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Sidhi News: रीवा निवासी मुनेश प्रसाद चौरसिया ने लोकल 18 से कहा कि उनका परिवार पीढ़ियों से पान के व्यवसाय से जुड़ा है. पहले गुड्ड के महसांव से पान आता था.अब ज्यादातर सप्लाई बाहरी राज्यों से हो रही है. सीधी जिले में बंगला पत्ता और मीठी पत्ती की भारी मांग रहती है.
मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में पान सिर्फ एक पत्ता नहीं, बल्कि संस्कृति, आस्था और परंपरा का हिस्सा है. खासकर सीधी जिले में पान की रौनक आज भी मंडियों में दिखाई देती है. यहां मीठी पत्ती पान की सबसे ज्यादा मांग रहती है, जिसे कोलकाता से मंगाया जाता है. इस किस्म की मिठास और खुशबू इसे बाकी पानों से अलग बनाती है. मध्य प्रदेश में पान की खेती तो होती है, लेकिन खास मीठी पत्ती के लिए व्यापारी कोलकाता पर निर्भर रहते हैं.
सीधी जिले का गांधी चौक स्थित पान मंडी करीब 100 से 120 साल पुरानी मानी जाती है. कहा जाता है कि यह मंडी पीढ़ियों से पान व्यापार का बड़ा केंद्र रही है. यहां देशभर से मीठी पत्ती और बंगला पान के पत्ते आते हैं. फिर विंध्य के रीवा, सतना, शहडोल, उमरिया और आसपास के जिलों तक सप्लाई किए जाते हैं. स्थानीय व्यापारियों की मानें तो सीधी की मंडी ने वर्षों में अपनी अलग पहचान बनाई है.
40 रुपये प्रति मिलता है सैकड़ा
रीवा निवासी मुनेश प्रसाद चौरसिया ने लोकल 18 से कहा कि उनका परिवार पीढ़ियों से पान के व्यवसाय से जुड़ा है. पहले गुड्ड के महसांव से पान आता था.अब ज्यादातर सप्लाई बाहरी राज्यों से हो रही है. सीधी जिले में बंगला पत्ता और मीठी पत्ती की भारी मांग रहती है. बंगला पान उमरिया और बुढ़ागढ़ से आता है, जबकि मीठी पत्ती कोलकाता से आती है. सतना के व्यापारी इसे मंगवाकर सीधी भेजते हैं. वर्तमान में मीठी पत्ती की रोजाना बिक्री 6000 से 7000 के बीच पहुंच जाती है, जबकि इसकी कीमत 220 से 240 रुपये प्रति सैकड़ा है. शादी के मौसम में दाम और बढ़ जाते हैं.सीधी मंडी में तेजवाली चौरसिया, जो 40 साल से पान व्यापार कर रहे हैं. पहले रोजाना 40,000 पान के पत्ते बिक जाते थे. लेकिन कोरोना के बाद गुटखे की बढ़ती लत ने पान की बिक्री को भारी नुकसान पहुंचाया है
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