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Kufri jamunia potato : प्रभु श्रीराम की नगरी अपनी आध्यात्मिक धरोहर के साथ अब वैज्ञानिक उपलब्धियों के लिए भी सुर्खियों में है. अयोध्या के कुमारगंज कृषि विश्वविद्यालय ने सब्जी विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल की है. उसने आलू की ऐसी प्रजाति विकसित की है, जो पछेती झुलसा रोग के प्रति अधिक प्रतिरोधक है. सेहत के लिए दूसरे आलू के मुकाबले ज्यादा ताकतवर है.
अयोध्या के कुमारगंज कृषि विश्वविद्यालय के सब्जी विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. सीएन राम ने केंद्रीय आलू शोध संसाधन (शिमला) के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एसके के साथ मिलकर आलू एक नई प्रजाति विकसित की है. इसका नाम कुफरी जमुनिया आलू है.

यह विशेष प्रजाति अपने गहरे बैंगनी रंग के कारण बिल्कुल जामुन जैसी दिखाई देती है. रंग के कारण ये किस्म न केवल देखने में आकर्षक है बल्कि पौष्टिकता में भी बेहद समृद्ध है. वैज्ञानिकों के अनुसार, कुफरी जमुनिया आलू में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा सामान्य आलू से कई गुना अधिक पाई जाती है. इसमें विटामिन, आयरन, पोटैशियम और फाइबर भी अधिक मात्रा में मौजूद हैं.

आलू की ये प्रजाति केवल 90 से 100 दिनों में तैयार की जा सकती है. पिछले वर्ष विश्वविद्यालय के आलू परिक्षेत्र में किए गए परीक्षणों में 30–35 टन प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन दर्ज किया गया. इस वर्ष भी विश्वविद्यालय में बड़े पैमाने पर इसकी बुआई की गई है.
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डॉ. सीएन राम के अनुसार, ये प्रजाति पछेती झुलसा रोग (Late Blight) के प्रति अधिक प्रतिरोधक है. ये खासियत पूर्वांचल के किसानों के लिए बेहद लाभदायक है क्योंकि पूर्वांचल के मौसम में आलू की फसल को झुलसा रोग अक्सर भारी नुकसान पहुंचाता है. तेज प्रतिरोधक क्षमता के कारण किसानों को रासायनिक दवाइयों का कम प्रयोग करना पड़ेगा, जिससे लागत घटेगी और मुनाफा बढ़ेगा.

कई कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि कुफरी जमुनिया आलू आने वाले समय में पूर्वांचल के किसानों के लिए वरदान साबित हो सकता है. उच्च उत्पादन, रोग प्रतिरोधक क्षमता और बेहतर पोषक तत्वों के कारण इसकी मांग तेजी से बढ़ सकती है.
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