Share Crash: भारतीय तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) यानी कि IOC, BPCL और HPCL के शेयरों में हाल के समय में भारी गिरावट देखी गई. एक्सपर्ट्स का ऐसा मानना है कि इनमें 20 परसेंट तक की और गिरावट आ सकती है. इसके पीछे वजह अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल है, जिससे इन कंपनियों की बैलेंस शीट पर दबाव बढ़ता जा रहा है.
ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे जंग की वजह से होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया है. यही वह रास्ता से जहां से दुनियाभर के तमाम देशों के लिए 20 परसेंट तक की क्रूड ऑयल की सप्लाई होती है. भारत अपनी जरूरत का 40 परसेंट से ज्यादा तेल आयात करता है. ऐसे में हाल के दिनों में मिडिल ईस्ट के देशों में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर्स पर हुए हमलों से ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं. कुछ वक्त पहले तक तो कीमतें लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं. इसके चलते भारतीय तेल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट देखी जा रही है.
OMCs के मुनाफे पर असर
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से OMCs का मार्केटिंग मार्जिन कम हो जाता है. यानी कि तेल बेचने पर होने वाला मुनाफा कम हो जाता है. OMC एक काउंटर-साइक्लिकल लेवरेज मॉडल पर काम करती हैं. यानी जब नुकसान या मार्जिन का दबाव बढ़ता है, तो वर्किंग कैपिटल और अंडर-रिकवरी को संभालने के लिए कर्ज तेजी से बढ़ जाता है.
Equirus Research के अनुसार, इससे यह जोखिम और बढ़ जाता है कि कच्चे तेल के मौजूदा तेजी के दौर में अगर कीमतों में बदलाव किए बिना मार्केटिंग में नुकसान जारी रहता है, तो बढ़ते कर्ज के स्तर के कारण बैलेंस शीट पर फिर से काफी दबाव पड़ सकता है.
सरकार की नीतियां भी जिम्मेदार
सरकार ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल के दामों में 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है. इसका भी कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ा है. यह कटौती लगभग 22 महीनों के अंतराल पर की गई. मई 2022 से तेल की कीमतें स्थिर बनी हुई थीं. रिटेल कीमत कम होने से तेल कंपनियों का मुनाफा प्रति लीटर कम हो जाता है. ऊपर से अगर कंपनियों के पास पहले से खरीदा गया कच्चे तेल का स्टॉक रखा है और अब उन्हें सस्ते रेट पर बेचना पड़ रहा है, तो उन्हें अलग से ‘इन्वेंट्री लॉस’ भी उठाना पड़ रहा है.
निवेशकों के लिए सलाह
अगर आप इन शेयरों में निवेश का सोच रहे हैं, तो पहले कच्चे तेल की कीमत को लेकर सरकारी घोषणाओं पर नजर रखें. एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक मार्जिन में सुधार नहीं होता, तब तक स्टॉक्स में भारी उतार-चढ़ाव बना रहेगा. इस बीच, ब्रोकरेज फर्म कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने इन कंपनियों के शेयरों को ‘Sell’ रेटिंग दी है.
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
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