एक जगह, एक ही मौसम, फिर क्यों किसी की बनती है कपकपी, किसी का छूटता है पसीना, मनोवैज्ञानिक ने बताई हैरान करने वाली वजह

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अक्सर आपने ने देखा होगा कि एक ही परिवार और एक ही जगह पर रहते हुए भी किसी व्यक्ति को ज्यादा ठंड लगती है तो किसी को ज्यादा गर्मी, यह सिर्फ मौसम या शरीर की बनावट का फर्क नहीं है. इसके पीछे ब्रेन हार्मोन और होमियोस्टेसिस काम करते हैं. लोकल 18 से बातचीत में दुनिया के चर्चित मनोवैज्ञानिक Er R. Shankar ने लोकल 18 के साथ इसके बारे में पूरी जानकारी साझा की है..

बेगूसराय: अक्सर आपने देखा होगा कि एक जगह पर किसी को ज्यादा ठंड लगती है तो किसी को बिल्कुल नहीं, वहीं गर्मी में भी किसी का पसीना छूटता है तो कोई सामान्य रहता है. आमतौर पर लोग इसे शरीर की बनावट या कमजोरी से जोड़ते हैं, लेकिन अब इस पर मनोवैज्ञानिक नजरिया सामने आया है. आइए समझते हैं

लोकल 18 से बातचीत में जाने-माने मनोवैज्ञानिक और एसोसिएट मेंबर ऑफ द इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स, इंडिया Er R. Shankar ने बताया कि ठंड या गर्मी का एहसास सिर्फ बाहरी मौसम से तय नहीं होता, बल्कि हमारे ब्रेन की स्थिति भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है. उनके अनुसार हर इंसान का सोचने, महसूस करने और व्यवहार करने का तरीका अलग होता है, इसलिए ब्रेन की कार्यप्रणाली भी अलग होती है.

उन्होंने समझाया कि यदि किसी व्यक्ति का ब्रेन हार्मोन और होमियोस्टेसिस में है तो वह तापमान को सामान्य तरीके से महसूस करता है, जैसा बाकी लोग करते हैं. लेकिन अगर किसी के दिमाग में तनाव है या मानसिक संतुलन बिगड़ा हुआ है, तो शरीर का टेंपरेचर रेगुलेटरी सिस्टम प्रभावित हो सकता है. इससे हाइपोथैलेमस पर असर पड़ता है, जो शरीर का तापमान नियंत्रित करता है. यही कारण है कि ऐसे लोगों की स्किन सेंसिटिविटी बढ़ जाती है और उन्हें ज्यादा ठंड या ज्यादा गर्मी महसूस होने लगती है.

दवाई नहीं, मानसिक संतुलन है समाधान
Er R. Shankar के मुताबिक कई लोग इसे बीमारी समझकर दवा लेने लगते हैं, जबकि इसका समाधान हमेशा मेडिकल दवा में नहीं होता. उन्होंने कहा कि अगर समस्या ब्रेन हार्मोनी से जुड़ी है तो उसे मानसिक संतुलन, तनाव नियंत्रण, सकारात्मक सोच और मनोवैज्ञानिक उपायों से बेहतर किया जा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर और दिमाग दोनों मिलकर ही तापमान के एहसास को नियंत्रित करते हैं. इसलिए अगर किसी को सामान्य से ज्यादा ठंड या गर्मी लगती है, तो सिर्फ शरीर नहीं बल्कि मानसिक स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है. यही संतुलन बेहतर जीवन और बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी माना जाता है . इस हालत में इंसानों को तुरंत मनोविज्ञान की सलाह लेना चाहिए. बेहतर जीवन के लिए मनोवैज्ञानिक की सलाह जरूर लेना चाहिए.

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Mohd Majid

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Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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