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Sadhguru Warn on Eating Habit: विश्व प्रसिद्ध योग गुरु और मानवतावादी सद्गुरु ने खाने की एक आदत को शरीर और स्वास्थ्य के लिए बेहद बुरा माना है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि ऐसा करने से आप अपनी बौद्धिक क्षम…और पढ़ें
सदगुरु के हेल्थ टिप्स. यह गलती सबपर भारी
सदगुरु कहते हैं गलती मतलब अचेतन अवस्था में काम करना. इंसान हमेशा सचेतन अवस्था में काम करता है. इंसान की खूबी यही है कि हम हर चीज चेतनापूर्वक कर सकते हैं. जानवर जो चीज अचेतन में करते है वही हम सचेतन में करते हैं. इसलिए हम इंसान हैं. लेकिन क्या हम भी अचेतन में नहीं खाते हैं. हमारी यही गलती हम पर भारी पड़ती है. यह गलती बेहद मामूली है लेकिन स्वास्थ्य और शरीर को धीरे-धीरे खोखली कर देती है. यह गलती है हम पानी को पीते हैं जबकि हमें पानी को खाना होगा. इसका मतलब यह नहीं कि हम पानी हमेशा पीते जाए. पानी खाने का मतलब यह है कि हमारे भोजन में जो भी चीज हो उसमें से अधिकांश में पानी की मात्रा ज्यादा हो. सदगुरु कहते हैं कि फल ऐसा पदार्थ है जिसमें 90 प्रतिशत पानी रहता है. जब हम यह खाते हैं तो एक तरह से पानी को खाते हैं. इसका पानी हमारे पाचन तंत्र को मजबूत करता है.
खाने के दौरान पानी
सदगुरु कहते हैं कि हम जो चीजें खाते हैं उसमें पानी नहीं रहता. मसलन जो ब्रेड आप खाते हैं वह महीनों पहले बना रहता है और उसमें न तो फाइबर सही से रहता है और न ही पानी. इसलिए हम उसकी भरपाई करने के लिए पानी या कोल्ड ड्रिक या जूस पीते हैं. लेकिन यह गलत तरीका है. खाने के दौरान यदि आप पानी पिएंगे तो इससे पेट में पाचन के लिए जरूरी एसिड और एंजाइम पतले हो जाएंगे जो काम नहीं करेगा. इससे पेट की थैली में भोजन कई घंटों तक रह जाएगा. जबकि ढाई घंटे से ज्यादा भोजन पेट की थैली में नहीं रहना चाहिए. इसलिए यह बेहद खराब तरीका है. इससे सुस्त होने लगते हैं. सबसे बड़ी बात कि यदि आपके पेट की थैली में भोजन देर तक रहता है आप अपनी क्षमता के हिसाब से काम नहीं कर पाएंगे. इससे बौद्धिक क्षमता भी कमजोर होती है. इसलिए पानी खाना चाहिए. आप जो भोजन करते हैं उसमें यह देखना चाहिए कि कितना पानी है. दक्षिण भारत के ज्यादातर चीजों में पानी ज्यादा होती है. इसलिए यहां अधिकांश लोग पानी को खाते हैं.
सदगुरु कहते हैं कि आपका भोजन इस तरह से होना चाहिए कि यह आपके पेट की थैली में डेढ़ से ढ़ाई के अंदर आंत के अन्य हिस्से में चला जाए. इसके लिए पाचन प्रक्रिया के हिसाब से आपको भोजन करना होगा. भोजन में ऐसी चीजों को शामिल कीजिए जिसमें पानी की मात्रा ज्यादा से ज्यादा हो. इसके लिए कुदरती चीजों पर भरोसा कीजिए और घर का बना शुद्ध खाना खाइए. आपके भोजन में जितनी अधिक फल, सब्जी होगी, उतना अधिक आप पानी खाएंगे. जितना अधिक रिफाइंड, प्रोसेस्ड फूड खाएंगे उतना अधिक इसमें पानी की मात्रा कम होगी और यही सेहत के लिए बहुत खराब चीज है. ये फूड आपके पेट की थैली में ढ़ाई घंटे से ज्यादा तक पड़ी रहेगी. फिर पूरी ऊर्जा उसी भोजन को निपटाने में खर्च होगी. इस तरह आप अपनी क्षमताओं को पूरा लाभ नहीं उठा सकेंगे.
Excelled with colors in media industry, enriched more than 18 years of professional experience. L. Narayan contributed to all genres viz print, television and digital media. He professed his contribution in the…और पढ़ें
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