Chhatarpur News: छतरपुर के लवकुश नगर के रियाज मोहम्मद की कहानी भी गजब है. रियाज ने MA तक पढ़ाई की है. पीएचडी करना चाहते थे, लेकिन घर की आर्थिक हालात अच्छी नहीं थी, इसलिए पीएचडी नहीं कर सके. सरकारी नौकरी की तैयारी की. जब शादी हो गई और नौकरी भी नहीं लगी तब पुणे में जाकर कपड़े बेचे. फिर लॉकडाउन में घर लौटना पड़ा और यहां इनके दिमाग में ऐसा आइडिया आया, जिसने इनकी जिंदगी बदल दी. अब ये चलते-फिरते दुकान चलाते हैं. लॉकडाउन में इनका बिजनेस चल पड़ा. आज यह घर-घर होम डिलीवरी करते हैं.
रियाज ने लोकल 18 को बताया, मैं पढ़ाई में होशियार था, इसलिए मेरे माता-पिता ने मुझे उच्च शिक्षा ग्रहण करवाई. मैंने छतरपुर महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. मैंने राजनीति विज्ञान से मास्टर डिग्री भी पूरी की है. इसके बाद पीएचडी में प्रवेश लेना चाहता था, लेकिन पापा की तबियत खराब हो गई तो फिर नहीं ले पाया. मैंने सरकारी नौकरी पाने का भी प्रयास किया, लेकिन घर की आर्थिक हालत खराब होने की वजह से पढ़ाई-लिखाई को फिर ज्यादा समय नहीं दे पाया. मैं अपनी दुकान में हर तरह का राशन रखता हूं.
शादी के बाद खर्च चलाना मुश्किल हो गया
रियाज़ बताते हैं कि जब मेरी शादी हो गई है तब आर्थिक हालात और भी खराब होने लगे. खर्च चलाने के लिए मैं पूना भी गया. पूना में कपड़े बेचने का काम भी किया. रियाज बताते हैं कि मैंने सभी तरह की दाल, सभी तरह के अनाज, चावल और मसाले बेचने का बिजनेस सोचा. एक छोटी शुरुआत करते हुए बाजार में जाकर बेचने लगा. इसके बाद मोहल्ले में जाकर बेचने लगा. इसके बाद लॉकडाउन में मेरा बिजनेस बढ़ा और फिर मैंने इसे बढ़ाने का सोचा. इस बिजनेस को मैंने बढ़ाया और इसमें मुझे फायदा भी होने लगा.
लॉकडाउन में बिजनेस को मिली रफ्तार
रियाज़ बताते हैं कि वैसे तो ये बिजनेस 12 साल से कर रहा हूं, लेकिन लॉकडाउन में मेरा बिजनेस चल पड़ा. उस समय होम डिलीवरी की डिमांड ज्यादा थी तो मैंने घर-घर सामान पहुंचाया. इसके बाद मेरी पहचान शहर में बढ़ गई. अब तो बच्चे भी मुझे ‘दाल-चावल वाला अंकल’ कहते हैं, क्योंकि मैं दाल, चावल, मसाले मतलब किचन में लगने वाला हर तरह का राशन बेचता हूं.
ऐसे किया बिजनेस
रियाज बताते हैं कि मैं पहले दूसरों से अनाज, दाल, चावल और खड़े मसाले खरीदता हूं. इसके बाद गेहूं, ज्वार, मक्का और बाजरा का अनाज पिसवाता हूं. साथ ही मसाले भी पिसवाता हूं और फिर मैं इन्हें पूरे लवकुश नगर शहर में मोहल्ले-मोहल्ले और घर बेचता हूं. इससे मुझे मुनाफा अच्छा हो जाता है.
एक दिन में एक मोहल्ला
रियाज बताते हैं कि पूरे लवकुश नगर शहर में एक दिन में तो नहीं घूम पाता हूं, इसलिए मैंने हर दिन हर मोहल्ले का तय कर रखा है. जैसे रविवार को विधायक कॉलोनी में आना होता है. कल दूसरे मोहल्ले में जाना होगा. ऐसे में लोगों को यह पता चलता है कि मैं इस दिन आता हूं तो वह तैयार रहते हैं.
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