पहाड़ों पर मिलने वाला ये जंगली फल, बीपी-शुगर मरीजों के लिए वरदान, खत्म हो जाएगी दवा की जरूरत

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घिंगारू पहाड़ों में उगने वाला एक जंगली फल है, जो स्वाद में खट्टा-मीठा और सेहत से भरपूर होता है. विटामिन-C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर घिंगारू पाचन सुधारता है और गर्मियों में शरीर को ठंडक देता है.

घिंगारू पहाड़ी इलाक़ों में उगने वाला एक जंगली फल है, जो खासतौर पर उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है. इसे कहीं-कहीं घिंगार, घिंगरू या घिंघार भी कहा जाता है. यह फल छोटे, गोल और लाल रंग का होता है, देखने में जामुन जैसा लेकिन स्वाद में हल्का खट्टा-मीठा. पहाड़ों में रहने वाले लोग इसे बचपन से खाते आए हैं और आज भी जंगल जाते समय इसे ढूंढना एक खुशी का पल होता है.

ghingharu plant

घिंगारू आमतौर पर झाड़ीदार पौधे के रूप में उगता है. यह पौधा ज्यादा देखभाल नहीं मांगता और खुद-ब-खुद जंगलों, खेतों के किनारों और पहाड़ी ढलानों पर उग जाता है।.बरसात के मौसम में इसमें फल लगते हैं, जो धीरे-धीरे पककर गहरे रंग के हो जाते हैं. यही वह समय होता है जब बच्चे, महिलाएँ और बुज़ुर्ग जंगल से घिंगारू तोड़कर लाते हैं. यह पौधा पहाड़ों की जैव विविधता का अहम हिस्सा माना जाता है.

ghingaru in childhood and local pahadi life

पहाड़ों में घिंगारू सिर्फ़ एक फल नहीं, बल्कि यादों का हिस्सा है. स्कूल से लौटते समय रास्ते में झाड़ियों से घिंगारू तोड़ना, दोस्तों के साथ बांटकर खाना और हाथ-मुंह पर लग जाना. ये सब अनुभव पहाड़ी बचपन की खास पहचान हैं. बुज़ुर्ग बताते हैं कि पहले जब बाज़ार की मिठाइयाँ आसानी से नहीं मिलती थीं, तब घिंगारू जैसे फल ही बच्चों की सबसे बड़ी ट्रीट हुआ करते थे.

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taste and use

घिंगारू का स्वाद खट्टा-मीठा होता है, जो सीधे खाने में बहुत अच्छा लगता है. कई जगहों पर इससे चटनी, रस और कभी-कभी घरेलू जैम भी बनाया जाता है. पहाड़ी महिलाएँ इसे नमक और मिर्च के साथ मसलकर चटनी बनाती हैं, जो गर्मियों में शरीर को ठंडक देती है. आजकल कुछ लोग इसे सुखाकर भी रखते हैं ताकि लंबे समय तक इसका इस्तेमाल किया जा सके.

benefits of ghingharu

यह रक्त प्रवाह को संतुलित करता है, धमनियों को नुकसान से बचाता है, और हृदय रोगों में फायदेमंद है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करते हैं, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए अच्छा है.<br />यह उच्च रक्तचाप (High BP) और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में असरदार है. इसके<br />सूखे फल का पाउडर दही के साथ लेने से खूनी दस्त और अन्य पेट संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है.

ghingharu in tradition

पहाड़ी समाज में घिंगारू जैसे जंगली फल यह सिखाते हैं कि प्रकृति हमें बिना कुछ मांगे कितना कुछ देती है.पुराने समय में जब दवाइयाँ और आधुनिक सुविधाएँ नहीं थीं, तब लोग ऐसे ही फलों और जड़ी-बूटियों पर निर्भर रहते थे. घिंगारू इसी लोकज्ञान का हिस्सा है, जिसे आज भी बुज़ुर्ग नई पीढ़ी को पहचानना सिखाते हैं.

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पहाड़ों पर मिलने वाला ये जंगली फल, बीपी-शुगर मरीजों के लिए वरदान

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