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Health tips : अब भी बहुत से लोग इस पौधे के फायदों को नहीं जानते और इसे बेकार की झाड़ी मानते हैं. अक्सर घास-फूस समझकर उखाड़ फेंकते हैं. लेकिन ये कई रोगों में रामबाण है. बीमारी जड़ से उखाड़ता है.
गोंडा. आयुर्वेद में कई औषधीय पौधे हैं जो बुखार, खांसी और अन्य बीमारियों में रामबाण माने जाते हैं. ऐसा ही एक पौधा है कंजा (या कांजा), जिसे गांवों में लोग झाड़ जैसा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन यह पौधा बुखार और दूसरे रोगों के इलाज में बहुत उपयोगी है. कंजा एक झाड़ीदार औषधीय पौधा है. इसे कई जगहों पर “रासना” के नाम से भी जाना जाता है. यह पौधा खेतों, खाली जगहों या सड़क किनारे अपने आप उग आता है. इसकी पत्तियां लंबी और कुछ खुरदरी होती हैं. लोकल 18 से बातचीत में गोंडा के वैद्य नंदू प्रसाद बताते हैं कि कंजा खासतौर पर बुखार के इलाज में उपयोग किया जाता है. इसके पत्तों को पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर पीने से शरीर का तापमान धीरे-धीरे कम होने लगता है. यह पसीना लाने में मदद करता है, जिससे बुखार तेजी से उतरता है. साथ ही यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाता है.
कैसे करें उपयोग
कंजा की पत्तियों को लेकर उन्हें अच्छे से धो लें. फिर करीब 10-15 ग्राम पत्तियों को एक गिलास पानी में उबालें जब तक पानी आधा न रह जाए. इस काढ़े को छानकर दिन में एक या दो बार पीने से बुखार में राहत मिलती है. लेकिन ध्यान रहे, किसी भी औषधीय प्रयोग से पहले किसी जानकार वैद्य या डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है. वैद्य नंदू प्रसाद बताते है कि कंजा सिर्फ बुखार में ही नहीं, बल्कि कई दूसरी समस्याओं में भी काम आता है. जोड़ों के दर्द में इसके पत्तों का लेप या तेल उपयोगी होता है. पेट की समस्याओं में इसके काढ़े का सेवन लाभकारी हैत्वचा रोगों में इसकी पत्तियों का लेप किया जाता है. सिरदर्द और सर्दी-खांसी में भी यह कारगर है.
कम पहचान, बड़ा फायदा
ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी बहुत से लोग इस पौधे के फायदे नहीं जानते और इसे बेकार की झाड़ी मानते हैं. लेकिन गोंडा के वैद्य इस पौधे का उपयोग वर्षों से कर रहे हैं और मरीजों को लाभ भी मिल रहा है. नंदू प्रसाद बताते है कि कंजा एक सामान्य दिखने वाला लेकिन बेहद चमत्कारी औषधीय पौधा है. इसे पहचानने और सही तरीके से इस्तेमाल करने की जरूरत है. आयुर्वेद में इसकी गिनती प्रभावशाली जड़ी-बूटियों में होती है.