ये तो सचमुच खतरनाक, लेकिन खुद बताएं कैसे, हर तीसरे बच्चे को नहीं पता उसे चश्मे की जरूरत

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Eye Problems in Kanpur Children : कई बच्चे ब्लैकबोर्ड साफ नहीं देख पाते. आंखों में जलन, सूखापन और थकान की शिकायत आम है. 18 साल के बच्चों में ये समस्या सबसे ज्यादा पाई गई. कम उम्र में चश्मा लगना, आंखों का तिरछापन और नजर का तेजी से गिरना अब आम होता जा रहा है. इसकी वजह सिर्फ स्क्रीन नहीं, बल्कि बदलती लाइफस्टाइल भी है, जैसे दिन में तीन घंटे से ज्यादा मोबाइल चलाना, बाहर खेलना लगभग बंद होना और फास्ट फूड की आदत.

कानपुर. बच्चों की आंखों पर मंडराता खतरा अब सिर्फ आशंका नहीं, बल्कि हकीकत बन चुका है. कानपुर में मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप की बढ़ती लत ने बच्चों की आंखों से नींद भी छीनी है और नजर भी कमजोर कर दी है. GSVM मेडिकल कॉलेज से जुड़े नेत्र रोग विभाग में हुए एक बड़े अध्ययन में चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है. इस अध्ययन के अनुसार हर तीन में से एक बच्चा ऐसा है, जिसे खुद यह तक नहीं पता कि उसकी आंखों को चश्मे की जरूरत है. 29 स्कूलों के जांच नतीजे देख डॉक्टर भी हैरान रह गए. यह अध्ययन किसी एक स्कूल या इलाके तक सीमित नहीं था. शहर के 29 अलग-अलग स्कूलों में जाकर 5 से 18 वर्ष तक के करीब 10 हजार बच्चों की आंखों की जांच की गई. जांच में सामने आया कि कई बच्चे ब्लैकबोर्ड साफ नहीं देख पा रहे थे. आंखों में जलन, सूखापन और थकान की शिकायत आम थी, लेकिन बच्चों ने यह बात घर में कभी बताई ही नहीं. डॉक्टरों के मुताबिक इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि मोबाइल स्क्रीन पर सब कुछ साफ दिख जाता है, इसलिए बच्चों को अपनी कमजोरी का अंदाजा ही नहीं लग पाता.

ये सबसे बड़ी समस्या

नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी मोहन बताती हैं कि जांच में दो बड़ी समस्याएं सबसे ज्यादा सामने आईं.पहली समस्या है मायोपिया यानी पास की चीजें ठीक दिखना लेकिन दूर की नजर कमजोर होना. दूसरी गंभीर दिक्कत है ड्राई आई सिंड्रोम, जिसमें आंखों की नमी धीरे-धीरे खत्म होने लगती है. लगातार स्क्रीन देखने और कम पलक झपकाने की आदत ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है. कई बच्चों की हालत इतनी खराब थी कि उन्हें आई ड्रॉप्स देनी पड़ी और नियमित फॉलो-अप की सलाह भी दी गई. डॉ. शालिनी मोहन के अनुसार सर्दियों की शुरुआत के साथ प्रदूषण ने बच्चों की आंखों की परेशानी को और गंभीर कर दिया है. धूल-धुआं, ठंडी हवा और बंद कमरों में घंटों स्क्रीन देखना—इन सबने मिलकर आंखों पर “डबल अटैक” किया है.

20-20-20 नियम बना सकता है कवच

इस बढ़ते खतरे के बीच एक राहत की खबर भी है. डॉक्टर बच्चों और बड़ों दोनों को 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह दे रही हैं. इसके तहत हर 20 मिनट स्क्रीन देखने के बाद 20 सेकंड का ब्रेक लें और 20 फीट दूर किसी चीज को देखें. यह छोटा सा उपाय आंखों की मांसपेशियों को आराम देता है और सूखापन कम करता है. बच्चों को पढ़ाई के लिए मोबाइल की जगह बड़ी स्क्रीन, जैसे लैपटॉप का इस्तेमाल करने, रोज कुछ समय धूप में बाहर खेलने और आंखों की नियमित जांच कराने की सलाह दी गई है. समय रहते ध्यान दिया जाए, तो बच्चों की आंखों को इस डिजिटल खतरे से बचाया जा सकता है.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें

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हर तीसरे बच्चे को नहीं पता उसे चश्मे की जरूरत, ये तो सचमुच खतरनाक

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