यह कोई मामूली घास नहीं, सेहत के लिए है ‘अमृत’, बुखार-बीपी से लेकर दर्द में रामबाण, फायदे कर देंगे हैरान

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Bichhu Ghaas ke Fayde: बिच्छू घास जिसे कुमाऊं में सिसौंण कहलाती है, औषधीय गुणों से भरपूर है. इसका प्रयोग बुखार को कम करने, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने और नसों के दर्द या कमर दर्द जैसी तकलीफों में किया जा सकता है.

नैनीताल. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में पाई जाने वाली बिच्छू घास, जिसे छूते ही झनझनाहट और जलन होती है, अब लोगों की जिज्ञासा का केंद्र बनती जा रही है. वैज्ञानिक रूप से Urtica Dioica और अंग्रेज़ी में Nettle के नाम से जानी जाने वाली यह घास दिखने में भले ही डरावनी लगे, लेकिन इसमें औषधीय गुणों का भंडार छिपा है.  कुमाऊं क्षेत्र में इसे ‘सिसौंण’ कहा जाता है और कई जगह इसके पत्तों से सब्जी भी बनाई जाती है, जो शरीर को गर्म रखती है और रक्त शुद्ध करने में मदद करती है. वहीं पहाड़ी इलाकों में इसके सूप को बनाने की परंपरा भी है. बिच्छू घास में आयरन, कैल्शियम, और विटामिन सी की प्रचुर मात्रा होती है, जो जोड़ों के दर्द, त्वचा रोग और बालों के झड़ने जैसी समस्याओं में फायदेमंद है. वहीं, ज्योतिष के अनुसार यह घास नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करने में भी उपयोगी मानी जाती है.

कई औषधीय गुणों से भरपूर है बिच्छू

नैनीताल स्थित डीएसबी कैंपस के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर ललित तिवारी बताते हैं कि बिच्छू घास में विटामिन A, B, C और K पाए जाते हैं. इसका प्रयोग बुखार को कम करने, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने और नसों के दर्द या कमर दर्द जैसी तकलीफों में किया जा सकता है. विदेशों में भी यह घास काफी लोकप्रिय है. मिस्र में इसे ऑर्थराइटिस के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है, जबकि प्राचीन रोम में इसे शरीर को गर्म रखने वाला पौधा माना जाता था. वहीं उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में इस घास का सूप बनाकर पिया जाता है, जिसे बिच्छू घास का काढ़ा भी कहा जाता है. इसकी तासीर गरम होती है. जो स्वास्थ के लिए बेहद लाभदायक होती है.

काढ़ा और चाय है बेहद लाभदायक

बिच्छू घास का उपयोग अब हर्बल चाय के रूप में भी तेजी से बढ़ रहा है. इसके पत्तों से तैयार चाय एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है, जो शरीर को डिटॉक्स करने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है. सिर्फ औषधीय नहीं, बल्कि ज्योतिष में भी इसका विशेष महत्व बताया गया है. कहा जाता है कि इसकी जड़ में शनि का वास होता है. बिच्छू घास की जड़ से बनी अंगूठी धारण करने से शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और नकारात्मक ऊर्जा से बचाव होता है. यानी, जिसे कभी लोग ज़हर समझकर दूर रहते थे, वही बिच्छू घास अब अमृत का रूप ले रही है, सर्दियों में सूप, गर्मियों में चाय और हर मौसम में सेहत के लिए यह बेहद लाभदायक है.

Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में नई दुनिया अखबार से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों …और पढ़ें

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में नई दुनिया अखबार से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों … और पढ़ें

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यह कोई मामूली घास नहीं, सेहत के लिए है ‘अमृत’, बुखार दर्द में रामबाण

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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