दवा नहीं, ये है पाइल्स का सटीक इलाज! बिलासपुर के एक्सपर्ट ने बताया सबकुछ

Piles Ka ijaj : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, गलत खानपान और अनियमित दिनचर्या के कारण पाइल्स (बवासीर) की समस्या तेजी से बढ़ रही है. आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. मनोज भगत का कहना है कि पाइल्स को आयुर्वेद में “अर्श” कहा जाता है और इसका मुख्य कारण आहार व दिनचर्या में असंतुलन है. यदि व्यक्ति आयुर्वेद के अनुसार भोजन के छह रसों का संतुलन बनाए रखे, तो शरीर स्वस्थ रहता है और पाइल्स जैसी समस्या से बचा जा सकता है.

आयुर्वेद में पाइल्स को कहा जाता है अर्श

डॉ. मनोज भगत बताते हैं कि आयुर्वेद में पाइल्स को अर्श रोग कहा गया है. यह बीमारी मुख्य रूप से लंबे समय तक गलत खानपान, देर से भोजन करना, अत्यधिक तला-भुना और मसालेदार भोजन लेने से उत्पन्न होती है. लोग अक्सर स्वाद के चक्कर में शरीर की जरूरतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका परिणाम बवासीर के रूप में सामने आता है.

वात और पित्त बढ़ाने वाला भोजन बनता है कारण

डॉक्टर के अनुसार पाइल्स का मुख्य कारण वात और पित्त दोष का बढ़ना है. अत्यधिक रुखा-सूखा, तीखा, मिर्च-मसाले वाला भोजन करने से यह समस्या गंभीर हो जाती है. वहीं, इसे संतुलित करने के लिए लोग न तो नारियल, फल और ठंडे तासीर वाले आहार का सेवन करते हैं, जिससे पाचन तंत्र कमजोर पड़ जाता है और पाइल्स की समस्या पैदा होती है.

छह रसों का संतुलन जरूरी

आयुर्वेद के अनुसार भोजन में छह रसों का संतुलन होना आवश्यक है — मधुर, अम्ल, लवण, कटु, तिक्त और कषाय.
डॉ. मनोज भगत बताते हैं कि यदि व्यक्ति इन सभी रसों को संतुलित मात्रा में अपने दैनिक आहार में शामिल करता है, तो शरीर स्वस्थ रहता है और पाइल्स जैसी समस्याएं दूर रहती हैं.

घी और तेल का सीमित सेवन भी है जरूरी

डॉक्टर का कहना है कि भोजन में निश्चित मात्रा में तेल और घी का सेवन करना बेहद जरूरी है. दाल-चावल में घी लेने से शरीर में लुब्रिकेशन बना रहता है, जिससे कब्ज की समस्या नहीं होती और बवासीर का खतरा कम हो जाता है.

घर पर पाइल्स में राहत के आयुर्वेदिक उपाय

यदि किसी व्यक्ति को बवासीर हो गई है और वह डॉक्टर के पास नहीं जा पा रहा है, तो आयुर्वेदिक उपायों से घर पर भी राहत मिल सकती है—

• त्रिफला गुग्गुल
दिन में दो बार 2-2 गोली लेने से पाचन सुधरता है और पाइल्स में राहत मिलती है.

• अभयारिष्ट (Abhayarishta)
यह एक आयुर्वेदिक सिरप है जो पाचन तंत्र को मजबूत करता है. तीन से चार चम्मच, दिन में दो बार लिया जा सकता है.

• जात्यादि तेल (Jatyadi Oil)
गुदा द्वार में सूजन, जलन और घाव होने पर इसे बाहरी रूप से लगाने से काफी राहत मिलती है.

• गुनगुने पानी की सिट्ज बाथ
अधिक दर्द होने पर गुनगुने पानी में नमक डालकर 10–15 मिनट तक बैठने से दर्द और सूजन में आराम मिलता है.

संतुलित आहार और दिनचर्या ही है असली इलाज

डॉ. मनोज भगत का कहना है कि पाइल्स से बचाव और इलाज के लिए दवाओं के साथ-साथ संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और संयमित जीवनशैली अपनाना सबसे जरूरी है. आयुर्वेद के नियमों का पालन कर इस समस्या से लंबे समय तक राहत पाई जा सकती है.

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