सुंदर ही नहीं सेहत के लिए भी फायदेमंद है यह फूल, कई रोगों का करता है नाश, घर में आसानी से उग जाता है पौधा

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Sadabahar Flower Health Benefits: सदाबहार एक सामान्य दिखने वाला पौधा है, लेकिन आयुर्वेद में इसे बेहद उपयोगी औषधीय द्रव्य माना गया है. यह रक्त शुद्धि, त्वचा स्वास्थ्य और शरीर के अंदरूनी संतुलन को बनाए रखने में सहायक होता है. इसके पत्ते और फूल घाव, त्वचा रोग, मासिक धर्म की समस्या, नाक से खून आना और मधुमेह जैसी समस्याओं में सहायक रूप से उपयोग किए जाते हैं.

सदाबहार एक ऐसा पौधा है जो लगभग हर घर और बगीचे में आसानी से उग जाता है. इसके फूल साल भर खिलते रहते हैं, इसी कारण इसे सदाबहार कहा जाता है. देखने में आकर्षक यह पौधा केवल सजावटी ही नहीं, बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर भी है. आयुर्वेद में सदाबहार को एक प्रभावशाली औषधीय द्रव्य माना गया है. इसका उपयोग कई रोगों के उपचार में किया जाता है और यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है.

सदाबहार का पौधा

आयुर्वेद के अनुसार, सदाबहार शरीर के रक्त को साफ करने, त्वचा को स्वस्थ रखने और अंदरूनी संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है. इसके पत्ते और फूल दोनों ही औषधीय गुणों से भरपूर माने जाते हैं. प्राचीन काल से इसका उपयोग घाव भरने, त्वचा रोगों, रक्तस्राव, मासिक धर्म संबंधी समस्याओं और मधुमेह में सहायक रूप से किया जाता रहा है. नियमित और संतुलित उपयोग से सदाबहार शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में भी मदद करता है.

सदाबहार का पौधा

वैद्य रामपाल के अनुसार सदाबहार घाव भरने में प्रभावी रूप से सहायक होता है. यह घाव को जल्दी ठीक करने और सूजन कम करने में मदद करता है. इसके लिए 6 से 8 ताजे सदाबहार के पत्ते लें और उन्हें अच्छी तरह पीस लें. अब इस पेस्ट में आधा चम्मच हल्दी मिलाएं. तैयार लेप को साफ घाव पर लगाएं. दिन में दो या तीन बार इसका प्रयोग करने से घाव तेजी से भरता है और संक्रमण का खतरा भी कम होता है.

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सदाबहार का पौधा

यह मासिक धर्म संबंधी समस्याओं में उपयोगी माना जाता है. जिन महिलाओं को मासिक धर्म समय पर नहीं आता या कम-ज्यादा होता है, उनके लिए सदाबहार लाभकारी हो सकता है. इसके लिए 6 से 8 सदाबहार के पत्ते 200 मिलीलीटर पानी में उबालें. जब पानी एक चौथाई रह जाए, तो इसे छान लें. तैयार काढ़े में से 20 से 25 मिलीलीटर दिन में दो बार पिएं. यह प्रयोग नियमित रूप से लगभग तीन महीने तक किया जाता है, जिससे संतुलन में सुधार देखा जाता है.

सदाबहार का पौधा

नाक से खून आने की समस्या में भी सदाबहार उपयोगी माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार इसका सही तरीके से प्रयोग करने पर राहत मिल सकती है. इसके लिए सदाबहार के फूल का रस तीन बूंद और अनार के कोमल फूल का रस तीन बूंद लें. दोनों रस को अच्छी तरह मिलाएं. तैयार मिश्रण की तीन-तीन बूंद नाक के दोनों छिद्रों में डालें. इस उपाय से नाक से खून आना कम होता है और शीतलता मिलती है. जरूरत पड़ने पर यह प्रयोग चिकित्सकीय सलाह से किया जाता है.

सदाबहार का पौधा

इसके अलावा सदाबहार मुंहासों और त्वचा की देखभाल में भी सहायक माना जाता है. यह त्वचा को साफ करने और संक्रमण कम करने में मदद करता है. इसके लिए सदाबहार के ताजे पत्ते, नीम के पत्ते और थोड़ी हल्दी लें. तीनों को अच्छी तरह पीसकर पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को मुंहासों वाली जगह पर लगाएं. सप्ताह में तीन बार इसका प्रयोग करें और 15 से 20 मिनट बाद साफ पानी से धो लें. नियमित उपयोग से त्वचा साफ, स्वस्थ और निखरी हुई रहती है.

सदाबहार का पौधा

वैद्य के अनुसार सदाबहार का उपयोग मधुमेह में सहायक रूप से किया जाता है. इसके नियमित और सीमित प्रयोग से रक्त शर्करा संतुलन में मदद मिल सकती है. इसके लिए 2 से 3 ग्राम सूखे सदाबहार के पत्ते 200 मिलीलीटर पानी में उबालें. जब पानी थोड़ा रह जाए, तो इसे छान लें. तैयार काढ़े में से 20 से 25 मिलीलीटर सुबह खाली पेट 21 दिन तक लें. यह मुख्य दवा नहीं है, बल्कि सही खान-पान और नियमित दिनचर्या के साथ सहायक रूप में ही प्रयोग किया जाता है.

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सुंदर ही नहीं सेहत के लिए भी फायदेमंद है यह फूल, कई रोगों का असरदार उपाय

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