Testosterone Therapy Boost Men Health: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों की सेहत बुरी तरह प्रभावित हो रही है. पुरुष हों या महिलाएं, सभी की सेहत पर मॉडर्न लाइफस्टाइल का नेगेटिव असर पड़ रहा है. एक्सपर्ट्स की मानें तो अनहेल्दी लाइफस्टाइल, खराब खानपान और नींद की कमी से पुरुषों के शरीर में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर तेजी से कम हो रहा है. टेस्टोस्टेरोन हार्मोन पुरुषों की एनर्जी, मूड, यौन स्वास्थ्य समेत कई चीजों को मेंटेन करता है. इसकी कमी से पुरुषों की शादीशुदा जिंदगी बर्बाद हो सकती है और शरीर कमजोर हो सकता है. कई लोग इस हार्मोन की कमी से निपटने के लिए टेस्टोस्टेरोन क्रीम्स और जैल का इस्तेमाल भी करते हैं. अब एक स्टडी में इस हार्मोन की कमी से निपटने का असरदार तरीका सामने आया है.
स्टडी बताती है कि 30-40 की उम्र के बाद पुरुषों में हर साल लगभग 1 प्रतिशत टेस्टोस्टेरोन कम होने लगता है. यह गिरावट हमेशा समस्या नहीं बनती है, लेकिन कई पुरुषों में इसका स्तर जरूरत से ज्यादा कम हो जाता है. इस कंडीशन को लो टेस्टोस्टेरोन कहा जाता है. इसकी वजह से थकान, खराब मूड, वजन बढ़ना, यौन संबंध बनाने की कम इच्छा और ध्यान लगाने में परेशानी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. ऐसी कंडीशन में टेस्टोस्टेरोन थेरेपी असरदार साबित हो सकती है और परेशानियों से राहत दिला सकती है.
हार्वर्ड की स्टडी में 9500 से ज्यादा ऐसे पुरुषों का एनालिसिस किया गया, जिनका टेस्टोस्टेरोन स्तर कम था और जिन्हें TRT दिया गया. नतीजों में पाया गया कि इस थेरेपी से लगभग सभी परेशानियों में सुधार हुआ. इनमें एनर्जी, ताकत, सहनशक्ति, जीवन से संतुष्टि, खुशी, काम करने की क्षमता, खेल प्रदर्शन और इरेक्शन की गुणवत्ता शामिल थी. खास बात यह रही कि इलाज शुरू करने के सिर्फ दो महीने के भीतर ही सुधार दिखने लगा. विशेषज्ञों का कहना है कि TRT के फायदे केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक स्तर पर भी नजर आते हैं.
कई पुरुषों में 40 की उम्र के बाद टेस्टोस्टेरोन कम होने पर डिप्रेशन भी पैदा हो सकता है. इसके अलावा पेट के आसपास चर्बी बढ़ना, नींद की समस्या, मसल मास कम होना और शरीर में फैट का गलत तरीके से जमा होना भी इसके लक्षण हैं. अक्सर ये लक्षण तनाव या डिप्रेशन समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं, जिससे असली समस्या पहचान में नहीं आती है. ऐसी कंडीशन में भी TRT थेरेपी से गजब का फायदा मिल सकता है.
शोधकर्ता यह भी बताते हैं कि TRT थेरेपी हर किसी के लिए जरूरी या सुरक्षित नहीं होती है. इस थेरेपी का फैसला सिर्फ ब्लड टेस्ट के आधार पर नहीं, बल्कि उम्र, लक्षणों की गंभीरता और व्यक्ति की जीवनशैली को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए. बिना जरूरत TRT लेने से शरीर का प्राकृतिक टेस्टोस्टेरोन बनना बंद हो सकता है, जिससे इनफर्टिलिटी, दिल से जुड़ी समस्याएं और अन्य गंभीर जोखिम हो सकते हैं. रिसर्च में यह भी बताया गया कि कई मामलों में लाइफस्टाइल में सुधार करके टेस्टोस्टेरोन स्तर को प्राकृतिक रूप से बढ़ाया जा सकता है.