देसी चने की ये 5 किस्में मुनाफे की गारंटी, 1 एकड़ में 12 कुंतल तक उत्पादन

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Agriculture News: खरगोन के कृषि वैज्ञानिक डॉ आरके सिंह ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि वर्तमान में खरगोन जिले में देसी चने की कुछ वैरायटी ने अच्छे परिणाम दिए हैं. इनमें RBG 201, RBG 202, RBG 203, RBG 204 और RBG 205 चने की प्रमुख किस्में हैं.

खरगोन. मध्य प्रदेश के खरगोन में चना रबी सीजन की मुख्य फसल मानी जाती है. अक्टूबर के पहले सप्ताह से जिले में सीजन की बुआई शुरू होने वाली है. इस बार भी किसान भाई बड़े पैमाने पर चना बोने की तैयारी में जुट गए हैं. जिले में करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर से ज्यादा रकबे पर चना की खेती होती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि किसान सही किस्म का देसी चना लगाएं, तो वे आसानी से 10 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.

खरगोन के कृषि वैज्ञानिक डॉ आरके सिंह लोकल 18 को बताते हैं कि वर्तमान में जिले में देसी चना की कुछ वैरायटी ने बेहतरीन परिणाम दिए हैं. इनमें RBG 201, RBG 202, RBG 203, RBG 204 और RBG 205 प्रमुख किस्में हैं. किसानों को इन वैरायटी की बुआई करनी चाहिए क्योंकि इनकी उपज क्षमता अन्य किस्मों से ज्यादा है और बीज भी आसानी से उपलब्ध हो जाता है. ये किस्में 115 से 120 दिन में तैयार हो जाती हैं. खास बात यह है कि ये कम पानी में भी उत्पादन देती हैं.

10 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ होगा उत्पादन
डॉ सिंह कहते हैं कि इन सभी किस्मों में खासतौर पर RBG 202 सबसे बेहतर रिजल्ट देती है. इस वैरायटी से किसानों को ज्यादा उत्पादन मिलता है. यही कारण है कि बड़ी संख्या में किसान अब इस किस्म को अपनाने लगे हैं. हालांकि अगर किसान भाई इनमें से कोई भी किस्म खेत में लगाते हैं, तो उन्हें 10 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ तक चना मिल सकता है. ये किस्में न सिर्फ उपज देने में आगे हैं बल्कि इनकी दाने की क्वालिटी भी बेहतर मानी जाती है.

बीज खरीदने में बरतें सावधानी
वैज्ञानिकों ने यह भी सलाह दी है कि किसान भाइयों को हमेशा बीज खरीदने में सावधानी बरतनी चाहिए. बीज केवल उन्हीं दुकानों से लें, जो प्रमाणित और बिल देने वाले हों. कई बार किसान सस्ते बीज के चक्कर में नकली बीज खरीद लेते हैं, जिससे फसल खराब होती है और उत्पादन घट जाता है.

बुआई से पहले करें ये काम
बेहतर उत्पादन के लिए किसान भाइयों को बुआई से पहले खेत की तैयारी पर भी ध्यान देना चाहिए. खेत की अच्छी जुताई कर उसे भुरभुरा बनाना जरूरी है. साथ ही जुताई से पहले खेत में गोबर खाद का उपयोग अवश्य करें. इसके लिए कम से कम 40 से 50 क्विंटल गोबर खाद प्रति एकड़ खेत में डालना चाहिए ताकि मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़े और पौधे मजबूत बनें.

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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देसी चने की ये 5 किस्में मुनाफे की गारंटी, 1 एकड़ में 12 कुंतल तक उत्पादन

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