सड़क किनारे सुबह से शाम तक गुमटी पर बैठता था ये शख्स, घर से ही बनाया पान मसाला, आज 2 ब्रांड का मालिक

Kamala Pasand Owner: ‘कमला पसंद’ का नाम सुनते ही आपके मन में वो टीवी एड आ गया होगा, जिसमें अलग-अलग सेलेब्स आते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस ब्रांड के पीछे की कहानी एक आम आदमी के संघर्ष और मेहनत से जुड़ी हुई है. कमला पसंद और राजश्री गुटखा के मालिक कमल किशोर चौरसिया ने उत्तर प्रदेश कानपुर के रहने वाले हैं. उन्होंने सड़क किनारे खुला पान मसाला बेचने से अपने कारोबार की शुरुआत की थी और आज वह अरबों के मालिक हैं.

लगभग 1985 के दौरान चौरसिया परिवार ने घर से ही पान मसाला बनाना शुरू किया और काहू कोठी में एक गुमटी लगाकर इसे बेचते थे. शुरुआत में ये बहुत छोटा स्तर का काम था. कमलाकांत जी यानी कमल किशोर चौरसिया के पिता इस कारोबार में अकेले नहीं थे, उनके भाई बच्चा चौरसिया और आनंद किशोर चौरसिया भी हाथ बंटाते थे. कमल किशोर उस समय जवान थे और परिवार के इस छोटे से धंधे में कंधे से कंधा मिलाकर लगे रहते थे. वो सुबह से शाम तक गुमटी पर बैठते, ग्राहकों से बातें करते और पान मसाला के पैकेट बांटते. उस जमाने में पान मसाला का बाजार तेजी से बढ़ रहा था.

‘कमला पासंद’ की शुरुआत

धीरे-धीरे उन्होंने पान मसाला बेचने के कारोबार को आगे बढ़ाने का फैसला लिया और एक बाद एक कई ब्रांड के वह मालिक बन गए. फिर ग्राहकों का भरोसा बढ़ा, और उनका नाम फैलने लगा. उन्होंने ‘कमला पासंद’ नाम का ब्रांड शुरू करके एक पैकेट की कीमत महज कुछ पैसे ही रखी, लेकिन क्वालिटी ने लोगों को इस ब्रांड की तरफ खींच लिया.

कमल किशोर चौरसिया की कंपनी केपी ग्रुप ने पान मसाला के कारोबार को एक अलग स्ट्रैटजी से आगे बढ़ाया और एक बाद एक कई ब्रांड बाजार में उतारना शुरू किया. साल 2000 में केपी ग्रुप के राजश्री गुटखा ने देशभर में खूब पहचान बनाई और फिर पूरे उत्तर भारत में हर कोई इस गुटखा ब्रांड का दिवाना हो गया. दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और कई बड़े शहरों में ये कारोबार फैल चुका है.  केपी ग्रुप ने सिर्फ यही तक अपने कारोबार को सीमित नहीं रखा. कंपनी ने केपी सुरती और मधुबन पान मसाला जैसे प्रोडक्ट्स को भी बाजार में उतारा.

कमल किशोर चौरसिया की नेट वर्थ

कमल किशोर चौरसिया की नेट वर्थ की बात करें तो मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये 2025 के आखिर तक लगभग 1500 से 2000 करोड़ रुपये (करीब 180 से 240 मिलियन अमेरिकी डॉलर) के बीच है. ये आंकड़ा उनकी पान मसाला की बड़ी कंपनी, अलग-अलग निवेशों जैसे रीयल एस्टेट और लोहा व्यापार, और परिवार की संपत्तियों के आधार पर तैयार किया गया अनुमान है.

कमल किशोर चौरसिया ने रियल एस्टेट में भी कमाया नाम

कमला पासंद के मालिक कमल किशोर चौरसिया सिर्फ पान मसाला के कारोबार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वो कम से कम दस कंपनियों में डायरेक्टर हैं. ये कंपनियां रियल एस्टेट, फूड प्रोसेसिंग, लग्जरी ब्रांड्स और मिनरल्स जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम करती हैं. इन सबकी कुल पेड-अप कैपिटल यानी भरी हुई पूंजी 1,168  करोड़ रुपये से ज्यादा है. उनके मुख्य होल्डिंग्स में राजश्री जिंक लिमिटेड और राजश्री धातु एंड मिनरल्स इंडिया लिमिटेड शामिल हैं, जो जिंक निकालने और मिनरल एक्सट्रैक्शन का काम करती हैं. इससे उनकी इंडस्ट्री में डाइवर्सिफिकेशन मजबूत हो जाती है. इसी तरह इन्फिनाइट लग्जरी ब्रांड्स प्राइवेट लिमिटेड और ओलिन इंटरनेशनल लिमिटेड हाई-एंड कंज्यूमर गुड्स और एक्सपोर्ट का कारोबार संभालती हैं.

रियल एस्टेट में भी कमल किशोर का अच्छा दबदबा है. डीएसएल प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड, लेबर्नम रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड और ऑस्ट्रिच बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियां उनके पास हैं, जिनमें दिल्ली के पॉश इलाकों जैसे वसंत विहार में फैमिली प्रॉपर्टीज भी शामिल है. इसके अलावा कैल एंड लोकेल फूड्स इंडिया लिमिटेड हेल्थ फूड्स बनाती है और गुड लाइफ फॉरेस्ट्री लिमिटेड सस्टेनेबल रिसोर्सेस पर फोकस करती है. इन सब वेंचर्स से उनके पोर्टफोलियो में इक्विटी स्टेक्स और रियल एस्टेट की वैल्यू बढ़ने से करीब 300 से 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फायदा होता है. कमल किशोर भले ही खुद एक छोटे से परिवार से थे लेकिन उन्होंने अपने कारोबार को कभी छोटा नहीं समझा और इसे बढ़ाने पर हमेशा फोकस किया.

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