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Varuna Tree Benefits: वरुण का पेड़ आयुर्वेद में किडनी, मूत्राशय और पाचन से जुड़ी समस्याओं के लिए रामबाण माना जाता है. इसकी छाल, जड़ और पत्तियों में औषधीय गुण होते हैं, जो पथरी, यूरिन इंफेक्शन, जलन और मेटाबॉलिज़्म सुधारने में मदद करते हैं. नियमित सेवन से वजन नियंत्रण, त्वचा की सुंदरता और शरीर की चयापचय क्रिया में सुधार होता है. वरुण का काढ़ा और पाउडर घरेलू उपाय के रूप में भी सरल और लाभकारी है.
प्रकृति में ऐसे अनेकों पेड़ पौधे पाए जाते हैं जो मानव शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं, ऐसा ही एक पेड़ है वरुण, यह आयुर्वेद किसी रामबाण औषधि से कम नहीं है. प्राचीन समय से इसका उपयोग किडनी, मूत्राशय और पाचन से जुड़ी समस्याओं के उपचार में किया जाता रहा है. वरुण की छाल, जड़ और पत्तियां औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं. आयुर्वेदिक डॉक्टर महेश शर्मा ने बताया कि यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है और आंतरिक अंगों को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होता है.

उन्होंने बताया कि आज के समय में गलत खान-पान, कम पानी पीना और अनियमित जीवनशैली के कारण किडनी स्टोन, यूरिन इंफेक्शन और मेटाबॉलिज़्म से जुड़ी समस्याए तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में वरुण एक प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प के रूप में सामने आता है. इसके उपयोग से अनेकों आयुर्वेदिक दवाएं भी बनाई जाती है. इसके अलावा घरेलू नुस्खों में भी इसका उपयोग किया जाता है.

आयुर्वेदिक डॉक्टर महेश शर्मा के अनुसार वरुण का पौधा किडनी और मूत्राशय की पथरी में लाभकारी होता है. इसके आयुर्वेद में पथरी नाशक औषधि माना जाता है. इसमें मूत्रवर्धक गुण होते हैं, जो पेशाब की मात्रा बढ़ाकर छोटी-छोटी पथरियों को बाहर निकालने में मदद करते हैं. नियमित सेवन से पथरी बनने की संभावना भी कम होती है. इसी के साथ यह यूरिन इंफेक्शन और जलन में राहत देता है.
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उन्होंने बताया कि यदि पेशाब करते समय जलन, दर्द या बार-बार पेशाब आने की समस्या हो, तो वरुण का सेवन लाभकारी होता है. यह मूत्र मार्ग को साफ़ करता है और सूजन को कम करता है. इसके अलावा यह मेटाबॉलिज़्म को बेहतर बनाता है. यह पेड़ की छाल लिवर को स्वस्थ रखता है और पित्त दोष को संतुलित करता है. इससे पाचन क्रिया सुधरती है, भोजन ठीक से पचता है और शरीर की चयापचय क्रिया बेहतर होती है.

इसके अलावा यह वजन नियंत्रण में भी सहायक माना जाता है. वहीं, यह त्वचा के लिए एंटी-एजिंग गुण से भरपूर होता है. आयुर्वेद में इसका उपयोग वात दोष को कम करता है, जिससे त्वचा में रूखापन, झुर्रिया और समय से पहले बुढ़ापे के लक्षण कम होते हैं. यह त्वचा को अंदर से साफ़ और स्वस्थ बनाता है.इसमें सूजनरोधी गुण भी होते हैं, जो शरीर के अंदरूनी सूजन और दर्द को कम करने में मदद करते हैं, विशेष रूप से किडनी और मूत्राशय से जुड़ी समस्याओं में कारगर है.

आयुर्वेदिक डॉक्टर के अनुसार, वरुण का घरेलू उपयोग करना भी बेहद आसान हैं. इसकी छाल का काढ़ा बनाकर सेवन किया जा सकता हैं. सबसे पहले 1 चम्मच वरुण की छाल को 2 कप पानी में उबालें. जब पानी आधा रह जाए, तो छानकर गुनगुना पिए. इसका दिन में 1 से 2 बार सेवन किया जा सकता है. इसके अलावा वरुण का चूर्ण भी बना सकते हैं. आधा चम्मच वरुण छाल का पाउडर को गुनगुने पानी के साथ दिन में एक बार लेना है. इसका त्वचा के लिए उपयोग पेस्ट बनाकर कर सकते हैं. वरुण की छाल का पेस्ट नारियल तेल में मिलाकर प्रभावित स्थान पर हल्के हाथ से लगाए मुंहासे, सूजन या त्वचा की समस्या में लाभ मिल सकता है.