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Indore News: ईरानी चाय (Irani Tea in Indore) आम चाय की तरह नहीं बनाई जाती. इस चाय में नमक का उपयोग किया जाता है और यह आम नमक नहीं होता है. इसका नमक अलग आता है. ईरानी चाय को सिर्फ तांबे के बर्तन में ही बनाया जात…और पढ़ें
मदीना होटल के मालिक ने लोकल 18 को बताया कि यह चाय आम चाय की तरह नहीं बनाई जाती. ईरानी चाय में नमक का इस्तेमाल किया जाता है. यह आम नमक नहीं होता है. इस चाय का नमक अलग आता है. चाय को केवल तांबे के बर्तन में ही बनाया जाता है. दो अलग-अलग बर्तनों में दिनभर दूध और पानी उबलता रहता है. पानी में चायपत्ती होती है, जिसे ब्लैक टी कहा जाता है. बाद में दोनों को मिलाया जाता है. प्याली में चाय को डालने के बाद उसमें मलाई डाली जाती है.
ईरानी चाय का सबसे बड़ा फायदा है कि इस चाय को पीने वाले का गला कभी खराब नहीं होता. खांसी होने की संभावनाएं भी बहुत ही कम हो जाती हैं. यही कारण है कि इस चाय को पीने वाले एक बार में इसकी 10 से 15 प्याली तक पी जाते हैं. सुबह और शाम के समय दुकान पर भारी भीड़ देखने को मिलती है.
फारसी प्रवासी लाए थे चाय
इस चाय को 19वीं सदी में फारसी प्रवासी ईरान से यहां लाए थे, जो यहां व्यापार करने और व्यवस्थित जीवन की तलाश में भारत आए थे. चाय को बनाने की पूरी प्रोसेस ईरान के कहवा से मिलती-जुलती है. जिस प्रकार कहवा में पानी के अंदर सारी सामग्रियां डालकर उसे उबाला जाता है, ठीक वैसे ही ईरानी चाय में भी ब्लैक टी को उबालकर उसके बाद उसमें दूध मिलाकर ग्राहकों को परोसा जाता है.
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