दवाओं से ज्यादा असरदार! जोड़ो के दर्द को चुटकियों में कर देगी गायब, कमाल की है ये पहाड़ी घास

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Bichchu Booti Ke Fayde: उत्तराखंड की पहाड़ियों में छिपा एक अनोखा प्राकृतिक खजाना है बिच्छू घास. जो दिखने में भले ही डरावनी लगे, लेकिन यह दर्द, सूजन और जोड़ो की समस्या में चमत्कारिक असर देती है. जानें इसके इस्ते…और पढ़ें

जोड़ो के दर्द को चुटकियों में कर देगी गायब, कमाल की है ये पहाड़ी घास...बिच्छू घास के पत्ते 
बागेश्वर: उत्तराखंड की पहाड़ियों में प्रकृति ने कई अनमोल खजाने छिपाए हैं, जिनके बारे में जानकर शहरों के लोग भी हैरान हो जाते हैं. यहां के ग्रामीण इलाकों में आज भी कई बीमारियों का इलाज महंगी दवाइयों के बजाय आसपास उगने वाली जड़ी-बूटियों और वनस्पतियों से किया जाता है. ऐसी ही एक जड़ी-बूटी है बिच्छू घास (Nettle Leaf), जिसका नाम सुनते ही लोगों को जलन और चुभन याद आती है. लेकिन यह घास दर्द और सूजन को दूर करने की अद्भुत क्षमता रखती है.

बिच्छू बूटी का ऐसे करें इस्तेमाल
स्थानीय जानकार किशन मलड़ा ने लोकल 18 को बताया कि जो लोग शरीर के अंदरूनी दर्द, जोड़ो में दर्द या मांसपेशियों की जकड़न से परेशान हैं, वे बिच्छू घास का उपयोग कर सकते हैं. इसे दर्द वाली जगह पर हल्के-हल्के पांच बार झटका देने से वहां हल्की गर्माहट महसूस होती है, जो ब्लड सर्कुलेशन तेज करती है और दर्द कम होने लगता है. बिच्छू घास में एंटी-इन्फ्लेमेटरी और दर्द कम करने वाले गुण मौजूद हैं, इसलिए यह प्राकृतिक पेनकिलर की तरह काम करती है.

इसमें आयरन, कैल्शियम और अन्य मिनरल्स भी प्रचुर मात्रा में होते हैं और यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करती है. गठिया और पुराने जोड़ो के दर्द में यह बेहद कारगर मानी जाती है. आयुर्वेद में इसे खून साफ करने और त्वचा संबंधी रोगों में भी उपयोगी माना गया है.

आज भी पहाड़ों में इस्तेमाल होती है बिच्छू बूटी
बागेश्वर और आसपास के गांवों में लोग आज भी बिच्छू घास का इस्तेमाल घरेलू इलाज में करते हैं. पहले जब डॉक्टर या दवाइयों तक पहुंच आसान नहीं थी, तो लोग इसी घास से दर्द और सूजन का इलाज करते थे. कई ग्रामीण महिलाएं इसे प्राकृतिक पेनकिलर कहती हैं और उनका कहना है कि सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह तुरंत असर दिखाती है.
इन बातों का रखें ख्याल
हालांकि, बिच्छू घास के औषधीय गुणों के बावजूद इसका उपयोग करते समय सावधानी जरूरी है. इसकी पत्तियों और तनों पर छोटे-छोटे रोम होते हैं, जो छूने पर जलन और खुजली पैदा करते हैं. इसलिए इसका प्रयोग सीमित मात्रा में और परंपरागत तरीके से ही करना चाहिए. त्वचा संबंधी गंभीर एलर्जी या संवेदनशीलता वाले लोग इसे इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें.
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बिच्छू बूटी पर हो रहा शोध
आज बिच्छू घास केवल ग्रामीण घरेलू उपचार तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह आयुर्वेदिक शोध का हिस्सा बन रही है. कई हर्बल दवाइयों और चाय में इसका उपयोग होने लगा है. खासकर यूरोप में इसे डिटॉक्स ड्रिंक के रूप में काफी लोकप्रियता मिल चुकी है. भले ही यह घास दिखने या छूने में डराने वाली लगे, लेकिन यह पहाड़ की धरती का अनमोल तोहफा है. सही तरीके और सावधानी के साथ इसका इस्तेमाल शरीर के अंदरूनी दर्द से राहत दिलाने में महंगी दवाइयों से भी अधिक असरदार साबित हो सकता है.

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