यूपी की इस लड़की ने अमेरिका में मचाया धमाल, आठवीं के बाद छोड़ दी थी पढ़ाई

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Success Story : सहारनपुर की तंग गलियों से निकलकर सिलिकॉन वैली के बोर्डरूम तक पहुंचने वाली हर्षिता अरोड़ा आज उन युवाओं के लिए मिसाल हैं, जो लीक से हटकर कुछ बड़ा करने का माद्दा रखते हैं. स्‍कूल ड्रॉप आउट हर्षिता अब स्टार्टअप एक्सेलेरेटर वाई कॉबिनेटर के इतिहास में सबसे कम उम्र की जनरल पार्टनर बन गई हैं.

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हर्षिता ने 16 साल की उम्र में क्रिप्टो पोर्टफोलियो ट्रैकर ऐप बनाया था.

नई दिल्‍ली. अगर आपके पास हुनर है तो डिग्रियां महज कागज के टुकड़े बनकर रह जाती हैं. उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की हर्षिता अरोड़ा ने इस बात को न केवल सच कर दिखाया है. आठवीं के बाद ही स्‍कूल को बाय-बाय बोलने वाली हर्षिता ने दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित स्टार्टअप एक्सेलेरेटर वाई कॉबिनेटर (Y Combinator) में अब जनरल पार्टनर बन गई हैं. वे वाई कॉबिनेटर के इतिहास में सबसे कम उम्र की जनरल पार्टनर हैं.

महज 25 साल की उम्र में हर्षिता उस मुकाम पर हैं, जहां पहुंचने के लिए अनुभवी वेंचर कैपिटलिस्ट दशकों तक संघर्ष करते हैं. हर्षिता के पिता रवींद्र सिंह अरोड़ा एक ऑटो फाइनेंसर हैं और मां जसविंदर कौर गृहिणी. हर्षिता ने आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई पाइनवुड स्कूल से की. उनका मन पारंपरिक किताबों से ज्यादा कंप्यूटर कोडिंग में रमता था. 13 साल की उम्र में उन्होंने कोडिंग सीख ली थी. 15 साल की उम्र में हर्षिता ने स्कूल छोड़ने का फैसला किया.

16 की उम्र में बनाया वर्ल्ड-फेमस ऐप

हर्षिता की पहली बड़ी कामयाबी जनवरी 2018 में आई. मात्र 16 साल की उम्र में उन्होंने एक ऐसा क्रिप्टो पोर्टफोलियो ट्रैकर ऐप बनाया जो 32 देशों की 1000 से ज्यादा क्रिप्टोकरेंसी की लाइव अपडेट देता था. लॉन्च के एक महीने के भीतर ही यह ऐप Apple App Store के सबसे अधिक मांग वाले पेड ऐप्स की लिस्ट में शामिल हो गया. इस उपलब्धि के लिए उन्हें भारत के प्रतिष्ठित ‘बाल शक्ति पुरस्कार’ से भी नवाजा गया.

इसके बाद हर्षिता ने अमेरिका जाने का मन बनाया. उनको को प्रतिष्ठित O-1 वीजा मिला और वह सैन फ्रांसिस्को चली गईं. उन्होंने Y Combinator में आवेदन किया, लेकिन कोविड के कारण उनका पहला स्टार्टअप आइडिया महज तीन हफ्तों में फेल हो गया.

सड़कों पर खड़े हो लिया अनुभव, बना दी 6300 करोड़ की कंपनी

हर्षिता ने कैलिफोर्निया के ट्रक स्टॉप्स पर हफ्तों का समय बिताया. उन्होंने ट्रक ड्राइवरों से बात की और समझा कि अरबों डॉलर की यह इंडस्ट्री आज भी 1990 की पुरानी तकनीक और धोखाधड़ी वाले पेमेंट सिस्टम पर चल रही है. इसी समस्या के समाधान के लिए उन्होंने AtoB की स्थापना की. इसे ‘ट्रकिंग इंडस्ट्री का Stripe’ कहा जाता है. उन्होंने एक आधुनिक फ्यूल कार्ड बनाया जिसने पेमेंट की प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बना दिया.

आज AtoB एक Series C कंपनी है जिसकी वैल्यूएशन करीब 750 मिलियन डॉलर (लगभग ₹6,300 करोड़) है. यह कंपनी अमेरिका में 30,000 से अधिक फ्लीट मालिकों को अपनी सेवा दे रही है.

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