Fatty Liver Disease: जब लिवर के वजन का 5 प्रतिशत हिस्सा फैट में तब्दील होने लगे तो फैटी लिवर डिजीज होती है. फैटी लिवर डिजीज एक दिन में नहीं होती बल्कि रोज तिनका-तिनका कर लिवर में जमा होती है. यानी जब लिवर के चारों ओर चर्बी उसे घेरने लगे तो यह फैटी लिवर डिजीज की बीमारी है. लिवर हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है क्योंकि यह शरीर की फैक्ट्री है. लिवर हम जो खाते हैं उनमें से पोषक तत्वों को प्रोसेस करता है, टॉक्सिन को हटाता है, शुगर को नियंत्रित करता है और इसी तरह 500 तरह के छोटे-मोटे काम करता है. ऐसे में फैटी लिवर डिजीज अगर किसी को हो जाए तो उसके अंदरुनी शरीर का क्या हाल होता होगा, यह आप समझ सकते हैं. आजकल युवाओं में नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज की बीमारी बहुत होने लगी है. इसका सबसे बड़ा कारण ऑफिस की कुछ गंदी आदतें हैं. आखिर ये क्या आदते हैं, आइए इसके बारे में जानते हैं.
ऑफिस की ये 5 गंदी आदतें
1. डेस्क ब्रेकफास्ट-टीओआई की खबर में डॉ. लवकेश आनंद कहते हैं फैटी लिवर डिजीज के लिए रिफाइंड कार्बोहाइड्रैट और मीठी पैकेटबंद चीजें सबसे बड़ा जिम्मेदार है और ये दोनों चीजें कॉरपोरेट कल्चर में तेजी से उभर रही है. आज के युवा ऑफिस में कई तरह के स्नैक्स अपने ड्रावर में रखते हैं. चॉकलेट, बिस्किट, मीठा सीरियल, बेकरी प्रोडक्ट, चिप्स, व्हाइट ब्रेड आदि. इन सब में रिफाइंड कार्बोहाइड्रैट प्रचूर मात्रा में होता है. ये कार्बोहाइड्रैट जल्दी पचकर ब्लड शुगर को अचानक बढ़ा देता है. इसके बाद लिवर अतिरिक्त शुगर को फैट में बदल देता है, जिसे लिपोजेनेसिस कहते हैं. यह रोज बेहद धीरे-धीरे लिवर में जमा होने लगता है.
2. लिक्विड कैलोरी: ऑफिस में युवा हमेशा तरल पेय पदार्थ का सेवन करते हैं. वे कोल्ड ड्रिक,सॉफ्ट ड्रिंक, डाइट सोडा, शुगरी ड्रिंक, जूस आदि अपने डेस्क पर रखे रहते हैं. इन सबमें फ्रक्टोज़ की मात्रा ज्यादा होती है. फ्रुक्टोज मुख्य रूप से लिवर में प्रोसेस होता है. ज्यादा फ्रक्टोज़ लेने से लिवर में फैट बनने लगता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस भी बढ़ती है, जिससे सेहत पर बुरा असर पड़ता है.
3. जल्दी-जल्दी खाया जाने वाला लंच- आजकल फूड डिलीवरी ऐप्स के कारण ऑफिस में बर्गर, क्रीमी पास्ता, फ्राइड राइस और ज्यादा तेल-मक्खन वाली सब्जियां आम हो गई हैं. इनमें सैचुरेटेड फैट और रिफाइंड कार्बोहाइड्रैट ज्यादा होते हैं. लंबे समय तक बैठे रहने के साथ ये आदतें वजन तो बढ़ाती ही है, साथ में पेट के पास चर्बी की भरमार कर देती है. इससे फैटी लिवर डिजीज होती है.
4. वीकेंड पर ज्यादा शराब पीना- अक्सर युवा ऑफिस में वीकेंड के दिनों में रात भर पब या बार में होते हैं और जमकर शराब पीते हैं. इसके साथ ही प्रोसेस्ड फूड का ज्यादा सेवन करते हैं. इन सबमें रिफाइंड कार्बोहाइड्रैट तो होता ही है, साथ में कई तरह के टॉक्सिन होते हैं जो सीधे लिवर पर दबाव डालते हैं और लिवर के उपर चर्बी की परत बनाने लगते हैं. अगर पहले से ही गलत खान-पान के कारण लिवर में फैट जमा है, तो शराब इसे और खराब कर सकती है. इससे सूजन और फाइब्रोसिस का खतरा बढ़ता है.
5. प्रोटीन की कमी-आजकल शहरों में लोग ज्यादा कैलोरी लेते हैं लेकिन इसमें प्रोटीन कम होता है. जैसे आप ऑफिस में चिप्स या बिस्किट खाते हैं तो इनमें प्रोटीन बहुत कम होता है. अगर आपकी कैलोरी का सबसे ज्यादा हिस्सा प्रोटीन से नहीं आता तो इसका मतलब है कि यह कार्बोहाइड्रैट और फैट से आता है. ये दोनों अगर ज्यादा मात्रा में शरीर में आ जाए तो इससे नुकसान होना तय है. ज्यादातर पैकेटबंद चीजों में प्रोटीन का अभाव रहता है. जाहिर है इससे फैटी लिवर डिजीज भी होगी ही.
क्या फैटी लिवर ठीक हो सकता है?
डॉ. लोकेश आनंद कहते हैं कि अगर आपने अपनी लाइफस्टाइल ठीक कर लिया तो फैटी लिवर डिजीज को रिवर्स किया जा सकता है. इसके लिए आपको पैकेटबंद चीजों से तौबा करना होगा और रोज एक्सरसाइज करनी होगी. साथ में पर्याप्त नींद और तनाव रहित जीना होगा. ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज और कम फैट वाला प्रोटीन लेने से लिवर में जमा फैट कम होता है. शोध बताते हैं कि शरीर के वजन का 5–10% कम करने से लिवर की स्थिति में सुधार आता है. संतुलित आहार, कम चीनी, नियमित शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त नींद से लिवर की सूजन और फैट दोनों घटते हैं. लेकिन इसका कोई एक जादुई इलाज नहीं है पर समाधान आसान है. कम मात्रा में खाना, ज्यादा फाइबर, पर्याप्त प्रोटीन, कम चीनी और रोजाना थोड़ी-थोड़ी शारीरिक गतिविधि. बदलाव के लिए परफेक्ट होना जरूरी नहीं, बल्कि नियमित रहना जरूरी है.