हार्ट अटैक में जान बचा सकती है ये दवा, सागर के डॉक्टर की चौंकाने वाली खोज, घबराहट तुरंत कम

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Heart attack treatment: सागर के डॉक्टर सर्वेश जैन की इत्तेफाक से हुई रिसर्च ने हार्ट अटैक मरीजों के दर्द और घबराहट को तुरंत कम करने वाली तकनीक खोजी है. लिग्नोकेन इंजेक्शन से हृदय की धड़कन नियंत्रित होती है और मृत्यु दर घट सकती है. यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल “बायो इनफॉरमेशन” में प्रकाशित हुआ.

सागर. सागर की डॉक्टर के द्वारा इत्तेफाक से ऑब्जर्व कर की गई एक रिसर्च को अंतर्राष्ट्रीय जनरल ने पब्लिश किया है. हार्ट अटैक के मरीज को बेहोशी की दवा का इंजेक्शन धड़कन और घबराहट को कम करता है, जिसकी वजह से हार्ट अटैक से पीड़ित मरीजों की मृत्यु दर में कमी आ सकती है और यह बेहोशी की दवा किसी की जान बचा सकता है.

सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के एनेस्थीसिया विभाग के विभाग अध्यक्ष और प्रोफेसर डॉक्टर सर्वेश जैन बताते हैं कि  बायो इनफॉरमेशन जनरल में मेरा एक शोध पब्लिश हुआ है जिसमें मैंने यह बताया है कि जब किसी को हार्ट अटैक आया हुआ रहता है, उसके सीने में तेज दर्द हो रहा होता है वह घबराहट में होता है उस समय शरीर के कुछ पॉइंट्स पर लिग्नोकेन नाम की सुन्नपन की दवाई इंजेक्ट कर दी जाए. तो मरीज को दर्द में तुरंत राहत मिलती है. घबराहट वगैरा सब कुछ कम हो जाता है और सबसे अच्छी बात तो यह रहती है कि दर्द और घबराहट की वजह से, जो हृदय गति 100 के ऊपर रहती है.

वह दर्द में आराम लगने से कम हो जाती है, जो हृदय को 1 मिनट के अंदर 100 बार धड़कता रहता है वह उदाहरण के तौर पर 70 बार धड़कने लगेगा, जिससे हार्ट का वर्कलोड कम हो जाता है, जितनी ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही होती है फिर कम ऑक्सीजन में भी गुजारा हो जाता है. जिसकी वजह से मृत्यु दर में भी कमी आ सकती है और हार्ट अटैक के एरिया में जो नुकसान होने वाला है. उसमें भी कमी आ सकती है बायो इनफॉरमेशन जनरल में अक्टूबर के अंत में यह शोध प्रकाशित हुआ है.

डॉक्टर सर्वेश जैन बताते हैं कि यह इत्तेफाक से हुआ ऑब्जरवेशन है मेरा, एक हार्ट अटैक के मरीज को तेज दर्द था. उसके फेफड़ों में पानी भरा हुआ था. उसे व्यक्ति के फेफड़ों से पानी निकालने के लिए जब ट्यूब डालने के लिए मैंने लिग्नोकेन दवा से शून्य किया तो उसे स्थान पर ट्यूब डालने से पहले ही उस व्यक्ति को दर्द से काफी राहत मिल गई, तो यह मुझे अजीब सा लगा जो समझ नहीं आया

फिर इस मामले में पता चला कि DSCB करके एक तकनीक रहती है. ललितपुर के डॉक्टर अरविंद दिवाकर ने इसकी खोज की थी उनसे चर्चा हुई. उनके मार्गदर्शन में उनके अनुसंधान का लाभ लेते हुए अनुभव का लाभ लेकर कई सारे मरीजों में किया ऑब्जर्व किया गया. यह इत्तेफाक से पकड़ में आई खोज थी, फिर बाद में जितने भी लोगों पर इसका इस्तेमाल किया तो तकरीबन सभी में कंसिस्टेंट रिजल्ट आए किसी को कोई साइड इफेक्ट नहीं हुआ.

Anuj Singh

Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digital), bringing over Two Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has worked a…और पढ़ें

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हार्ट अटैक में जान बचा सकती है ये दवा, सागर के डॉक्टर की चौंकाने वाली खोज

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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