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Chakra phool or Star anise Benefits: चकरी या चक्र फूल मसाला न केवल एक भारतीय व्यंजनों का हिस्सा है, बल्कि स्वास्थ्य का खजाना भी है. यह एक खुशबूदार और स्वादिष्ट मसाला है. इसका आकार स्टार जैसा होता है, जिसके फायदे हैरान करने वाले हैं. यह किसी सुदर्शन चक्र से कम नहीं है. यह मसाला पाचन, इम्युनिटी पॉवर, संक्रमण और तनाव कम करने में बेहद उपयोगी है. आगे जानिए…
चकरी या चक्र फूल एक मसाला है, जो पाचन सुधारने में बेहद उपयोगी है. यह गैस, कब्ज, अपच और पेट फूलने जैसी परेशानियों में राहत देती है. इसके सेवन से भोजन जल्दी पचता है और पेट की हलचल सही रहती है. खाने में इसे शामिल करना या रात में पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट पीना पाचन तंत्र को मजबूत बना सकता है.

चकरी मसाले में थाइमोल और टेरपीनॉल जैसे तत्व भी होते हैं, जो खांसी, सर्दी और फ्लू के लक्षणों को कम करने में सहायक होते हैं. यह ब्रोंकाइटिस और निमोनिया जैसी बीमारियों में भी मददगार है. इसको गर्म चाय या काढ़े के रूप में सेवन करने से शरीर को राहत और आराम मिलता है.

चकरी मसाले में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को हानिकारक मुक्त कणों से बचा सकते है. इसका सही और रोजाना सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी पॉवर बढ़ने में मदद मिल सकती है. यह मसाला ठंड, वायरल संक्रमण और सामान्य बीमारियों से लड़ने में बेहद लाभकारी और गुणकारी है.
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राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ वंदना तिवारी के मुताबिक, चकरी मसाले के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर में सूजन कम करते हैं. यह गठिया और जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने में भी मदद करता है. इस मसाले के तेल या काढ़े का सेवन शरीर में सूजन घटानकर आराम देता हैं.

चकरी यानी चक्र फूल मसाला एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुणों से भरपूर होता है. यह हानिकारक बैक्टीरिया और फंगस से लड़ता है, जिससे त्वचा संक्रमण जैसे की एक्ने और रैशेज़ में लाभ मिलता है. इसके नियमित उपयोग से त्वचा स्वस्थ और चमकदार होती जाती हैं.

चकरी मसाला तनाव और नींद की समस्या में भी फायदेमंद है. इसका सही सेवन मानसिक शांति प्रदान कर और अच्छी नींद लाने में सहायक होता है. शाम के समय इसका चाय या काढ़े का उपयोग दिनभर की थकान और मानसिक तनाव को कोसों दूर रखता है.

चकरी मसाला किसी संजीवनी से कम नहीं है. इस मसाले में आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम, मैंगनीज और विटामिन बी, सी, ई जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं. इसे चाय, काढ़ा, पुलाव, बिरयानी, सब्जियों या शहद के साथ मिलाकर सेवन किया जा सकता है. ध्यान रखें कि, इसका सेवन हमेशा संतुलित मात्रा में और आयुर्वेद एक्सपर्ट की देखरेख में ही करें, क्योंकि यह कुछ परिस्थितियों में हानिकारक भी हो सकता है.