मुक्तागिरी तीर्थ क्षेत्र में तीन दिवसीय भव्य मुनि दीक्षा महोत्सव शुरू हो गया है। इस आयोजन में विद्याशिरोमणि नवाचार्य आचार्य समयसागर महाराज के सान्निध्य में करीब 23 ऐलक और क्षुल्लक (जैन दीक्षा के चरण) को मुनि दीक्षा दी जाएगी। देशभर से हजारों श्रद्धालु इस अवसर के साक्षी बनने के लिए यहां पहुंच रहे हैं। विदिशा से रवाना हुए श्रद्धालु विदिशा से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मुक्तागिरी के लिए रवाना हुए। सकल दिगंबर जैन समाज समिति के अध्यक्ष शैलेंद्र बडू चौधरी के नेतृत्व में छह बसें, 14 चार पहिया वाहन और कई श्रद्धालु ट्रेन से मुक्तागिरी पहुंचे। श्रद्धालु अरिहंत विहार कॉलोनी, किलेन्दर और खरीफाटक रोड स्थित आदिनाथ जिनालय से बसों में सवार हुए। सभी वाहन स्वामी विवेकानंद चौराहे पर एकत्रित हुए, जहां से उन्हें हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। कई साधुओं को दी जाएगी मुनि दीक्षा समिति के महामंत्री प्रदीप जैन एलआईसी ने बताया कि इस अवसर पर विदिशा के ऐलक केवल्य सागर और ऐलक गरिष्ठ सागर को मुनि दीक्षा दी जाएगी। इसके अलावा विदिशा जिले के बासोदा से क्षुल्लक सविनय सागर और मुरारिया से क्षुल्लक हीरक सागर को भी दीक्षा प्रदान की जाएगी। ऐतिहासिक महत्व रखता है मुक्तागिरी उल्लेखनीय है कि इसी तीर्थ पर 11 फरवरी 1998 को आचार्य विद्यासागर ने भी मुनि दीक्षा प्रदान की थी। इस कारण यह आयोजन जैन समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मलाभ लेने और इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए मुक्तागिरी पहुंच रहे हैं। क्या होते हैं ऐलक-क्षुल्लक ऐलक वह साधु होता है जिसने गृहस्थ जीवन छोड़ दिया है, लेकिन अभी पूर्ण मुनि दीक्षा नहीं ली होती। क्षुल्लक, ऐलक से एक चरण नीचे की अवस्था मानी जाती है। गृहस्थ जीवन त्याग चुका होता है, साधु जीवन की शुरुआत कर चुका होता है लेकिन दीक्षा नहीं ली होती। .