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एक्सपर्ट्स का मानना है कि विशेष रूप से दो प्रकार की मछलियां मधुमेह, उच्च रक्तचाप, लिवर की समस्याओं, हार्ट अटैक और वजन घटाने में मदद करती हैं. क्या आप जानते हैं कि वे कौन सी मछलियां हैं?
बंगाली होने का मतलब ही है मछली प्रेमी. बहुत से लोगों का पेट तब तक नहीं भरता जब तक थाली में मछली न हो. दोपहर के भोजन में चावल के साथ मछली का एक टुकड़ा न केवल पेट भरता है, बल्कि मन को भी संतुष्टि देता है.

चिकन, मटन चाहे खाना अच्छा होता है लेकिन मछली को सबसे फायदेमंद माना जाता है. उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रचूर मात्रा में पाए जाते हैं. ये दिल और दिमाग के दोनों के लिए फायदेमंद हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार, विशेष रूप से दो प्रकार की मछलियां मधुमेह, उच्च रक्तचाप, लिवर की समस्याओं, हार्ट अटैक और वजन घटाने में मदद करती हैं. क्या आप जानते हैं कि वे कौन सी मछलियां हैं?
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दरअसल बाजार जाकर बहुत से लोग उलझन में पड़ जाते हैं कि कौन सी मछली खरीदें. अंत में रूहू-मागुर जैसी जानी-पहचानी मछलियां लेकर ही थैला भरकर घर लौट आते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कौन सी मछली खाने से सबसे ज्यादा पोषण मिलता है? सर्दियों के इस मौसम में बीमारियों को पास नहीं फटकने देने वाली कौन सी मछली है?

आज इस रिपोर्ट में हम वैसी ही दो शानदार जादुई पोषक गुणों वाली मछलियों की जानकारी साझा करने जा रहे हैं. इन्हें खाने की सलाह खुद विशेषज्ञ दे रहे हैं. वे कौन सी दो मछलियां हैं जो बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को तंदुरुस्त रखेंगी? त्वचा-बालों से लेकर हड्डियों या दिल, सबको कौन सी मछली के पोषक तत्व स्वस्थ रखते हैं? चलिए पहचान लेते हैं उन दो ‘बहुमूल्य’ मछलियों को!

पहली मछली है कडुवा मछली. यह मछली ब्लड-प्रेशर कम करती है. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है और लिवर की समस्या को दूर करती है. कडुवा मछली मधुमेह के खिलाफ लड़ने में भी फायदेमंद है.

2017-18 में पश्चिम बंगाल के बेलदा कॉलेज के पोषण विशेषज्ञों ने भी कडुवा मछली के फायदों के बारे में बताया था. पोषण की दृष्टि से यह मछली अन्य मछलियों से बेहतर है. हालांकि इसकी गंध कुछ लोगों को उतनी अच्छी नहीं लग सकती है. लेकिन इस मछली के फायदों के बारे में जानने के बाद, सप्ताह में एक या दो बार इसे ‘मस्ट ईट’ कर लेना जरूरी है.

पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि वंजारम, शंकरा, भाभा और नेथिली जैसी मछलियां पोषण से भरपूर हैं, लेकिन ये महंगी भी हैं. इसकी जगह स्थानीय मछलियां, विशेष रूप से ‘पावला पैरई’ जैसी स्थानीय मछली अच्छी मात्रा में पोषक तत्वों होते हैं. ये मछलियां बाजार में काफी कम कीमत पर भी मिल जाती हैं.

कोरल रीफ मछलियों में प्रचुर मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है. यह शरीर में इन्फ्लेमेशन कम करने और ट्राइग्लिसराइड के स्तर को कम करने में मदद करता है. इसलिए इस मछली को सप्ताह में कम से कम दो बार थाली में रखना अच्छा होता है.

इसके अलावा, ये मछलियां धमनियों में प्लाक जमा होने की गति को धीमा कर देती हैं. रिसर्च में देखा गया है कि प्रतिदिन कम से कम 250 मिलीग्राम ओमेगा-3 का सेवन दिल के रोगों से होने वाली मौत के जोखिम को 35 प्रतिशत तक कम करता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस मछली का सेवन उस मामले में प्रभावी भूमिका निभा सकता है.

कोरल रीफ जैसी मछलियों के पोषक तत्व हृदय रोग, जोड़ों के दर्द और हाई ब्लड-प्रेशर को रोकने में जादू की तरह मदद कर सकते हैं. कम वसा और उच्च प्रोटीन वाली कुछ मछलियां वजन घटाने में भी शानदार तरीके से सहायता करती हैं. इसमें मौजूद पोटेशियम की हाई ब्लड-प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करती है.

शर्त: यह रिपोर्ट केवल आपकी जागरूकता के उद्देश्य से लिखी गई है. हमने इस लेख में केवल सामान्य ज्ञान और दैनिक जीवन की कुछ सामान्य जानकारियां साझा की हैं. यदि आप कहीं अपने स्वास्थ्य, जीवन और विज्ञान के संबंध में कुछ पढ़ते हैं, तो उसे अपनाने से पहले एक विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें.