रियल एस्टेट सेक्टर के वापसी की कहानी, सालों से अटके प्रोजेक्ट्स को मिल रही रफ्तार

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Real Estate Projects India: देश के कई बड़े शहरों में हजारों रियल एस्टेट परियोजनाएं वित्तीय संकट, कर्ज के दबाव, कमजोर बिक्री और कानूनी विवादों के कारण वर्षों से अधूरी पड़ी थीं. हालांकि RERA के लागू होने के बाद कुछ सुधार देखने को मिला.

लेकिन पिछले 1-2 वर्षों में सरकारी और निजी फंडिंग, बढ़ती मांग और नए मॉडल्स ने इन परियोजनाओं को फिर से पटरी पर लाने में अहम भूमिका निभाई है.

स्वामिह फंड बना सहारा

SWAMIH Fund (स्पेशल विंडो फॉर अफोर्डेबल एंड मिड इनकम हाउसिंग) की शुरुआत 2019 में हुई थी. 25 हजार करोड़ रुपये के इस फंड का उद्देश्य उन परियोजनाओं को अंतिम चरण की फंडिंग देना है, जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं लेकिन धन की कमी के कारण अधूरी रह गई थीं. SBI Capital Markets की निगरानी में इन परियोजनाओं का निर्माण पूरा कराया जाता है.

अनुमान के अनुसार, देशभर में 145 परियोजनाओं की करीब 61 हजार यूनिट्स पूरी हो चुकी हैं, जिससे लगभग 37 हजार करोड़ रुपये की अटकी पूंजी दोबारा चलन में आई है. इसी को देखते हुए 15 हजार करोड़ रुपये का SWAMIH फंड 2.0 भी लाया गया है, जिसका लक्ष्य 1 लाख घरों को पूरा करना है.

क्या कहते हैं विषय के जानकार?

Greater Noida West की KVD विंड पार्क परियोजना को दोबारा शुरू करने वाली कंपनी ReErco की एमडी Geetanjali Khanna का कहना है कि समयबद्ध निर्माण और मजबूत वित्तीय प्रबंधन के आधार पर उन्हें SWAMIH फंड मिला. उनकी प्राथमिकता बेहतर निर्माण के साथ समय पर पजेशन देना है.

वहीं CREDAI वेस्टर्न यूपी के अध्यक्ष Dinesh Gupta के अनुसार, फंसे प्रोजेक्ट्स को पूरा कराने में फंडिंग सबसे अहम कड़ी है, क्योंकि नकदी की कमी से निर्माण रुकता है और खरीदारों का भरोसा भी प्रभावित होता है.

निजी फंडिंग भी बनी ताकत

सरकारी पहल के साथ-साथ निजी संस्थान भी वैकल्पिक निवेश फंड (AIF) के जरिए अधूरी परियोजनाओं में निवेश कर रहे हैं. निवेश से पहले जमीन, कानूनी स्थिति और बाजार की मांग का गहन आकलन किया जाता है.

SGRE Fund ने एनसीआर की परियोजनाओं में करीब 125 करोड़ रुपये का निवेश किया है. इसके लीड प्रमोटर Suresh Garg का कहना है कि जिन परियोजनाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत है और जिन पर कोई कानूनी विवाद नहीं है, उन्हें प्राथमिकता दी जाती है.

वहीं Renox Group के चेयरमैन Shailendra Sharma के अनुसार, अधूरी परियोजनाओं को दोबारा शुरू करने के लिए प्राधिकरण, बैंक और आवंटियों का बकाया चुकाना जरूरी होता है, और वैकल्पिक फंडिंग सेक्टर को नई दिशा दे सकती है.

इनसॉल्वेंसी और नए मॉडल से राहत

NCLT के जरिए भी कई परियोजनाओं का समाधान किया जा रहा है. हालांकि सफलता सीमित रही है, लेकिन बढ़ती मांग के कारण अब कई प्रोजेक्ट्स आईआरपी की निगरानी में पूरे किए जा रहे हैं.

RG Group के निदेशक Himanshu Garg के अनुसार, रिवर्स इनसॉल्वेंसी मॉडल के तहत प्रोजेक्ट्स को दोबारा गति मिल रही है और हजारों यूनिट्स का पजेशन दिया जा रहा है.

इसके अलावा ‘रिफर्बिश और रेनोवेशन’ मॉडल भी तेजी से उभर रहा है, जिसमें अधूरे टावर नए डेवलपर्स को देकर पूरा कराया जाता है. Vision Business Park के निदेशक Atul Vikram Singh के अनुसार, लंबे समय से रुके प्रोजेक्ट्स को अब नए रूप में बाजार में लाया जा रहा है, जिससे सप्लाई और स्थिरता दोनों बढ़ रही हैं.

कुल मिलाकर, सरकारी और निजी फंडिंग, इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया और नए डेवलपमेंट मॉडल्स के चलते फंसे रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को नई गति मिल रही है और इससे घर खरीदारों का भरोसा भी धीरे-धीरे लौट रहा है.

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