दिल्ली में प्रदूषण से बढ़ गईं ये बीमारियां, लेकिन पॉल्यूशन क्लीनिक में क्यों नहीं आ रहे मरीज?

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दिल्ली में प्रदूषण का स्तर अभी भी बहुत खराब श्रेणी में है. खराब हवा से सांस, हार्ट, ब्रेन, किडनी, लिवर और जोड़ों सहित कई अंग प्रभावित हो रहे हैं. गंगाराम अस्पताल की एक स्टडी में सामने आया है क‍ि द‍िल्‍ली में कैंसर के मरीजों के 50 फीसदी केसेज ब‍िना स‍िगरेट पीने वालों के हैं. आरएमएल अस्‍पताल में देश का पहला पॉल्‍यूशन क्‍लि‍न‍िक चल रहा है, आइए जानते हैं वहां क‍ितने मरीज आ रहे हैं?

प्रदूषण का स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है. प्रदूषण शरीर के हर अंग पर असर डाल रहा है, साथ ही हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर रहा है.यह बच्चे को जन्म से पहले ही प्रभावित कर रहा है.रेस्पिरेटरी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं.

Delhi Very Poor AQI: दिल्ली में प्रदूषण का स्तर अभी भी बहुत खराब श्रेणी में है. जहरीली हवा का असर अब सिर्फ सांसों और फेफड़ों पर ही नहीं पड़ रहा है बल्कि शरीर के लगभग सभी अंगों को अपनी चपेट में ले रहा है. यहां तक कि हाल ही में हुए कुछ अध्ययन इस ओर भी इशारा कर रहे हैं कि खराब हवा में सांस लेना कई सिगरेट पीने के बराबर है और इससे कैंसर का भी खतरा पैदा हो रहा है. ऐसे में प्रदूषण अब सिर्फ रेस्पिरेटरी संबंधी बीमारियों तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि काफी आगे बढ़ गया है.

आरएमएल अस्पताल में प्रदूषण क्लीनिक देख रहे डॉ. अमित जिंदल ने बताया कि आरएमएल में पहला और एकमात्र प्रदूषण क्लीनिक संचालित किया जा रहा है. इसमें सिर्फ रेस्पिरेटरी और पल्मोनरी विभागों के डॉक्टर ही नहीं बल्कि कार्डियोलॉजी और साइकेट्री विभागों से भी एक्सपर्ट बैठते हैं. उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण का स्तर अभी भी काफी ज्यादा है और एक्यूआई अभी भी बहुत खराब श्रेणी में है लेकिन 1 दिसंबर को सोमवार को लगे पॉल्यूशन क्लीनिक में एक भी मरीज दिखाने नहीं आया. जबकि मंगलवार की सुबह रेस्पिरेटरी विभाग की ओपीडी में 100 से भी ज्यादा मरीज उनके सामने दिखाने के लिए खड़े थे.

ऐसे में संभव है कि प्रदूषण से सिर्फ सांसों और फेफड़ों की ही समस्या पैदा नहीं हो रही बल्कि हार्ट, न्यूरो, रूमेटोलॉजिकल और साइकोलॉजिकल असर भी पड़ रहा है लेकिन लोगों को इस बात का अंदाजा ही नहीं है कि ये सभी बीमारियां खराब हवा की वजह से भी हो सकती हैं. यही वजह है कि मरीज पॉल्यूशन क्लिनिक में इलाज लेने के बजाय पर्टिकुलर ओपीडी में पहुंच रहे हैं. मरीजों को लगता है कि पॉल्यूशन क्लीनिक में सिर्फ सांसों के ही मरीजों को जाना है.

डॉ. जिंदल कहते हैं कि इस क्लीनिक में पॉल्यूशन के असर से होने वाली किसी भी प्रकार की बीमारी के लिए एक्सपर्ट मौजूद हैं, फिर चाहे वह हार्ट की बीमारी है या आंखों के रोग या मन और स्किन की बीमारियां. कुछ रिसर्च भी बताती हैं कि खराब हवा में सांस लेने और लगातार प्रदूषक तत्वों व जहरीली गैसों को इन्हेल करने से हार्ट, ब्रेन, किडनी, लिवर सहित शरीर के सभी अंगों पर असर पड़ रहा है.

बिना सिगरेट पीए हो रहा कैंसर, प्रदूषण हो सकता है वजह
हाल ही में दिल्ली के गंगाराम अस्पताल के सेंटर फॉर चेस्ट सर्जरी में 30 साल तक हुए एक अध्ययन की रिपोर्ट बताती है दिल्ली में बिना सिगरेट पीने वाले कैंसर के मरीजों की संख्या 50 फीसदी है. कैंसर से पीड़ित इन लोगों ने कभी सिगरेट नहीं पी थी. स्टडी के मुताबिक 2015 में पूरे भारत में 63,700 केस थे जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 81,200 हो गई. इसका सीधा संबंध दिल्ली की खराब हवा और प्रदूषण से है.

प्रदूषण की वजह से जोड़ों पर भी असर
इंडियन रूमेटोलॉजी एसोसिएशन से जुड़े डॉक्टरों का कहना है कि प्रदूषण का बहुत बुरा असर जोड़ों पर देखने को मिल रहा है और लोगों को रूमेटाइड अर्थराइटिस जैसी बीमारियां हो रही हैं. कम उम्र में जोड़ों में दर्द की समस्या अब बढ़ती जा रही है.

प्रिया गौतमSenior Correspondent

अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्…और पढ़ें

अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्… और पढ़ें

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