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Success Story: बिहार में मधुबनी के रहिका के रहने वाले 25 वर्षीय युवा राजा कुमार पासवान जूट क्राफ्ट से बड़ी सफलता हासिल की है. वह एक दिन में 2 लाख तक सेल कर स्टार्टअप को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहे हैं. जूट क्राफ्ट से मजबूत बोरे (गन बैग) जूट से बैग, घर की सजावट की वस्तुएं, पर्दे बनाना आसपास के कई लोगों को सिखा रहे हैं. इसके साथ ही कई लोगों को रोजगार भी दिए है. आज देश के हर राज्य के बड़े-बड़े मेले में इस प्रोडक्ट की बिक्री होती है. बता दें कि जूट पर्यावरण के अनुकूल है. इसकी मांग मार्केट में बढ़ती जा रही है.
राजा कुमार पासवान ने बताया कि वह बहुत ही कम पढ़े लिखे हैं. वह शहर में नौकरी के पहले ही दिन लोगों के सामने असहज महसूस किए. इस दौरान कई लोगों ने उन्हें चिढ़ाया भी. लोगों का कहना था कि वह यहां कैसे काम करेगा. हालांकि कुछ समय तक वहां काम कर पैसों को बचाकर अपने गांव वापस लौट आए. यहां गांव में खुद का काम शुरू कर मालिक बनने की सोची. उन्होंने अपने छोटे से घर से बिजनेस करने की सोची. जहां वह अपने माता-पिता से जूट का सामान बनाना सीखे थे. इसके साथ ही पड़ोसियों से भी कुछ चीजें जूट से बनाना सीखे थे. वही सामान वह बनाकर जगह-जगह मेले में बेचने लगे.
राजा कुमार ने बताया कि उन्होंने देखा कि कुछ समय में ही उनके जूट के सामानों की खूब बिक्री हो रही है. इसके बाद उन्होंने जूट क्राफ्ट की नई तकनीक से स्टार्टअप शुरू किया. जहां वह महिलाओं और पुरुषों के लिए भी तरह-तरह के प्रोडक्ट बनाने लगे. जहां भी देश में एग्जीबिशन लगता है. वह अपने प्रोडक्ट लेकर पहुंच जाते हैं. जहां एक दिन में एक एग्जीबिशन में लगभग 2 लाख रुपये तक का सामान आसानी से बेच लेते हैं.
राजा कुमार ने बताया कि इस जूट कारोबार के लिए वह 8-10 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. जहां उन्होंने दो बड़ी मशीनें भी लगा चुके हैं. यहां दिन रात तरह- तरह की चीजों को बनाकर स्टोर करते हैं. इसके बाद बंगाल, बिहार, राजस्थान ,बेंगलुरु, मुंबई, पुणे समेत देख के कई अन्य शहरों में पहुंचते हैं.
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जहां एग्जीबिशन के माध्यम से इसे बेचते हैं. वह अपनी 2 साल की कड़ी मेहनत से जूट कला इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में अच्छी पहचान बना लिए हैं. अब जहां भी कोई सरकारी बड़ा प्रोग्राम भी होता है तो वह वहां पर अपना स्टॉल लगाते हैं. इसके लिए उन्हें बिहार सरकार प्रोत्साहित भी करती है.
राजा कुमार कहते हैं कि सिर्फ 20000 रुपये से अपना बिजनेस शुरू कर सकते हैं. जहां इस बिजनेस से अपने क्षेत्र में रहकर खुद मालिक बन सकते हैं. साथ ही उन्हें दूसरे शहर में जाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी. ऐसे में जहां बिहार में रोजगार नहीं है. वहां हम अपनों को रोजगार भी दे सकते हैं. इसके साथ ही बिहार के इस इको फ्रेंडली प्रोडक्ट की भी जीवित रख सकते हैं.
राजा कुमाार पासवान कहते हैं कि वह इससे बहुत अच्छी आमदनी कर रहे हैं. जहां उनकी टीम जूट के नए-नए प्रोडक्ट बना रही है. आने वाले 2 सालों में वह 500 लोगों को रोजगार भी दे सकते हैं. इस बिजनेस में लागत भी बहुत कम है. यह प्रोडक्ट 20000 का भी खरीदें तो इसे आप 50000 रुपये में बेच सकते हैं.
जहां आपको 30000 रुपये फायदा भी मिलेगा है. किसी भी बड़े मेले में कहीं भी जाकर देश- विदेश तक यह प्रोडक्ट आप सेल कर सकते हैं. जूट भारत की पारंपरिक हस्तशिल्प कला है. जूट कला (Jute Craft) एक प्राचीन भारतीय हस्तशिल्प है. जो मुख्य रूप से बिहार के कुछ क्षेत्रों में और बंगाल में खेती होती है.
इसके नरम और टिकाउ घरेलू उपयोग होने वाली वस्तुएं जैसे जुट का बोतल बैग, लांच बैग, लेडीज सीलिंग बैग, शॉपिंग बैग, जेट्स बैग, लैपटॉप रखने के लिए, चप्पल, जुट की ज्वैलरी, कालीन, चटाई , बच्चों के लिए झूला आदि प्रोडक्ट तैयार किया जाता है. यह पर्यावरण और वातारण के अनुकूल है, जिसका उपयोग करने से अपने कला को जीवित और सेहत पर ध्यान रखा जा सकता है.
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