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Business Ideas: आपने कभी न कभी किसी लंबे टांगों वाले हट्टे कट्टे बकरे को जरूर देखा होगा. बड़े कान और लंबी सींगों के साथ ये बकरे सबका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करते हैं. ज्यादातर लोग इस बकरे की नस्ल के बारे में नहीं जानते हैं, ऐसे में आज हम आपको इसकी पूरी जानकारी दे रहे हैं. विशेषज्ञ बताते हैं कि इन बकरों का पालन मांस और दूध दोनों पर्पस से खूब किया जाता है.
पश्चिम चम्पारण: आपने कभी न कभी किसी लंबे टांगों वाले हट्टे कट्टे बकरे को जरूर देखा होगा. बड़े कान और लंबी सींगों के साथ ये बकरे सबका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करते हैं. ज्यादातर लोग इस बकरे की नस्ल के बारे में नहीं जानते हैं, ऐसे में आज हम आपको इसकी पूरी जानकारी दे रहे हैं. विशेषज्ञ बताते हैं कि इन बकरों का पालन मांस और दूध दोनों पर्पस से खूब किया जाता है. राजस्थान के सिरोही क्षेत्र से संबंध रखने की वजह से बकरे की इस नस्ल को सिरोही नाम से ही जाना जाता है. आश्चर्य की बात यह है कि वर्तमान में इन बकरों का पालन सिर्फ राजस्थान ही नहीं, बल्कि बिहार और उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में किया जा रहा है.
जिले के माधोपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में कार्यरत पशु वैज्ञानिक डॉ. जगपाल बताते हैं कि सिरोही नस्ल का पालन उनके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है, जो बकरीपालन को कमर्शियल रूप से करना चाहते हैं. बेहद कम खर्च में इन बकरों का पालन पोषण पूरा हो जाता है, जिससे ये महज डेढ़ वर्षों में ही 60 किलो तक वजनी हो जाते हैं. इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि बकरी पालकों के लिए ये नस्ल कितनी लाभदायक साबित हो सकता है.
बकौल जगपाल, सिरोही नस्ल की मादा बकरी एक साल में औसतन दो बार बच्चे देती है. एक बार में एक से दो बच्चे पैदा करती है. बच्चे देने के बाद ये लगातार तीन महीने तक हर दिन एक से डेढ़ लीटर तक दूध का उत्पादन करती हैं. ऐसे में इन्हें सिर्फ मांस ही नहीं, बल्कि दूध के पर्पस से भी पाला जाता है. छरहरा शरीर और लंबी टांगों के साथ बकरी की नस्ल पालकों की पहली पसंद बनते जा रही है. शुरुवाती दौर में इसे राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में पाला जाता था, लेकिन एक लंबे समय से इन्हें बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे राज्यों में भी खूब पाला जाता है.
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