जब अमेरिका ने भारत पर हाई टैरिफ लगाया था, तब अधिकांश बाजार विशेषज्ञों का मानना था कि इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर नकारात्मक असर पड़ेगा. हालांकि, भारत ने जीएसटी जैसे सुधारों के जरिए घरेलू मांग को मजबूती दी और अमेरिका पर निर्भरता कम करने के लिए कई देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट जैसे बड़े कदम उठाए. इसी का नतीजा रहा कि कई रिपोर्ट्स में यह सामने आया है कि हाई टैरिफ के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा और उलटे निर्यात में बढ़ोतरी देखने को मिली.
टैरिफ से भी बड़ा खतरा
दूसरी ओर, भारतीय-अमेरिकी अर्थशास्त्री और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर गीता गोपीनाथ का मानना है कि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा टैरिफ नहीं, बल्कि बढ़ता प्रदूषण है. उनका कहना है कि प्रदूषण धीरे-धीरे भारत की ग्रोथ के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है, क्योंकि इससे न केवल आर्थिक लागत बढ़ रही है बल्कि मानव जीवन पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है.
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि व्यापार, टैरिफ और नियमों पर तो काफी चर्चा होती है, लेकिन प्रदूषण जैसी बड़ी समस्या को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है.
भारत में हर साल लाखों मौतें
गीता गोपीनाथ ने वर्ल्ड बैंक की 2022 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि भारत में हर साल करीब 17 लाख लोगों की मौत प्रदूषण से जुड़ी वजहों से होती है, जो अर्थव्यवस्था, वर्कफोर्स और दीर्घकालिक विकास पर भारी बोझ डालती है. उन्होंने यह भी कहा कि प्रदूषण केवल भारत की आंतरिक समस्या नहीं है, बल्कि यह उन विदेशी निवेशकों के लिए भी चिंता का विषय है, जो भारत में बड़े निवेश की योजना बना रहे हैं.
गौरतलब है कि अमेरिका की तरफ से भारत के ऊपर 25 प्रतिशत का बेस टैरिफ लगाया गया है. जबकि अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ रूस से कच्चे तेल कम दाम पर खरीदने की वजह से लगाया गया है. इस तरह से कुल भारत पर अमेरिकी टैरिफ की दरें 50 प्रतिशत है. दोनों देशों के बीच अब तक कई बार ट्रेड डील पर बातचीत हुई, लेकिन अंतिम समझौता नहीं हो पाया. अब माना जा रहा है कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील अंतिम दौर में है.
.