प्रकृति में उर्जा का है स्रोत है यह जड़ी बूटी, अनिद्रा, सूजन और कई बीमारियों से दिलाता है निजात, यहां मिलता है ये पौधा

बलिया: औषधियों यानी जड़ी बूटियों की दुनिया में एक ऐसा भी नाम ऐसा है, जो सदियों से ताकत, संतुलन और सेहत का अद्भुत मेल बना हुआ है. हम सभी इसको अश्वगंधा के नाम से जानते हैं. आज के भागदौड़, तनाव और अनियमित दिनचर्या के बीच एक बार फिर ये संजीवनी समान इन औषधियों के तरफ लोग रुख कर रहे हैं. सबसे पहले बात तनाव और चिंता की करें, तो अश्वगंधा शरीर को मानसिक दबाव से निपटने में बहुत मदद करता है.

उर्जा का है खजाना

बलिया की फेमस आयुर्वेदाचार्य सात साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ. प्रियंका सिंह के अनुसार, अश्वगंधा मतलब घोड़े की तरह गंध देने वाला (अश्व यानी घोड़ा और गंध का अर्थ महक) यह घोड़े जैसी स्फूर्ति देने देता है. इसकी पहचान भूरी मजबूत जड़ें, नन्हे पीले फूल और लाल बेरी से होती हैं. इसको सेहत, ताकत और ऊर्जा का प्राकृतिक खजाना भी कहा जाता है. यह कोर्टिसोल हार्मोन के स्तर को संतुलित करने में सहायक हो सकता है.

अश्वगंधा गहरी और सुकूनभरी नींद लाने में सहूलियत प्रदान करता है. जो लोग अपने आप को फिटनेस रखना चाहते हैं, ऐसे लोगों के बीच भी इसका क्रेज कम नहीं है. क्योंकि यह मसल्स स्ट्रेंथ बढ़ाने, स्टैमिना सुधारने और रिकवरी तेज करने में बहुत उपयोगी होता है. हालांकि, यह पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन स्तर, शुक्राणुओं की संख्या और गतिशीलता में सुधार की संभावना में भी काफी मददगार है. इससे यौन स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता को भी सपोर्ट मिलता है.

मिलती है मानसिक शांति

इससे आपको तनाव, घबराहट और मूड स्विंग जैसी समस्याओं में राहत मिलती है. कई लोग इसे मानसिक शांति का प्राकृतिक मित्र भी कहते हैं. अश्वगंधा इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में भी खास पहचान रखता है. इसका अगर नियमित और सही मात्रा में सेवन किया जाए, तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर हो सकती है. जी हां यह बदलते मौसम में बार-बार होने वाले संक्रमण से भी काफी बचाव कर सकता हैं. अश्वगंधा अनिद्रा से जूझ रहे लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. यह शरीर और दिमाग को शांत करने में बेहद लाभकारी और गुणकारी है.

कॉलेस्ट्राल कम करने में सहायक

अश्वगंधा याददाश्त, फोकस और संज्ञानात्मक क्षमता को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. यहीं नहीं, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को को भी संतुलित रखने में यह सहायक है. इसमें सूजनरोधी गुण होते हैं, जो गठिया और जोड़ों के दर्द में राहत पहुंचा सकते हैं. अश्वगंधा का सेवन चूर्ण, टैबलेट या कैप्सूल के रूप में किया जाता है. इसे आमतौर पर रात में गुनगुने दूध के साथ लेना बेहद उपयोगी साबित होता हैं. हालांकि, इसे शुरू करने से पहले विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह जरूर लें, क्योंकि उम्र और बीमारी के हिसाब से सही डोज एक एक्सपर्ट ही बता सकता है.

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