही एम्स से लेकर जेके हॉस्पिटल, जिला न्यायालय और कई बड़े सरकारी दफ्तरों को बम से उड़ाने की धमकियां मिली हैं। एक के बाद एक धमकी भरे ईमेल ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। इनकी वजह से अस्पतालों के मरीज परेशान हुए, अदालतों का काम रुका और दफ्तरों में घंटों तक दहशत का माहौल बना रहा। हालांकि, राहत की बात यह है कि अब तक मिलीं सभी धमकियां कोरी अफवाह साबित हुई हैं। हालांकि, इन घटनाओं ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं आखिर यह धमकियां दे कौन रहा है? इसके पीछे उसका मकसद क्या है? क्या यह किसी एक व्यक्ति का काम है या किसी संगठित समूह का? और सबसे बड़ा सवाल, तमाम कोशिशों के बावजूद पुलिस और साइबर एजेंसियां इस ‘डिजिटल भूत’ को पकड़ने में नाकाम क्यों हो रही हैं? भास्कर ने इन सवालों का जवाब तलाशने के लिए एक्सपर्ट और अफसरों से बात की.. पढ़िए रिपोर्ट… पांच केस से समझिए दहशत के वो चंद घंटे 2 मार्च: एम्स और पीपुल्स यूनिवर्सिटी में साइनाइड बम का खौफ 2 मार्च को करीब 3 बजे एम्स और पीपुल्स यूनिवर्सिटी की आधिकारिक ईमेल आईडी पर एक धमकी भरा संदेश आया। संदेश भेजने वाले ने लिखा था, ‘आपके कॉलेज में साइनाइड पॉइजन वाले बम रखे गए हैं, जो दोपहर 12:15 बजे ब्लास्ट करेंगे। सुबह 11 बजे तक डॉक्टरों और स्टूडेंट्स को निकाल लें। अल्लाह हू अकबर। इस ईमेल से हड़कंप मचा। आनन-फानन में एक्शन लेते हुए क्लासरूम, हॉस्टल और यहां तक कि अस्पताल के वार्ड भी खाली करा दिए गए। डॉक्टर अपना इलाज बीच में छोड़कर बाहर आ गए, और कई गंभीर मरीज अपने परिजनों के साथ अस्पताल से बाहर निकलने को मजबूर हुए। लगभग चार घंटों तक बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड ने चप्पे-चप्पे की तलाशी ली। मगर, कुछ नहीं मिला। 17 मार्च: नाप-तौल विभाग में RDX की धमकी अभी एम्स की घटना को कुछ ही दिन बीते थे कि 17 मार्च को भोपाल के नाप-तौल विभाग के दफ्तर में एक और धमकी भरा ईमेल पहुंचा। उस वक्त दफ्तर में रोज की तरह सामान्य कामकाज चल रहा था। ईमेल में लिखा था, ‘पाकिस्तानी ड्रोन का इस्तेमाल कर 4 RDX बम रखे गए हैं, जो दो बजे फटेंगे। दफ्तर में धमाका… ताकत का जीता-जागता सबूत होगा।’ सूचना मिलते ही पूरा माहौल बदल गया। दफ्तर को तुरंत खाली कराया गया और कर्मचारी काम छोड़कर बाहर खड़े हो गए। बम निरोधक दस्ते ने फिर एक बार मोर्चा संभाला और घंटों की तलाशी के बाद इसे भी एक अफवाह करार दिया। 18 मार्च: एक दिन, कई संस्थानों पर निशाना 18 मार्च का दिन भोपाल के लिए सबसे भारी साबित हुआ। इस दिन धमकियों का सिलसिला अचानक तेज हो गया। जेके हॉस्पिटल, एलएन मेडिकल कॉलेज, जिला न्यायालय, अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय, पासपोर्ट कार्यालय और वाणिज्यिक कर विभाग को लगभग एक जैसे धमकी भरे ईमेल मिले। हर जगह एक जैसा ही दृश्य था-लोग घबराहट में बाहर निकल रहे थे, पुलिस और बम स्क्वॉड की गाड़ियां सायरन बजाती हुई पहुंच रही थीं और घंटों तक तलाशी अभियान चल रहा था। इस एक दिन की कार्रवाई ने शहर के कामकाज को लगभग ठप कर दिया। इसी दिन, इंदौर में भी संभागायुक्त कार्यालय और श्रम आयुक्त कार्यालय को ऐसी ही धमकी मिली। 20 मार्च: सतना जिला न्यायालय में 15 बमों की धमकी
यह सिलसिला सतना तक भी जा पहुंचा, जहां 20 मार्च को जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी मिली। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के कार्यालय की आधिकारिक आईडी पर आए ईमेल में दोपहर 1 बजे 15 बम फटने की चेतावनी दी गई थी। गनीमत रही कि उस दिन अवकाश होने के कारण परिसर में ज्यादा लोग नहीं थे। जांच के बाद यहां भी कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। धमकियों के पीछे का मकसद: शरारत या साजिश? इन सभी ईमेल में एक खास पैटर्न देखने को मिला। इनमें RDX, सायनाइड, जहरीली गैस और पाकिस्तानी ड्रोन जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर दहशत फैलाने की कोशिश की गई। कुछ ईमेल में इस्लामी नमाज और जौहर की नमाज के बाद ब्लास्ट की बात लिखी गई, तो किसी में तमिलनाडु की राजनीति का बदला लेने के लिए भोपाल में बम रखने का अजीबोगरीब तर्क दिया गया। इस मामले पर भोपाल के पुलिस कमिश्नर संजय कुमार का कहना है, ये सभी धमकियां भोपाल के संस्थानों को मिली हैं, जिससे लगता है कि यह किसी स्थानीय शरारती तत्व का काम हो सकता है। इसके पीछे कोई स्पष्ट संदेश या मकसद सामने नहीं आया है। धमकियों में एक जैसा पैटर्न और भोपाल के संस्थानों को निशाना बनाना यह संकेत देता है कि यह किसी एक ही व्यक्ति या समूह की हरकत हो सकती है। एक्सपर्ट बोले-ईमेल ट्रेस करना संभव मगर जटिल प्रोसेस वीपीएन जैसी तकनीक को ट्रेस क्यों नहीं किया जा सकता साइबर लॉ एक्सपर्ट यशदीप चतुर्वेदी इस तकनीकी चुनौती को और विस्तार से समझाते हैं। उनके मुताबिक, धमकी भरे ईमेल को ट्रेस करना संभव है, लेकिन यह एक जटिल प्रक्रिया है। हर ईमेल के ‘हेडर’ में यह जानकारी होती है कि वह किन-किन सर्वर से होकर आया है। अगर इसका सही विश्लेषण किया जाए, तो स्रोत तक पहुंचा जा सकता है। वह आगे बताते हैं, अपराधी अक्सर VPN या प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनका IP एड्रेस किसी दूसरे देश का दिखाई देता है। ऐसे में उस देश से जानकारी हासिल करने के लिए हमें अंतरराष्ट्रीय संधि (MLAT) का सहारा लेना पड़ता है, जिसमें काफी समय लगता है। हालांकि, हर डिवाइस की एक यूनिक पहचान होती है, जैसे डिवाइस आईडी या MAC एड्रेस, जिसे पूरी तरह छिपाया नहीं जा सकता। अगर पुलिस IP एड्रेस के साथ-साथ इन पहचानों को ट्रैक करे, तो असली अपराधी तक पहुंचना मुमकिन है। धमकियों का असर, लोगों में डर और संसाधनों की बर्बादी हालांकि, रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी एनके त्रिपाठी इसे हल्के में लेने से इनकार करते हैं। उनका कहना है, कई बार ऐसे खतरे गंभीर भी हो सकते हैं और इनका संबंध आतंकवादी गतिविधियों से भी हो सकता है। इसलिए ऐसी धमकियों की तह तक जाना बेहद जरूरी है। इसे केवल शरारत मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वे कहते हैं कि भोपाल और इंदौर में सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों को ही नहीं, बल्कि ये धमकियां आम लोगों, कामकाज भी प्रभावित कर रही हैं। इनका असर भी व्यापक है। इससे डर, अव्यवस्था और संसाधनों की बर्बादी हो रही है। .

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *