चना की फसल को बर्बाद कर सकता है ये खतरनाक रोग! एक्सपर्ट से जानें बचाव के आसान तरीके

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चना की फसल को बर्बाद कर सकता है ये खतरनाक रोग! जानें कैसे करें बचाव

 

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खरगोन के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. जीएस कुलमी बताते हैं कि चना की खेती में बुआई के 20 से 30 दिन की अवधि में कॉलर रॉट (ड्राई रूट) का प्रकोप आमतौर पर देखा जाता है. कई बार यह बीमारी किसानों की लापरवाही के कारण भी फैलती है. जरूरत से ज्यादा सिंचाई करने पर खेतों में अधिक नमी बन जाती है, जिससे फफूंद जनित रोग तेजी से पनपने लगते हैं. इसलिए संतुलित मात्रा में सिंचाई करना चाहिए. कॉलर रॉट बीमारी में पौधे पहले हल्के पीले पड़ते हैं और फिर सूखने लगते हैं. वहीं जड़ सड़न में पौधों की जड़ों में फफूंद और कीट लग जाते हैं, जिससे पूरा पौधा सड़ जाता है. ऐसे में मेटालेक्जिल और मैनकोज़ेब दवा 30 ग्राम प्रति पंप पानी में घोलकर जमीन में ड्रेंचिंग या छिड़काव करना चाहिए. यदि यह दवा उपलब्ध न हो तो कार्बेंडाजिम 50 का भी उपयोग किया जा सकता है. ओर अपनी फसल को नष्ट होने से बचाया जा सकता है.

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