गंजेपन से इस ट्रीटमेंट से बढ़ सकता है आत्महत्या का खतरा ! इजरायल के वैज्ञानिकों का चौंकाने वाला दावा

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Baldness Treatment Side Effects: नई स्टडी के मुताबिक गंजेपन के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा फिनास्टराइड पुरुषों में डिप्रेशन, मेंटल डिसऑर्डर और आत्महत्या के विचार को बढ़ा सकती है. इस दवा के साइड इफेक्ट अब केवल किस्से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित पैटर्न बन चुके हैं. हालांकि इस बीच स्टीवियोसाइड और मिनॉक्सिडिल का कॉम्बिनेशन बालों की ग्रोथ 67% तक बढ़ाने में मददगार पाया गया है, जो गंजेपन के लिए एक सुरक्षित विकल्प साबित हो सकता है.

गंजेपन की दवा फिनास्टराइड पुरुषों में डिप्रेशन, मेंटल डिसऑर्डर पैदा कर सकती है.

Hair Loss Drugs and Suicidal Thoughts: आज के जमाने में कम उम्र में गंजापन (Baldness) बड़ी समस्या बन चुका है. 20-25 की उम्र में ही लोगों के बाल झड़ने लगे हैं और इसकी वजह से 30 की उम्र तक गंजापन आ जाता है. गंजापन न सिर्फ लोगों का कॉन्फिडेंस डाउन करता है, बल्कि यह मानसिक तनाव बढ़ा सकता है. गंजेपन से बचने और दोबारा बाल उगाने के लिए कई तरह के ट्रीटमेंट उपलब्ध हैं. बालों को झड़ने से बचाने के लिए कई तरह की दवाएं भी दी जाती हैं. अब एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि गंजेपन से राहत पाने के लिए आप जिस दवा का आप प्रयोग करते हैं, वह आपके दिमाग को नुकसान भी पहुंचा सकती है. इससे लोगों में डिप्रेशन बढ़ रहा है और आत्महत्या की भावना बढ़ रही है.

इजरायल में हुई एक नई स्टडी में पाया गया है कि जो पुरुष गंजेपन से छुटकारा पाने के लिए दवाइयां लेते हैं, उनमें मेंटल डिसऑर्डर पैदा हो सकता है और आत्महत्या से जुड़े विचार काफी ज्यादा आते हैं. ये विचार उन लोगों को नहीं आते हैं, जो गंजेपन का ट्रीटमेंट नहीं करवाते हैं, चाहें वे गंजे हों. हदास्सा-हिब्रू यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के प्रोफेसर और इस स्टडी के लीड ऑथर डॉ. मेयर ब्रेजिस ने दावा किया है कि इस ट्रीटमेंट से होने वाले साइड इफेक्ट सिर्फ किस्से-कहानियों तक सीमित नहीं रह गए हैं. अब हम अलग-अलग आबादी में एक जैसे पैटर्न देख रहे हैं और इसके परिणाम दुखद हो सकते हैं. दुनियाभर में गंजेपन को ट्रीट करने के लिए विशेषज्ञ फिनास्टराइड सुझाते हैं, जिसे लेकर स्टडी में हैरान करने वाला खुलासा हुआ है.

कई एनिमल स्टडीज में पाया गया कि फिनास्टराइड का लंबे समय तक सेवन करने से ब्रेन में सूजन और हिप्पोकैम्पस में बदलाव आता है. हिप्पोकैम्पस ब्रेन का सीखने, याददाश्त और भावनाओं का केंद्र है. FDA ने 2011 में डिप्रेशन और 2022 में आत्महत्या के विचार को ड्रग के साइड इफेक्ट के तौर पर देखा था. 2011 तक FDA ने फिनास्टराइड से जुड़ी 18 आत्महत्याओं के केस दर्ज किए, लेकिन ब्रेजिस का तर्क है कि दवा के वैश्विक उपयोग के आधार पर दुनियाभर में वास्तविक संख्या हजारों में हो सकती है. गंजेपन से जूझ रहे लोगों को दुखी होने की कतई जरूरत नहीं है, क्योंकि एक नए अध्ययन ने इसका समाधान खोज निकाला है. यह समाधान मीठा और आसान है. स्टीवियोसाइड एक प्राकृतिक स्वीटनर है, जो स्टीविया के पौधे से प्राप्त होता है. यही गंजेपन को दूर करने का प्राकृतिक इलाज हो सकता है.

शोधकर्ताओं ने पाया कि स्टीवियोसाइड को मिनोक्सिडिल के साथ मिलाने से यह त्वचा में बेहतर तरीके से समा जाता है. एंड्रोजेनिक एलोपेसिया से पीड़ित चूहों पर परीक्षण करने पर इस कॉम्बिनेशन ने बालों के रोमों को तेजी से बढ़ने दिया, जिससे नए बाल उग आए. यह खुद बाल उगाने वाली दवा नहीं है, बल्कि मिनॉक्सिडिल नामक मौजूदा दवा को त्वचा में अब्जॉर्ब करने में मदद करती है. 2025 में ऑस्ट्रेलिया और चीन के शोधकर्ताओं की एक स्टडी में पाया गया कि स्टीवियोसाइड-आधारित माइक्रोनीडल पैच बालों की ग्रोथ को 67 फीसदी तक बढ़ा सकता है. यह खोज उन लाखों लोगों के लिए वरदान साबित हो सकती है जो रोजाना मिनॉक्सिडिल लगाने से परेशान हैं.

अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्… और पढ़ें

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गंजेपन से ट्रीटमेंट से बढ़ सकता है आत्महत्या का खतरा ! नई स्टडी में बड़ा दावा

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