बंजर भूमि पर उगता है ये इम्यूनिटी बूस्टर, इस जड़ीबूटी का घड़े जैसा फूल, बुखार, पाइल्स का पक्का इलाज

Last Updated:

Monsoon Health Tips: छत्तीसगढ़ में इसे गुमी भाजी कहा जाता है. वहां लोग इसकी सब्जी भी बनाते हैं. खासकर आदिवासी इसे बड़े चाव से खाते हैं. मानसून सीजन में ये उनकी सेहत का राज है..

हाइलाइट्स

  • गुमी भाजी छत्तीसगढ़ में बुखार और बवासीर का इलाज है
  • इम्यूनिटी बढ़ाने में गुमी भाजी का नियमित सेवन लाभकारी है
  • बंजर भूमि में उगती है गुमी भाजी, स्वाद नीम की तरह कड़वा
Health Tips: छत्तीसगढ़ की धरती औषधीय वनस्पतियों के मामले में बहुत समृद्ध मानी जाती है. यहां परंपरागत रूप से कई जड़ी-बूटियों और साग-भाजियों का उपयोग औषधीय गुणों के लिए किया जाता रहा है. ऐसी ही एक खास भाजी है ‘गुमी भाजी’, जिसे स्थानीय लोग भाजी के रूप में जानते हैं, जबकि आयुर्वेद शास्त्र में इसे “द्रोण पुष्पि” कहा गया है.

रायपुर स्थित श्री नारायण प्रसाद अवस्थी शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राजेश सिंह बताते हैं कि गुमी भाजी का उपयोग सदियों से बुखार और बवासीर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में किया जाता रहा है. इसमें प्राकृतिक रूप से एंटी फंगल और एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को फंगल इन्फेक्शन और बैक्टीरिया जनित बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं.

इम्यूनिटी बूस्टर है ये…
डॉ. राजेश सिंह का कहना है कि गुमी भाजी का नियमित सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और शरीर में बैक्टीरिया या फंगल संक्रमण से जुड़ी अन्य बीमारियों को रोकने की ताकत भी बढ़ती है. इसलिए इसे छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में बहुत उपयोगी और बहुपयोगी वनस्पति माना जाता है.

बंजर जमीन में उगती है…
भाजी का पुष्प घड़े के आकार का होता है, इसी वजह से संस्कृत में इसका नाम ‘द्रोण पुष्पि’ रखा गया है. यह वनस्पति विशेष रूप से उन इलाकों में पाई जाती है, जहां खेती योग्य जमीन नहीं होती या बंजर भूमि होती है. गुमी भाजी प्राकृतिक रूप से उगती है और किसी भी तरह की देखभाल की आवश्यकता नहीं होती.

स्वाद नीम की तरह पर सब्जी स्वादिष्ट
गुमी भाजी का स्वाद नीम की तरह कड़वा होता है, लेकिन पकाने के बाद इसका कड़वापन कम हो जाता है और यह स्वाद में काफी बेहतर लगती है. औषधीय प्रयोग के लिए गुमी भाजी का रस निकालकर सेवन किया जाता है, जबकि भोजन के रूप में इसे पकाकर साग की तरह खाया जाता है. छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में यह भाजी खासतौर पर मानसून के दिनों में बड़े चाव से बनाई जाती है.

ये चिकित्सा पद्धति का हिस्सा…
डॉ. राजेश सिंह ने आगे बताया, गुमी भाजी शरीर की गर्मी को संतुलित करने, पाचन को दुरुस्त रखने और खून को शुद्ध करने में भी लाभकारी मानी जाती है. छत्तीसगढ़ के लोकजीवन में यह भाजी न केवल भोजन का हिस्सा है, बल्कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धति का अभिन्न अंग भी है.

homelifestyle

बंजर भूमि पर उगता है ये इम्यूनिटी बूस्टर, घड़े जैसा फूल, बुखार-पाइल्स होगा दूर!

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

Source link

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *