ये मछली 35% तक कम कर सकती है हार्ट अटैक का रिस्क! दिल से लेकर जोड़ों तक, जानें फायदे

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Healthiest Fish To Eat: मछली में ओमेगा- 3 के साथ कई सारे माइक्रो न्यूट्रिएंट्स होते हैं. हालांकि हर मछली में मात्रा कम या ज्यादा हो सकती है. ऐसे में दक्षिण भारत में मिलने वाली मछली की जिलिपी प्रजाती सेहत के लिए बहुत साबित होती है. एक्सपर्ट बताते हैं कि इसके सेवन से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का रिस्क कम होता है, साथ ही ये मछली दिल, दिमाग और आंखों के साथ जोड़ों के लिए भी असरदार दवा का काम करती है.

बिना साइड इफेक्ट्स वाले प्रोटीन युक्त खाने की सूची में मछली सबसे ऊपर है. क्योंकि रेड मीट खाने को लेकर डॉक्टर चाहे जितनी भी चेतावनी दें, मछली को लेकर कोई खास आपत्ति नहीं होती. इसकी वजह यह है कि लाल मांस की तरह मछली खाने से कोई नुकसान नहीं होता. उल्टा, मछली खाने के कई फायदे हैं.

मछली में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है, साथ ही यह अन्य माइक्रोन्यूट्रिएंट्स से भी भरपूर होती है. मछली में अच्छी मात्रा में हेल्दी फैट भी पाया जाता है. इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड हमारे लिए बहुत जरूरी है.

हालांकि इसकी जरूरत बहुत कम मात्रा में होती है, लेकिन यह दिल और दिमाग के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. आज इस रिपोर्ट में हम जानेंगे कि किन-किन मछलियों में ओमेगा-3 फैटी एसिड सबसे ज्यादा पाया जाता है.

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आजकल हमारे देश में रोहू, कतला, पाबदा, पार्शे, हिल्सा के अलावा शंकर, खंगा मछली, टूना, कार्प, येलो रॉक, टंग फिश, कोटुआ, वीरल से लेकर झींगा तक सैकड़ों तरह की मछलियां खाई जाती हैं.

लेकिन अगर पूछा जाए कि सेहत के लिए सबसे पौष्टिक मछली कौन सी है, तो बहुत कम लोग इसका जवाब जानते हैं. आज इस रिपोर्ट में हम आपको एक ऐसी मछली के बारे में बताएंगे, जो न सिर्फ स्वाद में बेहतरीन है, बल्कि सेहत के लिए भी खजाना है.

भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तरह की मछलियां मिलती हैं, जो अपने-अपने क्षेत्र की खास और लोकप्रिय मछली मानी जाती हैं. लेकिन आजकल बड़े आयात-निर्यात बाजार की वजह से, दूसरे राज्यों में मिलने वाली कई मछलियां भी बाजारों में बिकती हैं. और हम बिना जाने ही ऐसी मछलियों को नजरअंदाज कर देते हैं.

ऐसी ही एक मछली दक्षिण भारत में बहुत लोकप्रिय है और यह बहुत पौष्टिक भी है. एक तरह से यह मछली पोषण का खजाना है. इसका जिलिपी मछली है. नाम सुनकर भले ही आपको हैरानी हो, लेकिन इसे देखकर आप भी पहचान जाएंगे.

इस प्रजाति की सबसे बड़ी मछली का वजन लगभग 1 किलोग्राम तक होता है. यह मछली खासतौर पर अपने बेहद नरम मांस के लिए जानी जाती है. इसे कभी-कभी मालाबार किंगफिश भी कहा जाता है.

एक्सपर्ट बताते हैं कि जिलिपी मछली प्रोटीन का बहुत अच्छा स्रोत है और इसमें फैट की मात्रा बहुत कम होती है. यह एक हेल्दी मछली है, क्योंकि इसमें मांस की तुलना में ज्यादा पोषक तत्व होते हैं.

जिलिपी मछली में सोडियम, कैलोरी और कुल फैट की मात्रा भी बहुत कम होती है. इसके अलावा, इस मछली की सबसे खास बात यह है कि इसमें ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में होते हैं. ये दिल, आंखों और जोड़ों की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हैं.

सैल्मन मछली को ओमेगा-3 फैटी एसिड का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है, लेकिन जिलिपी मछली में भी यह भरपूर मात्रा में पाया जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि इस मछली को खाने से शरीर में सूजन कम होती है. यह ट्राइग्लिसराइड के स्तर को कम करने में मदद करती है. इसके अलावा, यह मछली धमनियों में प्लाक जमने की प्रक्रिया को भी धीमा करती है.

रिसर्च में पाया गया है कि अगर रोजाना कम से कम 250 मिलीग्राम ओमेगा-3 फैटी एसिड लिया जाए, तो हार्ट अटैक से मौत का खतरा 35 फीसदी तक कम हो जाता है. इसलिए, अगर आप नियमित रूप से जिलिपी मछली खाते हैं, तो आपका दिल स्वस्थ रहता है.

इसके अलावा, डॉक्टरों का कहना है कि इस मछली के फैटी एसिड आर्थराइटिस के लक्षणों को कम करते हैं और डिप्रेशन व याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्याओं से भी बचाते हैं. यह मछली सैचुरेटेड फैटी एसिड से भरपूर है, जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने और दिल की सेहत सुधारने में मदद करता है. नियमित रूप से इस मछली को खाने से स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा भी कम होता है.

सावधानी: यह रिपोर्ट सिर्फ आपकी जानकारी के लिए है. इसमें हमने केवल सामान्य ज्ञान और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी जानकारी दी है. अगर आप अपने स्वास्थ्य, जीवन या विज्ञान से जुड़ी कोई जानकारी पढ़ते हैं, तो उसे अपनाने से पहले किसी विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें.

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