यह गंदी आदत चुपचाप बढ़ा रही आपका तनाव ! वक्त रहते हो जाइए सावधान, वरना बीमारियों का होंगे शिकार

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Dehydration Raises Stress: एक हालिया स्टडी में पता चला है कि डिहाइड्रेशन की वजह से लोगों का तनाव 50% तक बढ़ सकता है. हल्का डिहाइड्रेशन भी कोर्टिसोल हार्मोन को बढ़ा देता है, जिससे कई बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता …और पढ़ें

यह गंदी आदत चुपचाप बढ़ा रही आपका तनाव ! वक्त रहते हो जाइए सावधान, वरना...कम पानी पीने से भी स्ट्रेस लेवल तेजी से बढ़ सकता है.
New Study on Dehydration and Stress: आज के जमाने में हर व्यक्ति तनाव (Stress) से जूझ रहा है. वर्कप्लेस से लेकर लोगों को घर तक तनाव का सामना करना पड़ता है. तनाव हमारी सेहत का सबसे बड़ा दुश्मन है और यह धीरे-धीरे कई गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है. माना जाता है कि काम का दबाव, रिश्तों में परेशानी, आर्थिक और सामाजिक समस्याएं लोगों के तनाव का स्तर बढ़ा देती हैं, लेकिन एक नई स्टडी में बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है. इसमें पता चला है कि कम पानी पीने से भी लोगों के शरीर में स्ट्रेस हार्मोन 50% तक बढ़ सकता है. लंबे समय तक यह गलती करने से कई बीमारियां पैदा हो सकती हैं.

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक इंग्लैंड की जॉन मूर्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने डिहाइड्रेशन और तनाव को लेकर एक स्टडी की है. इसमें पता चला है कि शरीर में तरल पदार्थों की कमी होने पर तनाव का स्तर तेजी से बढ़ जाता है. हल्का डिहाइड्रेशन भी शरीर के तनाव हार्मोन कोर्टिसोल के स्तर को बढ़ा सकता है. रिसर्च में पता चला है कि रोज 1.5 लीटर से कम तरल पदार्थ पीने वाले लोगों में तनाव के दौरान कोर्टिसोल के स्तर में 50% की वृद्धि देखी गई. लंबे समय तक कोर्टिसोल का स्तर बढ़े रहने से दिल की बीमारियां, डायबिटीज और डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है. अगर आप इससे कम पानी पीते हैं, तो यह आपका स्ट्रेस लेवल बढ़ा सकता है.
रिसर्च करने वाले एक्सपर्ट्स की मानें तो हम सभी तनाव को नींद, एक्सरसाइज या मेडिटेशन के जरिए दूर करने की कोशिश करते हैं, लेकिन कम पानी पीने की एक छोटी सी आदत तनाव को तेजी से बढ़ा देती है. हाइड्रेशन केवल हमारी प्यास बुझाने के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि यह हमारे मन को शांत करने में भी मदद करता है. शोधकर्ताओं ने शरीर में प्रमुख तनाव हार्मोन कोर्टिसोल पर तरल पदार्थ के सेवन के प्रभाव की जांच की. उन्होंने पाया कि जो लोग प्रतिदिन 1.5 लीटर से कम तरल पदार्थ का सेवन करते हैं, उनमें तनावग्रस्त होने पर कोर्टिसोल की वृद्धि पर्याप्त पानी पीने वाले व्यक्तियों की तुलना में 50 प्रतिशत ज्यादा थी. कोर्टिसोल पूरी तरह से एक बुरा हार्मोन नहीं है. यह शरीर को तत्काल खतरे पर प्रतिक्रिया देने में मदद करता है. हालांकि जब कोर्टिसोल का स्तर लंबे समय तक बहुत ज्यादा रहता है, तो यह मदद से ज्यादा शरीर को नुकसान पहुंचाने लगता है.

इस स्टडी के लीड ऑथर प्रोफेसर नील वॉल्श का कहना है कि कोर्टिसोल शरीर का मुख्य तनाव हार्मोन है और तनाव के प्रति कोर्टिसोल की बढ़ी हुई प्रतिक्रिया हार्ट डिजीज, डायबिटीज और डिप्रेशन के बढ़ते जोखिम से जुड़ी है. इससे भी ज्यादा आश्चर्यजनक बात यह है कि कम पानी पीने वाले लोगों को खुद को ज्यादा प्यासा महसूस नहीं किया, जितना कि ज्यादा पानी पीने वाले लोगों को महसूस हुआ. कम पानी पीने वालों में डिहाइड्रेशन का एकमात्र संकेत उनकी यूरिन में दिखा, क्योंकि उनकी यूरिन कंसंट्रेट थी. इससे पता चलता है कि हम सिर्फ प्यास पर भरोसा नहीं कर सकते कि हमें कितने पानी की जरूरत है. महिलाओं को प्रतिदिन लगभग 2 लीटर और पुरुषों को 2.5 लीटर पानी पीना ही चाहिए. इसमें पानी के साथ-साथ चाय, कॉफी और अन्य पेय पदार्थों से मिलने वाला तरल पदार्थ भी शामिल हो सकता है. फल और सब्जियां भी इसमें योगदान देती हैं.

अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में करीब 8 साल का अनुभव है. वे हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े टॉपिक पर स्टोरीज लिखते हैं. …और पढ़ें

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में करीब 8 साल का अनुभव है. वे हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े टॉपिक पर स्टोरीज लिखते हैं. … और पढ़ें

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