हजारों महिलाएं जिन्हें देहशोषण के लिए जापानी सेना ने किया भर्ती, कही जाती थीं कंफर्ट वूमन

दूसरे वर्ल्ड वार में जापान के सैनिकों ने इतना गंदा काम किया था कि जब इसकी हकीकत खुलनी शुरू हुई तो लोग दंग रह गए कि जापान सुनियोजित तरीके से मासूम महिलाओं के खिलाफ ऐसा कैसे कर सकती है. युद्ध के दौरान जापान की सेना ने हजारों विदेशी महिलाओं की भर्ती केवल इसलिए की थी कि उसके सैनिक इन महिलाओं के साथ आनंद ले सकें. आमतौर पर इन स्त्रियों का जापानी सैनिक जमकर देहशोषण करते थे. उन्हें चुपचाप ये सब बर्दाश्त करना होता था. इन्हें जापानी सेना कंफर्ट वूमन कहा करती थी.

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पूरी दुनिया में जहां भी जापानी सेना ने अपनी छावनियां बनाईं, वहां उसने सैकड़ों हजारों की संख्या में कंफर्ट वूमन की भर्तियां भी की. जब सेकेंड वर्ल्ड वार के कई सालों बाद इसका पता चलना शुरू हुआ तो तहलका मच गया. जब किसी जापानी सैनिक को इनसे प्यार हो जाता था तो और बुरी बात होती थी, क्योंकि तब दोनों को बहुत बड़ी सजा मिलती थी.

कहा जा सकता है कंफर्ट वूमन दूसरे विश्व युद्ध का एक काला अध्याय था. ‘कंफर्ट वूमन’ का उपयोग जापानी सेना द्वारा यौन दासता के रूप में किया गया था. जापान की सेना कई देशों से महिलाओं को जबरदस्त लाकर उनकी भर्ती करते थे. उनका काम केवल यही था कि वो जापान के सैनिकों का मनोरंजन करे और उनकी यौन इच्छाओं का पालन करें.

सेक्स स्लेव के तौर पर इस्तेमाल

कंफर्ट वूमन दरअसल जापानी सेना की यौन दासता के लिए इस्तेमाल होती थीं. इस काले अध्याय की शुरुआत 1932 में चीन-जापान युद्ध के दौरान हुई, जब जापानी सेना ने सैनिकों की “जरूरतों” को पूरा करने के लिए कंफर्ट स्टेशन बनाए. धीरे-धीरे, युद्ध के बढ़ने के साथ यह प्रणाली अन्य देशों में भी फैल गई.

कई देशों की महिलाओं की भर्ती

जापान ने युद्ध के दौरान कोरिया, चीन, फिलीपींस, इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम और अन्य प्रशांत द्वीपों से हजारों महिलाओं को बलपूर्वक भर्ती किया. अधिकतर महिलाएं गरीब या इसी तरह के समुदायों से थीं, जिन्हें झूठे रोजगार के वादों से धोखा दिया गया या सीधे अपहरण कर लिया गया.

जापानी सेना कई एशियाई देशों से जबरदस्ती लड़कियों और महिलाओं को ले जाते थे, जिसमें चीनी और मलय लड़कियां  ‘कम्फर्ट गर्ल्स’ के रूप में काम करने के लिए ज्यादा ले जाई जाती थीं. (wiki commons)

एक दिन में कई से संबंध बनाना पड़ता था

कंफर्ट स्टेशनों में महिलाओं के साथ अत्यंत क्रूरता से व्यवहार किया जाता था. इन महिलाओं को प्रतिदिन कई सैनिकों के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता था. वो किसी भी प्रकार की स्वतंत्रता से वंचित थीं.
– इनमें कई महिलाओं को प्रताड़ित किया जाता था, पीटा जाता था और कई बार मारा भी जाता था
– असुरक्षित संबंधों के कारण कई महिलाएं यौन संक्रामक रोगों की शिकार हो गईं और गर्भवती हुईं. कई बार उन्हें जबरन गर्भपात के लिए मजबूर किया गया.
– जो महिलाएं भागने की कोशिश करती थीं, उन्हें गंभीर दंड दिया जाता था, कभी-कभी मार दिया जाता था.

कंफर्ट स्टेशन कहां कहां

जापानी सेना ने अपने कब्जे वाले कई क्षेत्रों में कंफर्ट स्टेशन स्थापित किए थे. इनमें शामिल थे:
चीन: नानजिंग, बीजिंग, शंघाई सहित कई बड़े शहरों में।
कोरिया: जापानी शासन के दौरान कोरियाई महिलाओं को बड़ी संख्या में भर्ती किया गया
फिलीपींस: यहां जापानी कब्जे के दौरान कई महिलाओं को यौन दासता में धकेल दिया गया
बर्मा (म्यांमार), थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, मलय (मलेशिया) में भी कंफर्ट स्टेशन मौजूद थे.
प्रशांत द्वीप जैसे ताइवान, गुआम, साइपन में भी जापानी सेना के लिए ये स्टेशन बनाए गए थे.

जापानी सेना ने अपने कब्जे वाले कई क्षेत्रों में कंफर्ट स्टेशन स्थापित किए थे (image generated by Meta AI)

फिर क्या हुआ इन महिलाओं का

द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद, जापान ने कंफर्ट वूमन प्रणाली को समाप्त कर दिया. दशकों तक इसे लेकर चुप्पी बनाए रखी. युद्ध समाप्त होने के बाद कई महिलाओं को अपने परिवारों ने अपनाने से मना कर दिया. समाज में उन्हें बदनामी और बहिष्कार झेलना पड़ा. वे मानसिक और शारीरिक रूप से गहरे घावों के साथ जीवन जीने को मजबूर रहीं.

करीब 50 सालों बाद सच्चाई सामने आई

1990 के दशक में जब कुछ जीवित कंफर्ट वूमन ने सार्वजनिक रूप से अपनी कहानियां साझा कीं, तब इस मुद्दे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया. 1993 में जापान सरकार ने “कोनो स्टेटमेंट” जारी किया, जिसमें पहली बार स्वीकार किया गया कि जापानी सेना कंफर्ट वूमन प्रणाली में शामिल थी. 2015 में, जापान और दक्षिण कोरिया के बीच एक समझौता हुआ, जिसके तहत जापान ने पीड़ित महिलाओं के लिए मुआवजे की घोषणा की.

जापान ने इस पर आंशिक रूप से माफी मांगी है, लेकिन कई जापानी राष्ट्रवादी इस तथ्य को नकारते हैं. वहीं, दक्षिण कोरिया और अन्य प्रभावित देशों में आज भी ये एक बड़ा मुद्दा है.

कंफर्ट वूमन स्मारक

कंफर्ट वूमन आज भी इतिहास का एक संवेदनशील और विवादास्पद विषय है. इस विषय पर कई स्मारक और संग्रहालय बनाए गए हैं, विशेष रूप से दक्षिण कोरिया में. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, मानवाधिकार संगठनों ने जापान से इस मुद्दे पर और अधिक जिम्मेदारी लेने की मांग की है.

जापानी सैनिकों को कंफर्ट वूमन से प्यार करने की सख्त मनाही थी. अगर ये हो जाता था तो ये दोनों के लिए बहुत खराब होता था यानि सैनिक के लिए भी और कंफर्ट वूमन के लिए भी. (IMAGE GENERATED BY META AI)

अगर प्यार हो जाता था तो

जापानी सैनिकों को कंफर्ट वूमन से प्यार करने की सख्त मनाही थी. अगर कभी किसी सैनिक और कंफर्ट वूमन में प्यार हो जाता था तो इसे खत्म करने पर मजबूर किया जाता था. इस पर जापानी सैनिक और महिला दोनों को सख्त सजा दी जाती थी. जापानी सैनिक को जेल में डाल दिया जाता था तो महिला को फिजिकल टार्चर से गुजारा जाता.

बच्चे भी हुए

हां कुछ कंफर्ट वूमन गर्भवती हुईं. उनके बच्चे भी हुए. लेकिन जापानी सेना कभी ऐसा नहीं चाहती थी कि वो गर्भवती हों या बच्चा पैदा करें. जापानी सेना ने कई जगहों पर डॉक्टरों को नियुक्त कर रखा था, जो इन महिलाओं का जबरन गर्भपात कराते थे ताकि वे सैनिकों की “सेवा” जारी रख सकें. हालांकि कुछ महिलाएं गर्भपात से बच गईं और उन्होंने बच्चों को जन्म दिया.
दूसरे विश्व युद्ध के बाद, जापानी सैनिक अपने देश लौट गए. अपने पीछे कई ऐसे बच्चे छोड़ दिए जिनकी पहचान स्पष्ट नहीं थी. कुछ बच्चों को उनके माताओं ने गोद देने की कोशिश की, लेकिन उन्हें अपनाने वाला कोई नहीं था.

कई और देशों में भी ये हुआ

1. नाजी जर्मनी (द्वितीय विश्व युद्ध, 1939-1945)
नाजी शासन के दौरान, जर्मन सैनिकों के लिए “वेहरमाच्ट-बोर्डेल” (Wehrmacht Brothels) नामक वेश्यालय बनाए गए थे, जहाँ महिलाओं को जबरन रखा जाता था. अधिकतर महिलाएं कब्जे वाले देशों (फ्रांस, पोलैंड, यूक्रेन और रूस) से लाई जाती थीं. कई यहूदी और स्लाव महिलाओं को भी यातना शिविरों (कंसेंट्रेशन कैंप्स) में यौन दासता के लिए मजबूर किया गया.

2. सोवियत संघ की लाल सेना (1944-1945, द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में)
जब सोवियत सेना ने जर्मनी, पोलैंड और अन्य यूरोपीय देशों में प्रवेश किया, तो बड़े पैमाने पर महिलाओं के साथ रेप किए जाने के मामले सामने आए. कुछ अनुमानों के अनुसार, 1945 में बर्लिन पर कब्जे के दौरान 10 लाख से अधिक जर्मन महिलाओं का रेप किया गया.

3. अमेरिकी और मित्र देशों की सेनाएं
फ्रांस में 1944-1945 के दौरान अमेरिकी, ब्रिटिश और फ्रांसीसी सैनिकों पर भी रेप और यौन हिंसा के आरोप लगे. अमेरिकी सेना ने कोरिया और वियतनाम युद्ध के दौरान स्थानीय महिलाओं के साथ संबंध बनाए और कुछ जगहों पर सैनिकों के लिए वेश्यालयों का संचालन भी किया. कोरियाई युद्ध (1950-1953) के दौरान, दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैनिकों के लिए वेश्यालय बनाए गए थे, जहां स्थानीय महिलाओं को रखा जाता था.

4. वियतनाम युद्ध (1955-1975)
वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिकों के लिए “बार गर्ल” और “आर एंड आर (रिस्ट एंड रिकवरी) केंद्र” बनाए गए, जहां महिलाओं का शोषण किया गया. अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई सैनिकों ने कई वियतनामी महिलाओं से रेप किया, जिससे हजारों “लाइ दाई हान” (Korean-Vietnamese mixed children) पैदा हुए.

5. बोस्निया युद्ध (1992-1995)
बाल्कन संघर्ष के दौरान, सर्बियाई बलों ने मुस्लिम बोस्नियाई महिलाओं को “रेप कैंप” में कैद किया. संगठित रूप से उनका शोषण किया. अनुमान है कि इस युद्ध के दौरान 20,000 से अधिक महिलाओं को रेप का शिकार बनाया गया.

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