रीवा वन विभाग की नर्सरी में सोमवल्ली नामक पौधा संरक्षित किया जा रहा है. आयुर्वेद में इस पौधे का बड़ा महत्व बताया गया है. कहते हैं कि इसके इस्तेमाल से लोग जल्दी बूढ़े नहीं हो सकते. प्राचीन ग्रंथों और वेदों में सोमवल्ली का उल्लेख किसी साधारण पौधे के रूप में नहीं, बल्कि कायाकल्प करने वाली औषधि के रूप में मिलता है. मान्यता है कि अनादि काल में देवी-देवता और ऋषि-मुनि सोमवल्ली के रस का सेवन चिरायु, बल और ऊर्जा प्राप्त करने के लिए किया करते थे. कहा जाता है कि इससे शरीर सुडोल रहता था और बुढ़ापा बहुत देर से आता था. विशेषज्ञों का मानना है कि सोमवल्ली अकेले नहीं, बल्कि अन्य दुर्लभ औषधीय पौधों के साथ मिलकर और भी प्रभावशाली औषधियां बना सकती है. अब इस पर वैज्ञानिक शोध की तैयारी की जा रही है, ताकि इसके सभी रहस्यों से दुनिया को परिचित कराया जा सके.
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