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Lakhimpur Kheri: अब कई महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं और अपनी किस्मत बदल रही हैं. ऐसी ही कुछ कहानी लखीमपुर खीरी की 5 महिलाओं की है, जिन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर खुद की किस्मत बदली है.
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में मैदान स्वयं सहायता समूह में जुड़कर महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही हैं. स्वयं सहायता समूह में महिलाओं की किस्मत बदलती है. महिलाओं ने अपना खुद का बिजनेस शुरू किया. थारू जनजाति इलाके की महिलाएं जूट की चप्पल तैयार कर रही हैं. इन चप्पलों की डिमांड पूरे प्रदेश भर में रहती है, जिस कारण स्वयं सहायता समूह की महिलाएं लाखों रुपए आसानी से कमाते हैं. थारू जनजाति की रहने वाली रजनी ने बातचीत करते हुए बताया कि वर्ष 2015 में वह समूह में जुड़ी थीं और अब वह अच्छा व्यापार कर रही हैं और अब उनकी आमदनी भी अच्छी हो गई है.
खीरी जिले में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं सरकार से मदद मिलने के बाद इस समय अच्छा खासा मुनाफा कमा रही हैं. संगीता ने जानकारी देते हुए बताया कि हमारे समूह का नाम सजल प्रेरणा स्वयं सहायता समूह है, जिसके माध्यम से हम पापड़ और चिप्स तैयार कर रहे हैं. यह मार्केट में पापड़ और चिप्स अच्छे रेट में बिक रहे हैं और इससे आमदनी भी अच्छी हो रही है. इस स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाओं की किस्मत बदल रही है.
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के महेशपुर की रहने वाली बबीता कुशवाहा समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर हो रही हैं. वह महिलाओं को रोजगार भी दे रही हैं. वहीं दूसरी बबीता कुशवाहा ने जानकारी देते हुए बताया कि स्वयं सहायता समूह से जहां एक ओर हमें इनकम हो रही है, वही दूसरी ओर एक नई पहचान मिली है. इस समय हम कई प्रकार के अचार तैयार कर रहे हैं. इसमें लाल मिर्च का अचार, लहसुन का अचार और कई प्रकार के अचार तैयार कर मार्केट में सप्लाई कर रही हैं.
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लखीमपुर खीरी जिले के मोहम्मदी तहसील क्षेत्र की धमौला गांव की रहने वाली तबस्सुम इस समय कपड़ों की कढ़ाई कर रही हैं. इस समय वह चिकनकारी कढ़ाई कर रहे हैं. समूह में करीब 10 महिलाएं हैं. चिकनकारी एक तरह की कढ़ाई का काम है, जो आमतौर पर सूती कपड़े पर सफेद सूती धागे से किया जाता है. ये लखनऊ की एक फेमस पारंपरिक कढ़ाई शैली है, जिसे अक्सर “लखनवी चिकनकारी” भी कहा जाता है. चिकनकारी में हल्के और नाजुक डिजाइन बनाए जाते हैं, जिनमें फूलों, पत्तियों, बेलों और जालियों जैसे पैटर्न शामिल हैं.
स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने समाज को स्वस्थ बनाने के लिए मल्टीग्रेन आटा निर्मित करने के क्षेत्र में कदम रखा है. समूह की महिलाओं की ओर से मल्टीग्रेन आटा के लिए खाद्यान्न की साफ-सफाई और खास चक्की से पिसाई कर आटा तैयार किया जा रहा है. रविंद्र कौर ने बताया कि वह समूह में साल 2020 से जुड़ी हुई हैं. लेकिन साल 2023 से उन्होंने अपना खुद का मल्टीग्रेन आटा तैयार करना शुरू कर दिया. इसमें गेहूं का आटा, जौ का आटा, चना, बाजरा, ज्वार, मक्का, रागी का आटा हम समूह के माध्यम से तैयार करती हैं. यहां 1 किलो आटे का रेट 90 रुपए है.
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